Darbhanga : इसी स्कूल में रहिए, नहीं जाइए सर…

कहते हैं कि माता-पिता के बाद बच्चे सबसे ज्यादा गुरु के निकट होते हैं. स्वाभाविक रूप से आत्मीय स्नेह देने वाले गुरु का विछोह सहन नहीं कर पाते.

कुशेश्वरस्थान. कहते हैं कि माता-पिता के बाद बच्चे सबसे ज्यादा गुरु के निकट होते हैं. स्वाभाविक रूप से आत्मीय स्नेह देने वाले गुरु का विछोह सहन नहीं कर पाते. इसका प्रमाण शुक्रवार को मध्य विद्यालय महरी में मिला. अवसर था स्कूल के शिक्षक मो. सद्दाम हुसैन के स्थानांतरण पर विदाई का. प्रधानाध्यापक मो. शकील अहमद की अध्यक्षता में आयेाजित विदाई समारोह में विद्यालय परिवार ने शिक्षक हुसैन को नम आंखों से भावभीनी विदाई दी. इधर विदाई का कार्यक्रम चल रहा था और उधर बच्चों की सिसकारियों ने धीरे-धीरे करूण क्रंदन का रूप ले लिया. समारोह के दौरान शिक्षक को एक ब्रिफकेस में अंग वस्त्र के साथ पाग, चादर, माला आदि प्रदान किया गया. बारी-बारी से शिक्षकों ने उन्हें सम्मानित किया. पूर्ववर्ती छात्र पवन कुमार ने भी अभिनंदन करते हुए यादगार स्वरूप घड़ी भेंट की. इस दौरान प्रधानाध्यापक अहमद ने सद्दाम हुसैन के स्कूल के प्रति समर्पण, कर्त्तव्यनिष्ठा तथा सहृयता की सराहना की. उज्जवल भविष्य की कामना की. इस दौरान प्रमोद कुमार सिंह, श्रीकांत मुखिया, राकेश कुमार साफी आदि ने भी कार्यकाल को सराहा. विदाई समारोह से जैसे ही शिक्षक सद्दाम हुसैन निकलकर बच्चों के बीच पहुंचे, बच्चे उनसे लिपटकर रोने लगे. पहली कक्षा से लेकर सातवीं कक्षा तक के छात्र-छात्राएं फूट-फूटकर रोये. लाख दिलासा देने के बावजूद मानने को तैयार नहीं हो रहे थे. सभीका यही कहना था आप इसी स्कूल में रहिए, यहां से नहीं जाइए सर. काफी देर तक स्कूल का माहौल गमगीन बना रहा. बता दें कि सद्दाम हुसैन का स्थानांतरण उनके गृह जिला मधुबनी हुआ है. समारेाह में प्राथमिक विद्यालय महरी उत्तरी टोल के एचएम मनोज कुमार, प्रावि लरांच घाट के एचएम ललित कामति के अलावा स्कूल के शिक्षक सुमन कुमार सिंह, नारायण झा, रमाकांत ठाकुर, पुरुषोत्तम कुमार ठाकुर, आशीष कुमार झा, कमलेश कुमार, अब्दुल कुद्दूस महमूदी, ज्योति कुमारी, आकृति सुमन, सारिका कुमारी आदि मौजूद थे.

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Published by: Ranjeet thakur

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