Expressway In Bihar: बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को लेकर चल रही परियोजनाएं आने वाले समय में राज्य की तस्वीर को बदल सकती है. राज्य में पांच महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे और हाई-स्पीड कॉरिडोर तैयार करने की दिशा में काम चल रहा है. ये सड़कें बिहार के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों और बड़े आर्थिक केंद्रों तक पहुंच आसान बनाने वाली हैं.
सबसे खास बात यह है कि इन परियोजनाओं का असर सिर्फ रफ्तार पर नहीं पड़ेगा बल्कि सड़क बेहतर होगी तो किसान अपनी उपज बड़े बाजारों तक जल्दी पहुंचा सकेंगे, कारोबारियों के लिए माल ढुलाई आसान होगी और उद्योगों के लिए नए रास्ते खुल सकते हैं. इस तरह से साफ है कि एक्सप्रेसवे सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि रोजगार और कारोबार की नई लाइन भी बन सकते हैं. ऐसे में बिहार में बनने वाले 5 एक्सप्रेसवे के बारे में पढ़िए पूरी रिपोर्ट...
बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे
बिहार सरकार ने बक्सर से भागलपुर तक 336 किलोमीटर लंबे 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण को हरी झंडी दी थी. इसे बिहार का अब तक का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे बताया जा रहा है. एक्सप्रेसवे के बनने से दक्षिण बिहार के कई जिलों में आवागमन आसान होगा. इस परियोजना पर लगभग 3,700 से 3,750 करोड़ खर्च होने का अनुमान है.
13 जिलों से गुजरेगा एक्सप्रेसवे
जानकारी के मुताबिक, यह एक्सप्रेसवे बिहार के 13 जिलों बक्सर, भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, गया, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, नवादा, जमुई, बांका और भागलपुर से गुजरेगा. खास बात यह है कि बक्सर में यह उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ जाएगा. गाड़ियां बक्सर से इस एक्सप्रेसवे के जरिए दक्षिण बिहार होते हुए बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों की तरफ जा सकेंगे. इससे लंबी दूरी के सफर में समय की बचत होगी.
इन नदियों पर बनाए जायेंगे पुल
अभी बक्सर से भागलपुर जाने में करीब 10 से 12 घंटे तक का समय लग सकता है. एक्सप्रेसवे बनने के बाद यह दूरी करीब 4 से 5 घंटे में तय होने की उम्मीद है. एक्सप्रेसवे के रास्ते में कई बड़ी नदियां आएंगी. ऐसे में इन्हें पार करने के लिए बड़े पुल और जरूरत के मुताबिक एलिवेटेड स्ट्रक्चर बनाए जाएंगे. सोन, पुनपुन, फल्गु और किऊल जैसी नदियों पर बनने वाले पुल इस परियोजना का अहम हिस्सा होंगे.
आमस–दरभंगा एक्सप्रेसवे
आमस–दरभंगा एक्सप्रेसवे का बिहार में लगभग 170 किलोमीटर लंबा हिस्सा होगा. यह एक्सप्रेसवे औरंगाबाद, गयाजी, जहानाबाद, पटना, वैशाली, समस्तीपुर और दरभंगा से होकर गुजरेगा. इस प्रोजेक्ट पर 7 हिस्सों में काम किया जाएगा. इसके बनने से उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल की तरफ लंबी दूरी का सफर करने वाले लोगों का समय भी बच सकता है.
बोधगया-राजगीर को जोड़ने के लिए भेजा प्रस्ताव
हाल ही में यह खबर सामने आई थी कि बोधगया को भी इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा. आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे से बोधगया और राजगीर को संपर्क सड़क के जरिए जोड़ने का सुझाव केंद्र को भेजा गया है. अगर बोधगया और राजगीर तक प्रस्तावित ब्रांच सड़क को मंजूरी मिलती है, तो इन पर्यटन स्थलों की एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी और मजबूत हो जाएगी.
पटना-दरभंगा की दूरी 4 घंटे में होगी पूरी
इसके बनने से गया और दरभंगा के बीच का सफर (जो वर्तमान में 5-6 घंटे लेता है) घटकर सिर्फ 2.5 से 3 घंटे का रह जाएगा. पटना से दरभंगा का सफर भी लगभग 4 घंटे में पूरा हो सकेगा. इस एक्सप्रेसवे की टोटल लंबाई 189 किलोमीटर की होगी. इस योजना का फायदा सिर्फ स्थानीय लोगों को नहीं मिलेगा. देश के दूसरे हिस्सों से बिहार आने वाले पर्यटकों के लिए भी राजगीर और बोधगया तक पहुंचना आसान हो सकता है.
पटना–पूर्णिया एक्सप्रेसवे
पटना–पूर्णिया एक्सप्रेसवे बिहार का पहला पूरी तरह एक्सेस-कंट्रोल्ड 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (National Expressway 9 - NE-9) है. इस परियोजना के बन जाने से पटना से पूर्णिया की दूरी तय करने में लगने वाला समय लगभग 7 घंटे से घटकर सिर्फ 3 घंटे रह जाएगा.
कब तक पूरा होगा प्रोजेक्ट?
जानकारी के मुताबिक, यह परियोजना लगभग 245 से 250 किलोमीटर लंबी है. इस एक्सप्रेसवे पर गाड़ियां 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगी. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस परियोजना को 2028 तक पूरा कर लेने का लक्ष्य तय किया है.
बनाए जायेंगे 140 नए पुल
जानकारी के मुताबिक, हाई-स्पीड पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे में 140 छोटे पुल बनाए जायेंगे. इसके साथ ही 21 हाई लेबल पुल बनेंगे. इसके अलावा 11 रेलवे ओवरब्रिज लगभग 21 इंटरचेंज से गुजरेगा. इसमें 322 अंडरपास बनाए जायेंगे. इस तरह से यह प्रोजेक्ट बिहार के विकास के लिए बेहद खास मानी जा रही है.
कहां से कहां तक जाएगा एक्सप्रेसवे?
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे सारण जिले के दिघवारा से शुरू होकर पूर्णिया के डगरूआ तक जाएगा. जानकारी के मुताबिक, पटना और पूर्णिया के बीच कुल 21 इंटरचेंज बनाए जाएंगे, जिनमें अकेले पूर्णिया जिले में 8 इंटरचेंज होंगे. पूर्णिया एयरपोर्ट से इसकी सीधी कनेक्टिविटी होगी. साथ ही यह वैशाली में आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे को भी पार करेगा.
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रक्सौल–हल्दिया एक्सप्रेसवे
रक्सौल–हल्दिया एक्सप्रेसवे नेपाल सीमा पर स्थित बिहार के रक्सौल से शुरू होकर पश्चिम बंगाल के हल्दिया बंदरगाह तक जाने वाला लगभग 585 से 600 किलोमीटर लंबा एक प्रस्तावित 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है. इसका सबसे बड़ा हिस्सा बिहार राज्य में पड़ता है. बिहार में इसकी लंबाई लगभग 406 किलोमीटर होगी.
बिहार में सबसे ज्यादा होगा एक्सप्रेसवे का हिस्सा
इस एक्सप्रेसवे के बनने से झारखंड और पश्चिम बंगाल आना-जाना आसान होगा. झारखंड में यह करीब 90 किलोमीटर और पश्चिम बंगाल में 90 से 100 किलोमीटर के बीच रहेगा. जानकारी के मुताबिक, इस एक्सप्रेसवे को बनाने में लगभग 40 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जायेंगे. इस प्रोजेक्ट को 2028 तक पूरा कर लेने का लक्ष्य तय किया गया है.
रक्सौल-हल्दिया की दूरी सिर्फ 10 घंटे
रक्सौल–हल्दिया एक्सप्रेसवे के बनने से रक्सौल और हल्दिया के बीच की दूरी सिर्फ 10 घंटे की रह जाएगी. बिहार से आसपास के राज्यों तक आयात-निर्यात आसान हो सकेगा. जिन भी जिलों से यह एक्सप्रेसवे गुजरेगा वहां रोजगार और उद्योग को भी बढ़ावा मिल सकेगा.
गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे
गोरखपुर-सिलीगुड़ी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे भी बिहार के लिए बेहद खास माना जा रहा है. बिहार में इस एक्सप्रेसवे की लंबाई लगभग 416 किलोमीटर की होगी. यह एक्सप्रेसवे बिहार के पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज जिलों से होकर गुजरेगा.
2028 तक पूरा होगा प्रोजेक्ट
जानकारी के मुताबिक, गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे की लागत लगभग 37,465 करोड़ रुपये है. इस प्रोजेक्ट को 2028 तक पूरा कर लेने का लक्ष्य तय किया गया है. इस हाई स्पीड सड़क पर गाड़ियां 120 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से चल सकेंगे, जिससे सफर का समय काफी कम हो जाएगा.
पड़ोसी राज्यों के बीच कनेक्टिविटी आसान
इतना ही नहीं, इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी की दूरी 520 किलोमीटर हो जाएगी. इससे उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर भारत के बीच सड़क संपर्क पहले से ज्यादा तेज और बेहतर होगा. साथ ही रोगजार और उद्योग को बिहार में बढ़ावा भी मिल सकेगा.
