हायाघाट पीएचसी का हाल. मरीजों को बेड तक नसीब नहीं
लोगों को डीएमसीएच का ही आसरा
छह माह पूर्व चले गये चार डॉक्टर
पांच महीने से खराब पड़ा है एंबुलेंस
हायाघाट : पीएचसी हायाघाट इन दिनों डॉक्टर एवं दवा की कमी का दंश क्षेल रहा है. इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चौबीस घंटे सुविधा देने वाला यह अस्पताल एक डॉक्टर के सहारे चल रहा है. सनद रहे कि छह डॉक्टर वाले इस अस्पताल में चार पद (एक स्थायी व तीन अनुबंध) रिक्त हैं. एक भी महिला डॉक्टर नहीं है. पुरुषों के लिए कोई बेड की व्यवस्था सराकार की ओर से नहीं है. वहीं महिलाओं के लिए छह बेड हैं, जबकी प्रत्येक दिन 10 से 12 डिलिवरी एवं हफ्ता में 25 से 30 महिलाओं का परिवार नियोजन किया जाता है. बेड की कमी रहने के कारण मरीजों को आपरेशन के बाद फर्श पर सोना पड़ता है.
यह जानकर आश्चर्य होगा कि पिछले छह माह से विभाग के द्वारा अस्पताल में दवा उपलब्ध नहीं कराया गया है. मरीजों को बाहर से दवा लानी पड़ती है. वहीं बच्चों के लिए तो कोई दवा ही अस्पताल के पास नहीं है. 102 एंबुलेंस के बारे में पूछने पर पता चला कि पिछले पांच माह से गैरेज में खराब पड़ा है. इसे देखनेवाला कोई नहीं है. विभाग कुंभकरनी निंद्रा में सोया हुआ है. प्राइवेट एंबुलेंस के सहारे पीएचसी चलता है.
चिकित्सक की किल्लत
संवेदक जगदीश प्रसाद चौधरी ने बताया कि प्रभारी डाॅ एसपी सिंह व डाॅ बीके पंचानंद अभी इस पीएचसी में है. इसमें प्रभारी अच्छे सर्जन होने के नाते हायाघाट, हनुमाननगर, बहादुरपुर, सदर व केवटी में महीने भर से महिलाओं का परिवार नियोजन में व्यस्त रहते हैं. वहीं डॉ कमलेश ठाकुर, डॉ सुनील कुमार, डाॅ श्वेता रानी के करीब छह माह पहले चले जाने के बाद से डॉक्टर की किल्लत हो गयी है.
पांच पीएचसी के परिवार नियोजन का भार प्रभारी के जिम्मे
30 बेड के अस्पताल
की आवश्यकता
पीएचसी में पहले दवा की उपलब्धता रहने पर 200 से 225 मरीजों को आउट डोर में देखा जाता है. वर्तमान में प्रत्येक दिन 100 मरीजों को देखा जाता है. मरीजों को देखते हुए यहां 30 बेड के अस्पताल की आवश्यकता है.
डॉ एसपी सिंह, प्रभारी
पीएचसी एक नजर में
पीएचसी हायाघाट के अन्तर्गत 14 पंचायत व 35 राजस्व ग्राम आते हैं. इस केंद्र के अधीन दो अतिरिक्त उप स्वास्थ्य केंद्र व 10 एचएससी पड़ता है. पीएचसी हायाघाट में छह डॉक्टर के पद पर दो कार्यरत हैं. वहीं चार पद रिक्त हैं. एलएचवी दो के विरूद्ध एक कार्यरत है. एक पद रिक्त है. एएनएम कुल 31 कार्यरत हैं. वहीं फर्ममासिस्ट एवं हेल्थ एजुकेटर के पद खाली है. प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ एस पी सिंह ने बताया कि उक्त स्वास्थ्य केंद्पर र आउट डोर में 75-100 मरीजों को देखा जाता है. वहीं छह वेड वाले इस अस्पताल में 20-25 मरीज भरती हैं. स्वास्थ्य प्रबंधक ने बताया कि उक्त स्वास्थ्य केंद्र पर आउट डोर में 33 प्रकार की एवं इनडोर में 112 प्रकार की दवा में अधिकांश दवा उपलब्ध नहीं रहने के कारण मरीजों को नहीं मिल पाता है.
यहां न तो डॉक्टर है न दवा
रूस्तमपुर निवासी हरेराम सिंह ने बताया कि रात के समय डॉक्टर नहीं रहता है न तो मरीजों को दवा ही मिल पाती है़ केवल प्रसव का काम ही पीएचसी में होता है. पौराम निवासी कमल कान्त झा ने बताया कि दरभंगा व समस्तीपुर की सीमा पर स्थित इस अस्पताल में न तो डॉक्टर है न दवा. लोग मजबूर हो कर यहां अपना इलाज करवाते हैं. रसूलपुर निवासी मो. कैसर ने बताया कि यहां एमडी डॉक्टर व दवा जबतक उपलब्ध नहीं हो जाता है यहां के गरीबों के लिए अस्पताल हाथी के दांत के समान है. विलासपुर निवासी मो. बुधन ने बताया कि मरीजों को फर्श पर लिटा दिया जाता है. समय पर डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहता है. निजी वाहनों से प्रसव के लिए महिलाएं यहां आती हैं.
