दरभंगा : बदलते व डिजिटल होते समाज में आज एक तबका ऐसी जगह पर खड़ा है, जहां परिजन की मौत के बाद कफन तक के लिए भीख मांगने की बेबसी दिखती है. दरभंगा जिले के लहेरियासराय में एक बेबस पत्नी की पीड़ा मन को झकझोर देगी. हम सभी को सोचने पर मजबूर कर देगी. आखिर सामाजिक ढांचा इतना खोखला क्यों है? ऐसे सवालों के जवाब हम सभी को ढूंढ़ने की जरूरत है. मामला बिहार के दरभंगा जिले के लहेरिया सराय इलाके का है.
मामले के अनुसार, लहेरिया सराय थाना क्षेत्र के नाका नंबर छह निवासी ठेला चालक जीतू मंडल (55) की मौत मंगलवार की सुबह ठंड लगने से हो गयी. जीतू की मौत के बाद उसकी पत्नी पर दुखों का पहाड़ टूट गया. उसके पास पति के शव का अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं थे. पत्नी ने जब देखा कि कोई उपाय नहीं है, तो वह लोगों से सहयोग मांगने निकल पड़ी.
बताया जाता है कि ठेला चालक की पत्नी लोगों की मदद से शव को ठेले पर रख दरभंगा-लहेरियासराय मुख्य मार्ग के नाका छह पर पहुंची. वहां बीच सड़क पर शव लदा ठेला लगा रो-रोकर लोगों से भीख मांगने लगी. मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गयी. कुछ लोगों का दिल पसीजा, तो पैसा दिया. बाकी लोग मजमा देख कर निकल गये. इस कारण करीब आधे घंटे तक सड़क पर जाम की स्थिति बनी रही. घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय पार्षद अनामिका देवी नाका छह पर पहुंचीं. उन्होंने कबीर अंत्येष्टि के तहत मृतक की पत्नी को तीन हजार रुपये दिये. पैसा जमा होने के बाद शव का अंतिम संस्कार किया जा सका. बताया जाता है कि जीतू पत्नी के साथ नाका नंबर छह के समीप किराये के मकान में रहता था. एक बेटी की शादी काफी पहले हो चुकी है.
