Darbhanga News: बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बीच शराब तस्करों द्वारा पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए अपनाई गई एक अति-होशियारी उन्हीं पर भारी पड़ गई. दरभंगा जिले के बिरौल थाना क्षेत्र में पुलिसिया चेकिंग से बचने के लिए चौर (सुनसान दलदली मैदान) के बेहद दुर्गम कच्चे रास्ते से गुजर रहा शराब तस्करों का एक विशालकाय 16 चक्का ट्रक और एक पिकअप वैन कीचड़ में बुरी तरह फंस गया. नतीजा यह हुआ कि तस्कर तो अंधेरे का लाभ उठाकर भाग निकले.
रात 2 बजे पुलिस ने की घेराबंदी
यह पूरी फिल्मी घटना बीती रात बिरौल थाना क्षेत्र के इटवा शिवनगर चौर इलाके की है. बिरौल के थानाध्यक्ष चंद्रमणि को एक पुख्ता गुप्त सूचना मिली थी कि शराब माफिया मुख्य सड़कों पर जारी कड़े पुलिस पहरे से बचने के लिए सुनसान और कच्चे चौर के रास्ते विदेशी शराब की एक बहुत बड़ी खेप पार कराने की फिराक में हैं. सूचना की गंभीरता को देखते हुए थानाध्यक्ष के नेतृत्व में पुलिस टीम ने रात करीब 02:00 बजे पूरे चौर इलाके की रणनीतिक घेराबंदी (नाकेबंदी) कर दी. पुलिस की गाड़ियों की गड़गड़ाहट और रोशनी देखकर चौर में गाड़ियों को निकालने का प्रयास कर रहे तस्कर और चालक वाहनों को चालू हालत में ही छोड़कर घने अंधेरे का फायदा उठाते हुए भाग खड़े हुए. पुलिस जब मौके पर पहुंची, तो वहां शराब से लदा एक विशाल 16 चक्का ट्रक और एक महिंद्रा पिकअप वैन लावारिस स्थिति में खड़ी मिली.
जेसीबी से 4 घंटे खींचे गए वाहन
तस्करों की योजना बेहद शातिर थी; उन्होंने जानबूझकर एनएच और मुख्य जिला सड़कों को छोड़ दिया था ताकि कहीं भी पुलिस चेकिंग का सामना न करना पड़े. लेकिन हालिया बारिश के कारण चौर की मिट्टी पूरी तरह दलदली और धंसने वाली हो चुकी थी. भारी-भरकम 16 चक्का ट्रक जैसे ही उस कच्चे रास्ते पर आगे बढ़ा, उसके विशाल पहिये कीचड़ में गहरे धंस गए.
तस्करों की इस मुसीबत ने पुलिस का काम आसान कर दिया, हालांकि इन भारी वाहनों को दलदल से बाहर निकालना पुलिस टीम के लिए भी लोहे के चने चबाने जैसा साबित हुआ. पूरी रात की नाकाम कोशिशों के बाद, बुधवार की सुबह विशेष रूप से एक बड़ी जेसीबी (JCB) मशीन को मौके पर मंगाया गया. करीब चार घंटे की भारी मशक्कत और क्रेन की मदद के बाद दोनों वाहनों को कीचड़ से खींचकर बाहर निकाला गया और कड़ी सुरक्षा के बीच बिरौल थाने लाया गया.
25 लाख की हरियाणा निर्मित शराब
बिरौल थाना परिसर में जब्त वाहनों से शराब की खेप को उतारकर उसकी आधिकारिक गिनती और वीडियोग्राफी की जा रही है. शुरुआती प्रशासनिक जांच और गिनती में निम्नलिखित चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं:
- शराब की मात्रा: ट्रकों से अब तक 400 से अधिक कार्टन (पेटी) अवैध विदेशी शराब बरामद की जा चुकी है, जिसमें कुल बोतलों की संख्या लगभग 10 हजार आंकी गई है.
- बाजार मूल्य व निर्माण: बरामद शराब की कुल ब्लैक मार्केट कीमत 25 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है. यह पूरी खेप हरियाणा निर्मित (Made in Haryana) है, जिसे पुलिस को चकमा देने के लिए ट्रक के भीतर सूखे भूसे के बोरों की आड़ में तहखाना बनाकर छिपाया गया था. जब्त किए गए दोनों वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर भी हरियाणा राज्य के ही हैं.
शराब तस्करी सिंडिकेट का खुलासा
मामले का पटाक्षेप करते हुए बिरौल थानाध्यक्ष चंद्रमणि ने बताया कि इस सिंडिकेट के तार अंतर-राज्यीय माफियाओं से जुड़े हैं. तस्कर इस बड़ी खेप को दरभंगा शहर और पड़ोसी जिले के स्थानीय छोटे डीलरों के नेटवर्क में ऊंचे दामों पर खपाने वाले थे. पुलिस ने दोनों गाड़ियों के चेसिस नंबर और हरियाणा के नंबर प्लेट के आधार पर वाहन मालिकों और अज्ञात चालकों के खिलाफ बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत एक कड़ी प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है. फरार तस्करों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है. स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि पिछले एक महीने के भीतर बिरौल पुलिस की यह दूसरी सबसे बड़ी और प्रभावी बरामदगी है, जिसने तस्करों की कमर तोड़ दी है.
दरभंगा के बिरौल से शंकर सहनी की रिपोर्ट
