Ford Hospital: अगमकुआं की रहने वाली 35 वर्षीय गर्भवती अर्पणा कुमारी (बदला हुआ नाम) की जान फोर्ड हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने समय रहते बचा ली. मरीज को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था, जहां जांच में पता चला कि नॉर्मल डिलीवरी कराने के प्रयास में दी गई दर्द बढ़ाने वाली दवाओं के कारण उसकी बच्चेदानी (यूटेरस) फट चुकी थी.
अत्यधिक ब्लीडिंग होने से गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई थी और महिला की जान पर भी खतरा मंडरा रहा था. डॉक्टरों ने तुरंत ऑपरेशन का निर्णय लिया. स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. जागृति भारद्वाज, डॉ. अनिता सिंह और जेनरल सर्जन डॉ. आलोक कुमार की टीम ने इमरजेंसी सर्जरी कर बच्चेदानी को रिपेयर किया और महिला की जान बचा ली.
डॉ. जागृति भारद्वाज ने बताया कि मरीज को तेज दर्द और अत्यधिक रक्तस्राव की स्थिति में भर्ती कराया गया. जांच में सामने आया कि दवाओं के प्रभाव से बच्चे का सिर नीचे फंस गया था, जिससे यूटेरस रप्चर हो गया.
उन्होंने बताया कि डिलीवरी हमेशा स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह पर ही करवानी चाहिए कि डिलीवरी नार्मल होगी या ऑपरेशन से होगी.अगर डॉक्टर ऑपरेशन की सलाह देते हैं तो उनकी सलाह को मानना चाहिए क्योंकि डॉक्टर को मरीज की स्थिति का पता होता है कि मरीज के लिए क्या सही होगा. गर्भवती महिलाओं को बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द बढ़ाने वाली दवाएं नहीं लेनी चाहिए.
डॉ. भारद्वाज ने यह भी बताया कि मरीज का पहला बच्चा भी ऑपरेशन से हुआ था, जबकि दूसरी बार गर्भ में ही बच्चे की मौत हो गई थी. इस बार भी स्थिति बेहद गंभीर थी, लेकिन समय पर इलाज मिलने से मां को बचा लिया गया.
