दरभंगा के बेनीपुर से सुबोध नारायण पाठक की रिपोर्ट
Darbhanga News: समाज कल्याण विभाग की उदासीनता के कारण सरकार की महत्वाकांक्षी “भूख एवं कुपोषण दूर भगाओ” योजना बेनीपुर में दम तोड़ती नजर आ रही है. बाल विकास परियोजना के तहत संचालित 290 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है.
स्थिति यह है कि करीब 8700 बच्चों और 4640 गर्भवती एवं प्रसूता महिलाओं का निवाला ठप पड़ गया है. राशि और चावल के अभाव में जहां बच्चों को मिलने वाला पका भोजन बंद है, वहीं टेक होम राशन का वितरण भी इस माह नहीं हो सका है.
बच्चों और महिलाओं पर सीधा असर
विभागीय सूत्रों के अनुसार बेनीपुर बाल विकास परियोजना अंतर्गत संचालित 290 आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्रतिदिन बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा के साथ पोषाहार देने का प्रावधान है.
इसके अलावा गर्भवती महिलाओं, प्रसूताओं और कुपोषित बच्चों के लिए टेक होम राशन वितरण की भी व्यवस्था है. प्रत्येक केंद्र को पोषाहार मद में प्रतिमाह 4 हजार से 20 हजार रुपये तक आवंटित किए जाते हैं, लेकिन इस माह राशि उपलब्ध नहीं होने के कारण व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है.
पांच माह से नहीं मिला मानदेय
एक ओर जहां बच्चों और महिलाओं को पोषण नहीं मिल पा रहा है, वहीं दूसरी ओर आंगनबाड़ी सेविका और सहायिकाओं का पिछले पांच माह से मानदेय भी लंबित है.
सेविका-सहायिकाओं का कहना है कि वे खुद आर्थिक संकट से जूझ रही हैं. नाम नहीं छापने की शर्त पर कई सेविकाओं ने कहा कि “कुपोषण दूर भगाने के बदले हम लोग खुद कुपोषित होने की स्थिति में पहुंच गए हैं.”
बच्चे भूखे बैठने को मजबूर
केंद्रों पर आने वाले छोटे-छोटे बच्चे भोजन की उम्मीद लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं. कई केंद्रों पर बच्चों को भूखे पेट बैठा देखा गया. इससे अभिभावकों में भी नाराजगी है.
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर योजनाएं चला रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है.
सीडीपीओ ने बताई तकनीकी समस्या
इस संबंध में सीडीपीओ रंजीत कुमार ने बताया कि पोषाहार राशि का भुगतान कोषागार में तकनीकी कारणों से नहीं हो पाया है.
उन्होंने कहा कि मानदेय भुगतान को लेकर स्थानीय कार्यालय की कोई भूमिका नहीं है. कार्यालय की ओर से नियमित रूप से सेविका, सहायिका और पर्यवेक्षिकाओं की उपस्थिति विवरणी निदेशालय भेजी जाती है.
