दरभंगा: मिथिला की धरती ने अपना एक चमकता सितारा खो दिया. जाले प्रखंड के रतनपुर अभिमान गांव निवासी गांव के पहले इंजीनियर, तकनीक और प्रबंधन क्षेत्र से जुड़े पेशेवर तथा समाजसेवी इ. राम मोहन लाल मल्लिक का 84 वर्ष की उम्र में अमेरिका के ह्यूस्टन में निधन हो गया. उन्होंने पांच सितंबर की दोपहर करीब साढ़े तीन बजे स्थानीय समय और भारतीय समयानुसार छह सितंबर की रात करीब डेढ़ बजे अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर से रतनपुर अभिमान सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है.
अभावों के बीच पढ़ाई कर बने गांव के पहले इंजीनियर
इ. राम मोहन लाल मल्लिक का जन्म दो जनवरी 1942 को प्रतिष्ठित मल्लिक कायस्थ परिवार में नागेश्वर लाल मल्लिक के घर हुआ था. सात भाइयों में सबसे बड़े राम मोहन मल्लिक ने अभावों के बीच शिक्षा हासिल की. उन्होंने ठाकुर विंदेश्वर शर्मा हाइ स्कूल, ब्रह्मपुर से पढ़ाई की और 1958 की मैट्रिक परीक्षा में जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया.
वर्ष 1963 में मद्रास विश्वविद्यालय से केमिकल एवं माइनिंग इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल कर वे अपने गांव के पहले इंजीनियर बने. इसके बाद उन्होंने भारत के साथ मध्य-पूर्व और अमेरिका में अपने पेशेवर जीवन का विस्तार किया.
ह्यूस्टन में महत्वपूर्ण पद पर रहे
राम मोहन मल्लिक ने अमेरिका के ह्यूस्टन में फ्लोर कॉर्पोरेशन में डायरेक्टर, प्रोसेस टेक्नोलॉजी, जैसे महत्वपूर्ण पद पर काम किया. उपलब्ध प्रकाशित सामग्री में भी उनके तकनीक और प्रबंधन क्षेत्र के अनुभव तथा भारत, मध्य-पूर्व और अमेरिका में काम करने का उल्लेख मिलता है.
उनका जीवन केवल इंजीनियरिंग और कॉरपोरेट क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा. भारतीय समुदाय के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभायी.
BANA के अध्यक्ष रहे, बोर्ड में भी निभायी जिम्मेदारी
राम मोहन मल्लिक वर्ष 2003-04 में बिहार एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (BANA) के अध्यक्ष रहे. BANA की आधिकारिक वेबसाइट की सूची में उनका नाम 2003-04 के अध्यक्ष के रूप में दर्ज है.
बाद के वर्षों में भी वे संगठन से जुड़े रहे. BANA की प्रकाशित सामग्री में उन्हें वरिष्ठ सदस्य और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सदस्य के रूप में उल्लेखित किया गया है. BANA की सदस्य सूची में भी राम मोहन मल्लिक और उनकी पत्नी सरस्वती के नाम दर्ज हैं.
भारतीयों और समाज के प्रति रही प्रतिबद्धता
परिजनों के अनुसार, 1990 के इराक-कुवैत युद्ध के दौरान कुवैत में फंसे हजारों भारतीयों की सुरक्षित वतन वापसी में भी राम मोहन मल्लिक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी. उनके जीवन का यह पक्ष विदेश में रहते हुए भी भारतीय समुदाय से उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है.
उनकी पहचान केवल एक इंजीनियर या प्रबंधन विशेषज्ञ के रूप में नहीं थी. वे सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे और भारतीय समुदाय के बीच अपनी अलग पहचान बनायी.
रामचरितमानस और धार्मिक साहित्य में गहरी रुचि
राम मोहन मल्लिक की आध्यात्मिक और साहित्यिक रुचि भी उल्लेखनीय रही. उपलब्ध प्रकाशित सामग्री के अनुसार वे लंबे समय से श्रीरामचरितमानस के अध्येता थे और भारतीय धर्म तथा रामायण से जुड़े विषयों पर लेख लिखते थे.
उन्होंने राम-विभीषण संवाद और रामराज्य-गांधी जी के भारत की परिकल्पना जैसे लेख लिखे. भगवान हनुमान पर उनके लेख Glory of Lord Hanuman में भी रामायण और भारतीय धार्मिक परंपरा से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की गयी है.
इस तरह तकनीक और प्रबंधन के पेशेवर जीवन के साथ धार्मिक अध्ययन और लेखन भी उनके व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा.
परिवार में पत्नी और तीन बच्चे
वे पत्नी सरस्वती देवी, पुत्र अरविंद मल्लिक तथा पुत्रियों में हेमा मल्लिक और अलका मल्लिक को पीछे छोड़ गये हैं. अमेरिका में भारतीय समुदाय की मौजूदगी में बुधवार को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.
रतनपुर अभिमान और आसपास के क्षेत्र के लोगों के लिए उनका निधन केवल एक व्यक्ति की क्षति नहीं, बल्कि उस पीढ़ी के एक ऐसे प्रेरक व्यक्तित्व का जाना है जिसने गांव की मिट्टी से निकलकर इंजीनियरिंग, अंतरराष्ट्रीय पेशेवर जीवन, सामाजिक सेवा और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा के बीच अपनी पहचान बनायी.
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