कोताही. तीन साल में नहीं बन सकी 10 किमी लंबी सड़क
दरभंगा : जिले की महत्वाकांक्षी योजना में शुमार बाइपास सड़क निर्माण की गति कछुए की चाल को भी मात दे रही है. निविदा हुए सालों बीत गये. निर्माण कार्य पूरा होने की समय सीमा समाप्त हुए भी एक साल से अधिक बीत गया, बावजूद आज तक यह पूरा नहीं हो सका है. वैसे तो यह पूरे जिले के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके तैयार होने से सबसे अधिक लाभ शहरवासियों को मिलेगा. सबसे बड़ी समस्या सड़क जाम से निजात मिल जायेगी. लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण यह आज तक धरातल पर नहीं उतर सका है. वैसे जिला प्रशासने इस ओर तवज्जो दिया है. फलस्वरूप इसके निर्माण की गति में थोड़ी से वृद्धि जरूर नजर आ रही है. जिलाधिकारी डा. चंद्रशेखर सिंह की संजीदगी को देखते हुए उम्मीद है कि चालू वर्ष की सौगात के रूप में यह योजना लोगों को मिल जायेगी, पर यह भविष्य के गर्त में है.
वर्षों से इंतजार: दरभंगा में बाइपास सड़क का इंतजार लोग वर्षों से कर रहे हैं. चर्चा में तो यह करीब आठ साल से है, लेकिन पिछले चार वर्ष से यह योजना के रूप में सामने आयी. लोगों की आस जगी कि यह सड़क जल्द ही सामने होगी. शहर की जाम से जल्द ही निजात मिलेगी, लेकिन यह उम्मीद धरी की धरी रह गयी. योजना स्वीकृत होने के बाद निविदा भी हो गयी, लेकिन धरातल पर काम आरंभ नहीं हो सका. वर्ष 2013 से लोगों के इंतजार का वक्त लंबा होता चला जा रहा है.
9.4 किमी में बननी है सड़क
समस्तीपुर की ओर से आनेवाले वाहनों को बिना शहर में प्रवेश के ही फोरलेन एनएच-57 पर सीधे पहुंचाने के लिए यह योजना बनायी गयी. एकमीघाट चांडी से शोभन को जोड़नेवाली यह सड़क 9.4 किमी बननी है. 5090.980 लाख की लाग से बनने वाली बाइपास सड़क समस्तीपुर-दरभंगा मुख्य पथ के प्रवेश स्थल से पहले है. लिहाजा वाहनों को शहर में प्रवेश की आवश्यकता नहीं होगी.
सुस्ती के कारण अवधि विस्तार
इस योजना का कार्यारंभ दिसंबर 2013 में ही होना था. जानकारी के अनुसार विभाग ने सारी कागजी प्रक्रिया पूरी कर वर्ष 2013 के अंत से ही काम शुरू करने का भार लक्ष्मी सिविल इंजीनियरिंग सर्विसिंग प्रालि कोल्हापुर महारष्ट्र की कंपनी को दे दिया था. इसके तहत दिसंबर 2015 तक इस योजना को पूरा कर लिया जाना था, लेकिन धरातल पर सही से काम आरंभ ही नहीं हो सका. नतीजा स्थिति जस की तस बनी रही. इसे लेकर विभाग ने एक इस योजना की समयावधि में विस्तार कर दिया. अब चालू वर्ष 2017 के मार्च तक इसे पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
बड़े वाहनों को होगा लाभ
इस सड़क के बन जाने से बड़े व्यावसायिक वाहनों को लाभ मिलेगा. कारण सड़क जाम की समस्या को कम करने के लिए प्रशासन ने शहर में नो इंट्री लगा रखा है. लिहाजा बाहर से आनेवाले बड़े वाहन शहर के प्रवेश स्थल पर आकर भी पूरे दिन खड़े रहते हैं. रात का इंतजार करते रहते हैं. जब नो इंट्री समाप्त होने का समय आता है तो एक बार गाड़ियां प्रवेश करती हैं. यह हाल शहर के सभी दिशाओं से आनेवाले वाहनों के साथ होता है.
कारोबारियों को मिलेगी राहत
इससे शहर के बड़े कारोबारियों को काफी राहत मिलेगी. कारण नो इंट्री की वजह से दिन में वे अपना माल नहीं मंगवा पाते. रात में सामान अन लोड करने के लिए मजदूर नहीं मिलते. ऐसे में इस सड़क के तैयार हो जाने से बीच में ही सामान उतरवाकर कारोबारी मंगवा सकेंगे.
जाम की समस्या से पिस रहे शहरवासी
भू-अर्जन कार्यालय
से व्यवधान
इस सड़क के निर्माण में भू-अर्जन कार्यालय की सुस्ती व्यवधान डाल रही है. एकमी घाट चांडी से शोभन के बीच जिन लोगों की जमीन पड़ती है, उन्हें अभी तक पूरी तरह मुआवजा नहीं दिया जा सका है. भू-अर्जन कार्यालय जमीन पथ निर्माण विभाग को हस्तगत नहीं करा पाया है. इस वजह से भू-स्वामी निर्माण कार्य में बाधक बने हुए हैं. कहा जाता है कि इसके कागजात में कुछ तकनीकी समस्या है, जिस कारण इसमें विलंब लग रहा है.
जाम से मिलेगी निजात: बाइपास सड़क नहीं होने के कारण समस्तीपुर, बेगूसराय आदि क्षेत्र से आनेवाली चार चक्का छोटी गाड़ियां फिलहाल शहर के बीच से होकर ही मजबूरन गुजरती हैं. जब यह सड़क तैयार हो जायेगा तो मधुबनी, सहरसा, पूर्णिया आदि की ओर जानेवाली गाड़ियां सीधे बाइपास सड़क से निकल जायेंगी. इन वाहनों के शहर में प्रवेश नहीं करने से शहर की मुख्य सड़कों से दवाब काफी कम होगा. जाहिर तौर पर लोगों को राहत मिलेगी.
भू-अर्जन कार्यालय की ओर से सड़क निर्माण मार्ग में भू-स्वामियों को भुगतान नहीं किए जाने की वजह से कार्य में बाधा आ रही है. यह समस्या दूर होते ही निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर चलेगा.
विनोद कुमार,
कार्यपालक अभियंता पथ निर्माण विभाग, दरभंगा
