राष्ट्रीय संप्रभुता के आदर्श पुरुष हैं श्यामा प्रसाद मुखर्जी- सांसद

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जिस प्रकार कश्मीर में भारती हितों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी वह इतिहास के पन्नों में अमिट निशानी छोड़ गयी.

दरभंगा. देश की संप्रभुता को अक्षुण्ण रखने के लिए भारत माता की बलिवेदी पर अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वालों की लंबी सूची है, लेकिन डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जिस प्रकार कश्मीर में भारती हितों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी वह इतिहास के पन्नों में अमिट निशानी छोड़ गयी. सच्चे अर्थों में डॉ मुखर्जी भारतीय संप्रभुता के आदर्श पुरुष हैं, जिनके उपर हर भारतीय को गर्व है. डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर अपने आवासीय कार्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में सांसद गोपाल जी ठाकुर ने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए यह बात कही. सांसद ने कहा कि एक देश एक विधान की जिस अवधारण की उन्होंने परिकल्पना कर आवाज बुलंद की, आज प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी की सरकार में उस कल्पना को हकीकत में बदल रही है. कहा कि डॉ मुखर्जी विश्व में सबसे कम उम्र में कोलकाता यूनिवर्सिटी के कुलपति बनें. तत्कालीन पीएम जवाहर लाल नेहरू से मामूली सी बात पर मतभिन्नता के कारण सरकार से इस्तीफा देकर यह साबित किया कि वे अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं कर सकते. मौके पर लोकसभा सह प्रभारी प्रफुल्ल कुमार ठाकुर, रजनीश झा, अभयानंद झा, मनीष मिश्रा, प्रेम कुमार मिश्रा, जदयू नेता रविंद्र यादव, नटवर झा, भरत यादव, उमेश चौधरी, रामज्ञा चौधरी, सोनू ठाकुर, सुधीर रंजन वर्मा आदि मौजूद थे.

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