Darbhanga News: कमतौल. सावन का महीना बीतने को है, लेकिन बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. इलाके के कई खेतों में नमी नहीं रहने के कारण चौड़ी-चौड़ी दरारें पड़ गई हैं. धान के पौधे पानी के अभाव में मुरझाने लगे हैं. सूखे खेतों को देखकर किसानों के चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही है.
बारिश के इंतजार में फट गई खेतों की धरती
किसानों के अनुसार धान की रोपनी के बाद पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में पानी नहीं टिक सका. लगातार सूखे के कारण मिट्टी जगह-जगह फट गई है. धान के पौधे भी पानी के अभाव में झुलसने लगे हैं. किसानों को अब अच्छी बारिश का बेसब्री से इंतजार है.
डीजल महंगा, भूजल नीचे जाने से बोरिंग भी मुश्किल
किसानों का कहना है कि बारिश की कमी के बीच खेतों की सिंचाई के लिए बोरिंग का सहारा लेना भी आसान नहीं है. डीजल की बढ़ती कीमत और भूमिगत जलस्तर नीचे चले जाने के कारण सिंचाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है. छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है.
धरती फटने के साथ किसानों का कलेजा भी फटा
बेलबाड़ा के किसान इंद्र कुमार यादव, आयुष कुमार, धीरज राय, अनिल राय, हरिवंश दास, अशर्फी चौपाल, चुनचुन राय, नरेंद्र कुमार सिंह, जीवछ साहनी और ममता देवी ने अपनी चिंता जताई.
किसानों ने कहा कि खेत की धरती फटने के साथ उनका कलेजा भी फट रहा है. यदि अब भी बारिश नहीं हुई तो धान की फसल पूरी तरह चौपट हो सकती है. फसल बर्बाद होने की स्थिति में परिवार का भरण-पोषण और बच्चों की पढ़ाई तक प्रभावित होने की चिंता किसानों को सता रही है.
बारिश नहीं हुई तो बढ़ेगी किसानों की मुश्किल
किसानों का कहना है कि धान की फसल के लिए इस समय पर्याप्त पानी की जरूरत है. समय पर बारिश नहीं होने और महंगी सिंचाई के कारण फसल बचाना चुनौती बन गया है. किसानों ने उम्मीद जताई कि जल्द बारिश होगी और सूख रहे खेतों को राहत मिलेगी.
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