Darbhanga News : दरभंगा.
लहेरियासराय थाना क्षेत्र में पोस्ट ऑफिस के निकट हाइ कोर्ट के आदेश पर 30 वर्षों के बाद नगर निगम की चार दुकानों को रविवार को बुल्डोजर से तोड़ दिया गया. इस मामले को लेकर तीन पीढ़ी केस लड़ती रही. दुकान तोड़ने का दुकानदारों ने विरोध जताया. कार्रवाई को रोकने की कोशिश की. हालांकि पुलिस ने सभीको खदेड़ दिया. पुलिस को हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा. करीब छह घंटे तक चली कार्रवाई के बाद दुकान को तोड़ कर रास्ता साफ कर दिया गया. विदित हो कि वर्ष 1976 में नगर निगम के द्वारा दुकान बनाये जा ने के क्रम में उस समय रामनाथ चौधरी द्वारा रास्ता को लेकर वाद दायर किया गया था. उनकी मौत के बाद उनके पुत्र रवींद्र नारायण चौधरी भी केस लड़ते रहे. वहीं उनके निधन के बाद उनका पोता केशव कुमार चौधरी को दखल-दिहानी मिली है. अधिवक्ता केशव कुमार चौधरी ने बताया कि 1996 में हाइ कोर्ट द्वारा दुकान तोड़कर हटाने का आदेश दिया गया था, लेकिन नगर निगम नहीं जाता पाया गया. हाइ कोर्ट के आदेश के बाद रविवार को नगर निगम की दुकान नंबर 29, 30, 31 व 32 को तोड़ा गया.दुकान बंद रख धरना पर बैठे दुकानदार
इधर, इसके विरोध में सुबह से ही लहेरियासराय टावर से लेकर चट्टी चौक तक दुकानें बंद रही. सभी धरना पर बैठे थे. इन लोगों का कहना था कि पहले इन दुकानदारों को दुकान आवंटित किया जाय, उसके बाद तोड़ने देंगे. वहीं अपर नगर आयुक्त, दरभंगा न्यायालय के नाजिर, पुलिस पदाधिकारी कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे. उन लोगों ने बताया कि न्यायालय का आदेश है. ऐसी स्थिति में आज ही दुकान तोड़कर पूरी तरह सफाई कर संबंधित को हवाले करना है. नगर निगम के दो बुल्डोजर से पूरी तरह दुकान को तोड़कर हटा दिया गया. विरोध कर रहे लोगों पर पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा. सभीको वहां से भगा दिया गया और रास्ता डायवर्ट कर दिया गया.
महासंघ ने कार्रवाई की निंदा
इधर नगर निगम व्यवसायी महासंघ के अध्यक्ष सह भाजपा नेता अशोक नायक ने पुलिस द्वारा दुकानदारों पर बर्बरतापूर्वक लाठी चार्ज का आरोप लगाते हुए इसकी निंदा की. कहा कि बीके रोड व लहेरियासराय टावर चौक के सभी दुकानें बंद कर शांतिपूर्ण अपनी मांग को लेकर हजारों दुकानदार धरना पर बैठे थे. उप नगर आयुक्त ने पुलिस को निर्देश दिया कि सबको लाठी से मारकर यहां से भगा. इस पर पुलिस ने दुकानदारों पर लाठी चार्ज कर दिया. इसमें दर्जनों दुकानदार जख्मी हो गये. जख्मियों अशोक नायक के अलावा गिरिजानंद मिश्रा, गौतम कुमार, एजाज अहमद, पप्पू राय, आनन्द कुमार मिश्र सहित अन्य दुकानदार शामिल हैं. इनलोगों का इलाज डीएमसीएच में किया गया. दुकान संख्या 32 के 70 वर्षीय दुकानदार चिरंजीव चौधरी की स्थिति गंभीर बताई जा रही है. नायक ने कहा कि उच्च न्यायालय का आदेश है कि नगर निगम बाजार भवन के दुकानदार को पहले नयी दुकान बनाकर पुनर्वास करना है, तब दुकान खाली या तोड़ी जायेगी.
बताया जाता है कि रवींद्र कुमार चौधरी द्वारा रास्ता देने संबंधित साल 1978 में हाइ कोर्ट में याचिका दायर की गयी थी. इसका जजमेंट वर्ष 1996 में आया. उसमें 42 फीट रास्ता के बीच आ रही निगम की चार दुकानों को तोड़ने का आदेश नगर निगम को दिया गया था, लेकिन याचिकाकर्ता को बगल से आने-जाने का रास्ता रहने के कारण निश्चिंत था. वहीं निगम भी आदेश पर अमल करने के बदले सोया रहा. आरओबी निर्माण के मद्देनजर दुकान निर्माण शुरू होते ही रास्ता अवरुद्ध होते देख याचिकाकर्ता ने हाइ कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए एडीजे 12 से न्याय की गुहार लगायी. हालांकि बीच का रास्ता निकालने के लिए याचिकाकर्ता व नगर निगम व्यवसायी ट्रस्ट संघ के बीच मध्यस्था करने का प्रयास किया गया था. महज चार फुट रास्ता के लिए जमीन छोड़ने की बात पर याचिकाकर्ता ने कोर्ट का शरण ले ली.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
