ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ गया बिहार, ट्रेनों की रफ्तार बढ़ने के साथ-साथ जानें अन्य फायदे…

ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से अब बिहार जुड़ गया है. पीएम नरेंद्र मोदी ने डीडीयू से सोन नगर तक इस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर का उद्घाटन किया. अब गाड़ियों की औसत रफ्तार भी बढ़ेगी और व्यापार में भी काफी फायदे होंगे. 1875 किमी कॉरिडोर में बिहार के 11 स्टेशन हैं. जानिए इनके फायदे..

इस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना (इडीएफसी) से अब बिहार भी जुड़ गया है और इस रूट पर आवाजाही भी शुरू हो गयी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को इस कॉरिडोर (eastern dedicated freight corridor ) के न्यू दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन (डीडीयू) से बिहार के सोननगर तक बने 137 किमी लंबे नये रूट का उद्घाटन किया. इस पर 5705 करोड़ की लागत आयी है. यह सेक्शन मौजूदा पटना से हावड़ा व दिल्ली मुख्य लाइन से भी भीड़-भाड़ कम कर देगा और पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत चलने वाली ट्रेनों की रफ्तार को और गति देगा.

पीएम द्वारा गोरखपुर से ऑनलाइन हरी झंडी दिखाते ही पहले दिन डीडीयू से सोननगर तक माल लदी गुड्स ट्रेन ट्रैक पर दौड़ी. जिस ट्रेन को रवाना किया वह 70 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से सोननगर तक पहुंची.

1875 किमी कॉरिडोर में बिहार के 11 स्टेशन

1875 किमी लंबी इस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना पंजाब के साहनेवाल (लुधियाना) से शुरू होकर पश्चिम बंगाल के दनकुनी स्टेशन तक जायेगी. फिलहाल लुधियाना से सोननगर तक 1150 किमी तक कॉरिडोर बन चुका है. इस डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के इस्टर्न रीजन में बिहार के भभुआ, रोहतास, औरंगाबाद व गया जिले से होकर मालगाड़ियां गुजरेंगी. रोहतास तक विस्तार हो चुका है. इस कॉरिडोर के बिहार के 239 किमी के क्षेत्र के लिए 11 स्टेशन बनने हैं. इनमें दुर्गावती स्टेशन, कुदरा, सासाराम, करवंदिया, सोननगर, न्यू सोननगर लिंक, न्यू चीरालपातू स्टेशन बन गये हैं. रफीगंज, कस्था व पहाड़पुर स्टेशन बनाने का काम जारी है.

लेटलतीफी से मुक्ति, बढ़ेगा काराेबार

पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर, धनबाद सहित पांचों ऐसे मंडल हैं, जिनमें क्षमता से ज्यादा गाड़ियां चलायी जा रही हैं. पटना-हावड़ा रूट काफी व्यस्त है. इस कारण कम महत्व वाली गाड़ियां सात घंटे तक लेट हो जाती हैं. यात्री ट्रेन के साथ-साथ मालगाड़ियां और भी अधिक लेट हो जाती हैं. अब इससे छुटकारा मिलेगा.

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कॉरिडोर के बनने से क्या होगा फायदा..

जानकारों के मुताबिक बिहार में इस कॉरिडोर के बनने से व्यापारिक गतिविधियों को नयी गति मिलने की उम्मीद है. अलग रूट होने से सामानों की आवाजाही में समय कम लगेगा. माल की ढुलाई के लिए अलग कॉरिडोर होने से सामानों को प्रदेश और देश के कोने-कोने में पहुंचाने में और सक्षम हो जायेंगे. कम समय में अधिक-से -अधिक सामान पहुंचने की उम्मीद है. इससे इनकी डिलीवरी में भी सरलता होगी.

बढ़ जायेगी गाड़ियों की औसत रफ्तार

वर्तमान में इस कॉरिडोर के लिए सबसे अधिक कोयले की बुकिंग हुई है. झारखंड से बिहार, होते हुए कोयला यूपी, बंगाल, दिल्ली और पंजाब तक जायेगा. अब तक एक ही रेलवे ट्रैक पर यात्री ट्रेनें और मालगाड़ियां चलती थीं. परियोजना का विस्तार होने से इस्टर्न रीजन में 1875 किमी तक बिना यात्री ट्रेनों के व्यवधान के मालगाड़ियां अपनी पटरियों पर दौड़ सकेंगी. मालगाड़ियों की रफ्तार अधिकतम 100 और औसत गति 65 से 70 किमी प्रति घंटे तक होगी. अब तक अधिकतम रफ्तार 75 किमी और औसत गति 25 किमी प्रति घंटे ही रहती है. यात्री ट्रेनों को पास देने के लिए मालगाड़ी को लूप लाइन में खड़ा नहीं होना पड़ेगा.

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