कंचन
गया : शनिवार की सुबह एक ट्रैक्टर चालक ने न सिर्फ दाे बच्चाें की जान ले ली, बल्कि उनकी दुनिया ही उजाड़ दी. उनके घर का चिराग बुझ गया. घरवालों के रुदन-क्रंदन से लोग भावुक हो रहे थे. बिट्टू (छोटा भीम) के नाना राजू रजक बार-बार बेहाेश हाे जा रहे थे.
उन्होंने कहा, ‘हमर बेटिया के न रखतई बाबू. बिट्टू की मां अप्पन ससुराल से इ कहके अइलई हल बाबू कि कुछे दिन बाद अप्पन माय-बाबूजी से मिलके चल अइबाे. बड़ी मनीता (मन्नत) के बाद इ बाबू हाेलई हल. रूपा के ससुराल में बेटा न हई. एहे एगाे चिराग हलई. अब का हाेतई. बाबू के दादा मना करइत हलथी कि ठंडा में न लेके जा. इहां अइल पर हमनी भी बेटी के जाएला कहली. ठंढा के चलते न जा पइलई. आैर दुशमनवा ट्रैक्टरवा वाला हमर बाबू के हमनी से छिन लेलक. बाबू के सावने में मुड़ना करावे ला हलई. साहेब कइसहुं हमर बाबू के जिला द बाबू.’ उनकी पत्नी उर्मिला देवी का भी बुरा हाल था. बेटी रूपा ताे दहाड़े मार कर राे रही थी. वह राेते-राेते बेहाेश हाे जा रही थी.
उधर, बगल के शिबू की मां व तीनाें बहनें प्रीति, पिंकी व बेबी भी अपने मृत भाई का बार-बार ढंका मुंह खाेल कर देख दहाड़ मार कर राे रही थी. मां यह कहकर कि ‘अब केकरा ला जिंदा रहिआे बाबू. हमरा छाेड़ के कहां चल गेले बाबू.’ उनके घर से लेकर पाेस्टमार्टम रूम तक बड़ा मार्मिक माहाैल था. पाेस्टमार्टम के लिए ले जाये गये दाेनाें बच्चाें के अंत्यपरीक्षण में देर हाेने के बाद एक बार शिबू काे उसकी मां, चचेरे भाई व बुआ माेटरसाइकिल से लेकर चले आये कि बाबू के शरीर के हम चीर-फाड़ न कराइब.
बिना पाेस्टमार्टम के लाश लेकर लाैट रहे लाेगाें काे रामपुर थानाध्यक्ष जीएस गुप्ता ने पाेद्दार पेट्राेल पंप के पास राेका.पर, वे फिर वहां से आगे बढ़ने लगे. काेतवाली थानाध्यक्ष व अन्य पुलिसकर्मी उन्हें मना कर पुलिस जीप पर बैठा पाेस्टमार्टम रूम ले गये आैर अंत्यपरीक्षण कराया.
