Darbhanga News: जाले कृषि विज्ञान केन्द्र में आयोजित तीन दिवसीय कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हो गया है. इस विशेष प्रशिक्षण शिविर में सिंहवाड़ा प्रखंड की मनकौली पंचायत से जुड़ी “शक्ति संकुल स्तरीय संघ” की कुल 55 किसान दीदियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया. यह पूरा कार्यक्रम महिला किसान सशक्तिकरण के तहत समेकित कृषि संघ परियोजना के अंतर्गत आयोजित किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है.
डॉ दिव्यांशु शेखर के मार्गदर्शन में हुआ संचालन, कम लागत में अधिक मुनाफे पर जोर
यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम कृषि विज्ञान केन्द्र के वरीय वैज्ञानिक सह अध्यक्ष डॉ. दिव्यांशु शेखर के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ. प्रशिक्षण की प्रशासनिक व्यवस्था बीपीआईयू अमित कुमार चौधरी ने की, जबकि कार्यक्रम के समन्वयक प्रशांत कुमार रहे. इस तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य महिला किसानों को पारंपरिक ढर्रे से अलग आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती की तकनीकों से अवगत कराना था, ताकि वे कम लागत में अधिक उत्पादन कर अपनी आय बढ़ा सकें.
वैज्ञानिकों ने दी प्राकृतिक खेती, मशरूम और ड्रैगन फ्रूट की जानकारी
शिविर के दौरान उद्यान वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार विश्वकर्मा समेत अन्य विशेषज्ञों ने किसान दीदियों को प्राकृतिक खेती, समेकित कृषि प्रणाली, पॉलीहाउस व ग्रीन हाउस तकनीक, मल्चिंग, फ्रूट फ्लाई ट्रैप, मशरूम उत्पादन एवं मुनाफेदार ड्रैगन फ्रूट की खेती के बारे में विस्तार से व्यावहारिक जानकारी दी. इसके साथ ही सभी प्रतिभागी महिलाओं को कृषि विज्ञान केन्द्र के विभिन्न प्रक्षेत्रों (प्रायोगिक खेतों) का भ्रमण कराकर लाइव डेमो भी दिखाया गया.
सूक्ष्म सिंचाई और मूल्य संवर्धन की मिली ट्रेनिंग, किसान दीदियां उत्साहित
प्रशिक्षण के तकनीकी सत्रों में अभियांत्रिकी वैज्ञानिक इंजी. निधि कुमारी ने पानी की बचत करने वाली सूक्ष्म सिंचाई तकनीक की उपयोगिता बताई. वहीं गृह वैज्ञानिक डॉ. पूजा कुमारी ने फलों व सब्जियों के मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) तथा प्रक्षेत्र प्रबंधक डॉ. चन्दन कुमार ने जैविक एवं टिकाऊ खेती के महत्व पर प्रकाश डाला. मृदा विशेषज्ञ शशिमाला कुमारी ने मिट्टी एवं पत्ती जांच के लाभ बताए. प्रशिक्षण में शामिल सभी किसान दीदियों ने इस सत्र को बेहद उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताया.
