Darbhanga News: जिले में छात्र-शिक्षक अनुपात के आधार पर शिक्षकों की आवश्यकता का आकलन युद्धस्तर पर किया जा रहा है. इसके लिए सभी विद्यालयों से छात्र संख्या और शिक्षकों से संबंधित आंकड़े मांगे गए हैं. इन आंकड़ों के आधार पर शिक्षा विभाग शिक्षकों का रेशनलाइजेशन करेगा. नए मानक लागू होने पर विशेष रूप से शहरी क्षेत्र के कई विद्यालयों से बड़ी संख्या में शिक्षकों का समायोजन होने की संभावना जताई जा रही है.
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार शहर के कई प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में छात्र संख्या की तुलना में शिक्षकों की संख्या काफी अधिक है. ऐसे में वहां कार्यरत शिक्षकों को अन्य विद्यालयों में भेजा जा सकता है.
शहर के स्कूलों में बढ़ी चिंता
विभागीय सूत्रों के अनुसार शहर के कई प्राथमिक विद्यालयों में 60 से 100 के बीच छात्र नामांकित हैं, जबकि वहां एक दर्जन तक शिक्षक पदस्थापित हैं. दूसरी ओर कुछ मध्य विद्यालयों में करीब ढाई सौ छात्रों पर दो-दो दर्जन शिक्षक कार्यरत हैं.
इसी कारण छात्र अनुपात के अनुसार समायोजन की प्रक्रिया शुरू होने से शिक्षकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है. कई विद्यालयों में इस बात की चर्चा है कि समायोजन की स्थिति में वरिष्ठ शिक्षकों का स्थानांतरण होगा या कनिष्ठ शिक्षकों का.
प्राथमिक विद्यालयों के लिए नया मानक
प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई)-2009 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के अनुरूप नया शिक्षक निर्धारण मानक जारी किया है.
कक्षा 1 से 5 के लिए निर्धारित मानक इस प्रकार है:
- 60 तक छात्र : 2 शिक्षक
- 61 से 90 छात्र : 3 शिक्षक
- 91 से 120 छात्र : 4 शिक्षक
- 121 से 150 छात्र : 5 शिक्षक
- 150 से अधिक छात्र होने पर 5 शिक्षकों के अतिरिक्त एक प्रधान शिक्षक तथा अधिकतम छात्र-शिक्षक अनुपात 30:1 रखा जाएगा.
मध्य विद्यालयों में विषयवार होगी नियुक्ति
कक्षा 6 से 8 के लिए प्रत्येक कक्षा में कम से कम एक शिक्षक रहेगा. इसके अलावा विज्ञान एवं गणित, सामाजिक अध्ययन तथा भाषा (सामान्यतः हिंदी) के लिए अलग-अलग शिक्षक अनिवार्य होंगे.
विभाग के नए मानक के अनुसार:
- 105 से 140 छात्रों पर एक अंग्रेजी शिक्षक मिलेगा.
- 140 से 175 छात्रों पर एक संस्कृत या उर्दू शिक्षक मिलेगा.
- 175 से अधिक छात्र होने पर आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त शिक्षकों की तैनाती होगी.
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिक्षक निर्धारण के लिए कक्षा 1 से 5 और 6 से 8 को अलग-अलग शैक्षणिक इकाई माना जाएगा, जबकि प्रशासनिक स्तर पर विद्यालय में एक ही प्रधानाध्यापक रहेगा.
अंग्रेजी और संस्कृत शिक्षक के लिए भी तय हुआ मानक
नए प्रावधान के अनुसार यदि किसी मध्य विद्यालय में कक्षा 6 से 8 तक कुल छात्र संख्या 105 से कम होगी तो वहां अंग्रेजी विषय का अलग शिक्षक नहीं मिलेगा. इसी प्रकार 140 से कम छात्र होने पर संस्कृत या उर्दू विषय के शिक्षक की व्यवस्था भी नहीं होगी.
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि छात्र संख्या के आधार पर विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की उपलब्धता तय होने से कुछ विद्यालयों के विद्यार्थियों को अंग्रेजी, संस्कृत या उर्दू के अलग शिक्षक नहीं मिल पाएंगे.
