रामचरितमानस पर टिप्पणी कर बुरे फंसे शिक्षा मंत्री, जानें CM नीतीश कुमार से लेकर कुमार विश्वास ने क्या कुछ कहा

Ramcharitmanas Spreads Hatred: रामचरितमानस पर विवादित टिप्पणी के बाद शिक्षा मंत्री के खिलाफ तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है. धर्म का जानकार व कवि कुमार विश्वास ने भी शिक्षा मंत्री के इस बयान को शर्मनाक बताया है. वहीं, शिक्षा मंत्री ने कहा कि वे अपने इस बयान पर कायम हैं.

पटना: बिहार के शिक्षा मंत्री प्रो. चंद्रशेखर ने बीते बुधवार को तुलसीदास की रामचरितमानस पर एक विवादित टिप्पणी की थी. शिक्षा मंत्री के इस बयान के बाद तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. धर्म का जानकार व कवि कुमार विश्वास ने भी शिक्षा मंत्री के इस बयान को शर्मनाक बताया है. वहीं, शिक्षा मंत्री अपने इस बयान पर कायम हैं. प्रो. चंद्रशेखर ने कहा कि वे अपने बयान पर अडिगता के साथ खड़े हैं. उन्होंने कहा कि जिन सज्जनों को भी मेरा बयान गलत लगता है, मैं उनके साथ तर्क करने को तैयार हूं.

दूसरे धर्म के लिए ऐसी टिप्पणी करते तो…- कुमार विश्वास

शिक्षा मंत्री चंद्रेशेखर के विवादित बयान पर कवि कुमार विश्वास ने कहा कि चंद्रशेखर ने उस विश्वविद्यालय में ऐसा विवादित बयान दिया जो ज्ञान का आदि स्त्रोत माना जाता है. कुमार विश्वास ने आगे कहा कि हमारे यहां तक्षशिला और नालंदा पुरानी ज्ञानपीठिकाएं हैं, वहां एक शिक्षा मंत्री ऐसी बातें बोलते हैं वो अशोभनीय है. उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगता है कि प्रो. चंद्रशेखर ने राम कथा पढ़ी नहीं है. मैं सभी धर्म की पुस्तकों का आदर करते हुए कहना चाहता हूं कि क्या वे किसी दूसरे धर्म के बारे में ऐसी बात कह सकते थे. उसके बाद मंत्री तो छोड़िये क्या उनके बचे रहने की संभावना बनी रह सकती थी ?

रामचरितमानस सनातन शास्वत- अश्वनी चौबे

वहीं, पटना पहुंचे केंद्रीय मंत्री अश्वनी चौबे ने कहा कि बिहार के शिक्षा मंत्री ने राम चरित मानस के खिलाफ गंदी टिप्पणी की है. वह कहीं से भी उचित नहीं है. उन्होंने ऐसा करके सनातन धर्म का अपमान किया है. वह कुछ भी कहें लेकिन इतना साफ है कि वो अज्ञानी हैं. केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि रामचरितमानस सिर्फ हिंदुत्व से नहीं जुड़ा हुआ है. बल्कि सनातन धर्म से जुड़ा हुआ है और यह सनातन शास्वत है. ऐसे अज्ञानी लोगों को शिक्षा मंत्री के पद पर रहने का अधिकार नहीं है. इन्हें तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए.

ऐसे मंत्री को हटाने की जरूरत नहीं, जनता खुद हटा देगी- चिराग पासवान

प्रो. चंद्रशेखर के बयान पर जमुई सासंद सह लोजपा (र) के प्रमुख चिराग पासवान ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. चिराग पासवान ने कहा कि इस तरह के बयान से मानसिक ओछेपन के बारे में पता चलता है. चिराग ने आगे कहा कि किसी भी धर्म के खिलाफ गैर जरूरी टिप्पणी करने वाले मंत्रियों को हटाने की कोई जरूरत नहीं है. जनता इन्हे खुद हटा देगी.

पवित्र रामचरितमानस पर टिप्पणी कहीं से भी जायज नहीं- कांग्रेस

शिक्षा मंत्री के बयान पर कांग्रेस नेता अजीत शर्मा की प्रतिक्रिया भी सामने आयी है. अजीत शर्मा ने कहा कि पवित्र रामचरितमानस पर की गई यह टिप्पणी कहीं से भी जायज नहीं है. शिक्षा मंत्री को इस बयान को वापस लेना चाहिए. कांग्रेस नेता के अलावे प्रो. चंद्रशेखर पर बीजेपी के वरीय नेता सुशील कुमार मोदी, पूर्व कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद, विश्व हिंदू परिषद के महासचिव मिलिंद परांडे और अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि महाराज ने निंदनीय बताया है. सभी ने एक स्वर में शिक्षा मंत्री को पद से हटाने की मांग की है.

कुछ दिन पूर्व जगदानंद सिंह ने भी दिया था बयान

बता दें कि शिक्षा मंत्री से पूर्व बीते कुछ दिन पहले राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने राम जन्मभूमि को ‘नफरत की जमीन’ बताया था. राजद नेता के इस बयान के बाद भी जमकर राजनीति हुई थी. बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने ट्वीट कर कहा कि बिहार के शिक्षा मंत्री ने कहा ‘रामचरितमानस’ नफरत फैलाने वाला ग्रंथ है. कुछ दिन पहले जगदानंद सिंह ने राम जन्मभूमि को ‘नफरत की जमीन’ बताया था. यह संयोग नहीं है. यह वोट बैंक का उद्योग है ‘हिंदू आस्था पर करो चोट, ताकि मिले वोट’, सिमी और पीएफआई की पैरवी, हिंदू आस्था पर चोट.’ क्या कार्रवाई होगी ?

आरजेडी ने बयान को बताया निजी

रामचरित मानस पर चंद्रशेखर के दिए विवादित बयान पर बवाल होने के बाद राष्ट्रीय जनता दल ने खुद को शिक्षा मंत्री के इस बयान से अलग कर लिया. राजद ने मंत्री के इस बयान को निजी करार दिया है. वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिक्षा मंत्री के इस बयान के बारे में जानकारी नहीं होने की बात कही है.

शिक्षा मंत्री ने क्या बयान दिया था

बता दें कि नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के 15वें दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए बीते बुधवार 11 जनवरी को राजद कोटे से मंत्री प्रो. चंद्रशेखऱ ने कहा था कि ‘रामचरितमानस और मनुस्मृति समाज को विभाजित करने वाली पुस्तकें हैं. रामचरितमानस का विरोध क्यों किया गया और किस हिस्से का विरोध किया गया? निचली जाति के लोगों को शिक्षा प्राप्त करने की अनुमति नहीं थी और रामचरितमानस में कहा गया है कि निम्न जाति के लोग शिक्षा प्राप्त करने से वैसे ही जहरीले हो जाते हैं जैसे दूध पीने के बाद सांप हो जाता है. मनुस्मृति, रामचरितमानस, गुरु गोलवलकर की बंच ऑफ थॉट्स … ये किताबें ऐसी किताबें हैं जो नफरत फैलाती हैं.

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Published by: Saurav kumar

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