बेकार हो गये 59.80 लाख की इ-रिक्शा

गड़बड़ी. दो साल में सभी 52 रिक्शा खराब दरभंगा : नगर निगम क्षेत्र के 48 वार्डों के कचरा उठाव के लिए 52 इ-रिक्सा की खरीददारी दो वर्ष पहले की गयी थी. खरीदारी के एक वर्ष होते-होते सभी इ-रिक्सा खराब हो गया है. सभी रिक्से गोदाम की शोभा बढ़ा रहे हैं. किसी का बॉडी तो किसी […]

गड़बड़ी. दो साल में सभी 52 रिक्शा खराब

दरभंगा : नगर निगम क्षेत्र के 48 वार्डों के कचरा उठाव के लिए 52 इ-रिक्सा की खरीददारी दो वर्ष पहले की गयी थी. खरीदारी के एक वर्ष होते-होते सभी इ-रिक्सा खराब हो गया है. सभी रिक्से गोदाम की शोभा बढ़ा रहे हैं. किसी का बॉडी तो किसी का बैटरी जवाब दे गया है. इस कारण वार्डों से कचरे उठाव कार्य प्रभावित हो रहा है. इ-रिक्सा खरीद पर करीब 59 लाख 80 हजार रुपये खर्च किये गये थे.
रिक्शे की मरम्मत से बेहतर दूसरा विकल्प : रिक्शा की कंपनी की ओर से एक दिन का भी वारंटी प्राप्त नहीं था. इसे देखते हए बोर्ड व स्थायी समिति में इ-रिक्सा को बनवाने से बेहतर कोई दूसरा विकल्प ढूंढने की बात हुई थी. 26 सितंबर को बोर्ड की बैठक में पुन: कमेटी बनाकर मरम्मत का निर्णय लेने पर सहमति बनी है. बिना वारंटी के नई इ-रिक्सा एक वर्ष होते होते बैठ गया.
कचरा उठाव में कम पड़ रहा ट्रैक्टर : निगम के पास 16 ट्रैक्टर है. उन ट्रैक्टरों का इस्तेमाल नाला उड़ाही से लेकर कचरे के उठाव में किया जाता है. ट्रैक्टर की कमी के कारण तीन ट्रैक्टरों का माल एक ट्रैक्टर पर ढोया जाता है. कम से कम कचरा उठाव के लिए 10 ट्रैक्टरों की आवश्यकता और है.
सफाई कर्मचारियों की कमी :
शहर के विभिन्न क्षेत्रों से कचरा उठाव के लिए करीब 180 कर्मी हैं. कर्मी की कमी के कारण कचरा उठाव की समस्या वार्डों को झेलनी पड़ती है. इनमें अधिकांश दैनिक मजदूरी पर काम करते हैं.
कम्पेक्टर की खरीद एवं लागत
दो कम्पेक्टर गाड़ी की खरीद करीब 10 माह पूर्व की गयी थी. एक गाड़ी की कीमत लगभग 58 लाख रूपया है. अर्थात 1.16 करोड़ में दोनों गाड़ी की खरीद की गयी. कम्पेक्टर की उपयोगिता वर्तमान में कुछ भी नहीं है. कम्पेक्टर का इस्तेमाल कूड़ेदानों से कचरा उठाने में किया जाता है. तकनीकी कारण से इन दोनों गाड़ियों का उपयोग नहीं हो रहा है. दोनो गाड़ी बेकार बना निगम के गोदाम में पड़ा है. करीब चार माह पूर्व देा जेसीबी रोबोट की खरीद हुई है. अबतक दोनों मशीन का मुंह नहीं देख पाया. दोनों की खरीद 36 लाख में की गयी थी. यह मशीन बिना कैंची के है. कैंचीयुक्त होता तो इसकी उपयोगिता हो सकती थी.
कम टिपर से कचरा उठाव प्रभावित :निगम में टिपरों की कुल संख्या 16 है. टिपरों की संख्या कम होने के कारण एक टिपर को वार्डों में चार से पांच दिनों के अंतराल पर भेजा जाता है. इस कारण कचरा का जमावड़ा वार्डों में ज्यादा देखने को मिलता है.
बिना वारंटी व गारंटी के खरीदा रिक्शा
निगम गोदाम में खड़ी खराब पड़ा इ-रिक्शा.
शहर में ऐसी है
सफाई की व्यवस्था
गोदाम प्रभारी सुनील कुमार सिंह का कहना है कि नाका पांच से भठियारीसराय होते हएु दोनार रोड, प्रशासनिक क्षेत्र, जीएन गंज, पंडासराय से लेकर भंडार चौक मुख्य सड़क, एलएन मिश्र, दरभंगा टावर आदि मुख्य सड़कों पर सुबह नौ बजे तक साफ-सफाई का काम पूरा कर लेना है. घरों से कचरा इकट्ठा करते-करते दोपहर 12 से एक बजे जाता है. इस कारण मुख्य सड़क से गाड़ी हटाने में दोपहर के दो से तीन बज जाता है. कभी-कभी रात में भी काम करना पड़ता है. डंपिंग स्थल नहीं रहने के काण कम्पेक्टर गाड़ी गोदाम में पड़ी हुई है. इसका इस्तेमाल होता तो सड़कों पर कचरा नजर नहीं आता और मजदूर भी कम लगता.
निगम के पास डंपिंग स्थल नहीं
निगम के पास अपना कोई डंपिंग ग्राउंड नहीं होने के कारण बेला मोड़, पीटीसी, मब्बी, लहेरियासराय, सतीस्थान, लक्ष्मीसागर आदि कई स्थानों पर कचरे को दिन के उजाले या रात के अंधेरे में डाल दिया जाता है. आवासीय क्षेत्रों में कचरा गिरा दिये जाने से गाड़ी के ड्रइवरों का स्थानीय लोगों के गुस्से का शिकार बनना पड़ता है.
बेहतर साफ-सफाई को ध्यान में रखते हुए कम्पेक्टर गाड़ियों की खरीद की गयी थी. डंपिंग के लिए जगह ढूंढने का लगातार प्रयास किया गया. बरसात खत्म होते ही मब्बी स्थित जमीन का प्रयोग डंपिंग के रूप में किया जायेगा. रोबोट जेसीबी खरीददारी होने के बाद से लगातार इस्तेमाल में लाया जा रहा है. ई-रिक्सा मरम्मत को लेकर कमेटी बना दी गयी है. कमेटी के निर्णय के बाद विचार किया जायेगा.
गौड़ी पासवान, मेयर

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