कलेंद्र प्रताप, बोधगया : श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति राणसिंघे प्रेमदासा ने बड़े ही दयालुता व श्रद्धा के साथ बोधगया के गरीब परिवारों के लिए 100 घरों का एक कॉलोनी बनवाया था और 13 अप्रैल 1993 को वह स्वयं बोधगया पहुंच कर लाभुकों को घरों की चाबी सौंपी थी पर, आज ये सभी घरों व कॉलोनी की स्थिति बदहाल हो चुकी है.
श्रीलंकाई राष्ट्रपति प्रेमदासा के बनाये घरों की स्थिति खराब
कलेंद्र प्रताप, बोधगया : श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति राणसिंघे प्रेमदासा ने बड़े ही दयालुता व श्रद्धा के साथ बोधगया के गरीब परिवारों के लिए 100 घरों का एक कॉलोनी बनवाया था और 13 अप्रैल 1993 को वह स्वयं बोधगया पहुंच कर लाभुकों को घरों की चाबी सौंपी थी पर, आज ये सभी घरों व कॉलोनी […]

बुद्धगया ग्राम के नाम से प्रेमदासा ने करीब 75 लाख की लागत से 100 परिवारों के लिए आवास बनवाया था. बुद्धगया ग्राम में आवासीय सुविधा के तहत नाली व गली भी बनवाये गये थे. यहां के लोगों के लिए एक सामुदायिक भवन का भी निर्माण कराया गया था. लेकिन, आज स्थिति बेहद खराब बनी हुई है.
लाभुकों के घर जर्जर हो चुके हैं और सामुदायिक भवन परिसर में नगर पंचायत ने कचरा का डंपिंग केंद्र बनाया हुआ है. कचरा उठाव करने वाली गाड़ियांं भी यहां खड़ी जाती है. अब सोमवार को श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे का भी बोधगया अागमन हो रहा है. इसकी सूचना पर बुद्धगया ग्राम के लोगों में फिर से तत्कालीन राष्ट्रपति प्रेमदासा की याद ताजा हो गयी.
लोगों का कहना है कि प्रेमदासा के बाद श्रीलंका के कई राष्ट्राध्यक्ष, जिनमें पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका कुमार तुंगा, राष्ट्रपति रहते खुद महिंदा राजपक्षे व अन्य कई श्रीलंकाई राजनेता बोधगया का भ्रमण कर चुके हैं, पर वे सभी अपने देश के पूर्व राष्ट्रपति द्वारा यहां बनवाये गये घरों की स्थिति की सुधी नहीं ली. स्थानीय व्यवस्था पर भी लोगों की नाराजगी है. इस बारे में स्थानीय विधायक कुमार सर्वजीत ने कहा कि बुद्धगया ग्राम अब पिपरपांती व मस्तीपुर के नाम से जाना जाता है.
यहां की स्थिति से अवगत कराने के लिए नगर पंचायत के तीन-तीन कार्यपालक पदाधिकारियों को स्थल भ्रमण कराया. पूर्व डीएम कुमार रवि से भी सरकार की सात निश्चय योजना के तहत कार्य कराने की अपील की थी. लेकिन, विशुद्ध रूप से भुईयां जाति के लोगों के रहने के लिए बने बुद्धगया ग्राम (पिपरपांती व मस्तीपुर) की स्थिति आज भी नारकीय बनी हुई है.