दरभंगा उर्वरक निगरानी समिति: केवटी में किसानों को समय पर और निर्धारित दर पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए आयोजित उर्वरक निगरानी समिति की बैठक महज ऐप डाउनलोड के डेमो तक सिमट कर रह गयी. बैठक में प्रखंड में खाद की उपलब्धता, यूरिया की निर्धारित कीमत और किसानों को उर्वरक मिलने में हो रही परेशानी जैसे अहम मुद्दों पर अपेक्षित चर्चा नहीं हो सकी. प्रचार-प्रसार के अभाव में बैठक में महज आधा दर्जन किसान ही पहुंचे.
ऑनलाइन उर्वरक आवेदन की पूरी प्रक्रिया
बैठक में कृषि पदाधिकारी ईशानी मिश्रा ने किसानों और खुदरा उर्वरक विक्रेताओं को ऑनलाइन उर्वरक आवेदन की प्रक्रिया समझायी. उन्होंने बताया कि किसान प्ले स्टोर से फार्मर वर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल ऐप डाउनलोड कर जरूरी जानकारी दर्ज कर सकते हैं. इसके बाद मोबाइल पर ओटीपी प्राप्त होगा. ओटीपी देने के बाद ही दुकानदार किसान को उर्वरक उपलब्ध करा सकेगा. कृषि पदाधिकारी ने उपस्थित लोगों के सामने ऐप डाउनलोड करने की प्रक्रिया का डेमो भी किया.
बिना फार्मर आइडी के भी कर सकते हैं आवेदन
कृषि पदाधिकारी ने बताया कि बिना फार्मर आइडी के भी किसान उर्वरक के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए जमीन का खेसरा या सर्वे नंबर जरूरी होगा. हालांकि, बैठक में मौजूद दुकानदारों ने कहा कि ऑनलाइन प्रक्रिया की जानकारी उन्हें पहले से है. असली जरूरत किसानों को इसकी जानकारी देने और आवेदन के दौरान तकनीकी मदद उपलब्ध कराने की है.
किसानों के पास मोबाइल नहीं, आइडी की भी समस्या
खुदरा उर्वरक विक्रेताओं ने बताया कि कई किसानों के पास एंड्रॉयड मोबाइल फोन नहीं है. कुछ किसानों के पास फार्मर आइडी भी उपलब्ध नहीं है. ऐसे में ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था लागू होने के बाद उन्हें खाद लेने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. दुकानदारों ने कहा कि केवल ऐप की जानकारी देने के बजाय किसानों के बीच जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है.
थोक विक्रेताओं पर अधिक कीमत लेने का आरोप
बैठक में खुदरा उर्वरक दुकानदारों ने थोक विक्रेताओं पर निर्धारित दर से अधिक कीमत पर उर्वरक उपलब्ध कराने का आरोप लगाया. दुकानदारों का कहना था कि जब उन्हें ही अधिक कीमत पर खाद मिलती है, तो निर्धारित दर पर किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराने में परेशानी होती है.
खुदरा विक्रेताओं की ओर से उठाये गये इस मुद्दे पर बैठक में कोई स्पष्ट समाधान सामने नहीं आया. वहीं, किसानों की संख्या कम रहने के कारण खाद की उपलब्धता और वितरण से जुड़ी जमीनी समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा नहीं हो सकी.
इस संबंध में कृषि पदाधिकारी ईशानी मिश्रा का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका.
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