डीएमसीएच. ओपीडी में नहीं आते वरीय चिकित्सक
दरभंगा : डीएमसीएच के केंद्रीय ओपीडी में मंगलवार को दिन के 11.46 मिनट मरीजों की भीड़ लगी थी. हर विभाग और यूनिट लोगों से भरा था. परची एवं दवा काउंटरों पर मरीजों की लंबी लाइन ओपीडी के बाहर तक खींच आयी थी. मरीज बारी की इंतजाम में थककर जमीन पर बैठ गये थे. अधिकांश विभाग के वरीय डाॅक्टरों की कुरसी खाली पड़ी थी.
कान-नाक व गला विभाग: इस विभाग में 11.52 मिनट पर दो वरीय डाॅक्टर चैंबर में तैनात थे. उधर पीजी डाॅक्टरों को दवा के रिप्रेजेंटेटिव सैंपल वाली दवा देने में मशगूल थे. रिप्रेजेंटेटिव प्रचार वाली बुकलेट दिखाकर दवा के नुस्खे डाॅक्टरों को बता रहे थे. निबंधन टेबल के पास मरीजों की भीड़ लगी थी. माधोपुर की सरिता कुमारी को डाॅक्टरों ने कॉर्डियोमिट्री जांच के लिए सलाह दिया. इस यूनिट में कोई डाॅक्टर नहीं थे. परिजन शंभु साह ने बताया कि जांच हो जाती तो फिर यहां नहीं आना पड़ता.
आंख रोग विभाग : दिन के 11.56 बजे यूनिट इंचार्ज तैनात दिखे. मरीजों की भीड़ लेंस यूनिट में थी. पीजी डाॅक्टर मरीजों की जांच पड़ताल में लगे थे. इस विभाग में पहला मरीज 70 साल का वृद्ध मो खुर्रम आंख जांच कराने सुबह 8.35 मिनट पर पहुंचा था.
चर्मरोग व गुप्त रोग विभाग
विभाग के तीन डाॅक्टरों के चैंबर में 12.02 मिनट पर लंबी लाइनें लगी थी. सभी मरीज आपस में पहले हम-पहले हम कर रहे थे. सोनकी के चिकनी गांव निवासी सोहन सदाय ने बताया कि वह यहां सुबह 10 बजे से लाइन में खड़े हैं, लेकिन लाइन टस से मस नहीं हो रही है. उधर मरीजों की जांच करते एचओडी के पसीने छूट रहे थे.
पीएसएम विभाग : दिन के 12.07 मिनट पर यहां 44 मरीजों को एआरवी की सूई दे दी गयी थी. पहला मरीज सुबह के 9.05 मिनट पर मंटू लाल आया था. एआरबी के अभाव में कोई मरीज नहीं लौटा था.
मेडिसिन विभाग: दिन के 12.09 मिनट पर भीड़ चरम सीमा पर थी. महिला, पुरुष और गंभीर मरीजों के काउंटर पर मरीजों की लंबी कतारें थी. डाॅक्टर मरीजों की जांच में जुटे थे. विभाग के निबंधन टेबुल के पास निजी पैथोलॉजी जांच घर के दलाल जमे थे.
हड्डी रोग विभाग : इस विभाग के यूनिट इंचार्ज का चैंबर दिन के 12.18 मिनट तक खाली पड़ा था. सभी मरीज पीजी डाॅक्टरों के भरोसे थे. मरीजों की लाइनें इमरजेंसी वार्ड तक लगी थी. पीजी डाॅक्टर भीषण गर्मी में परेशान थे.
सर्जरी विभाग : विभाग के यूनिट इंचार्ज की कुरसी पर 12.19 मिनट पर एक वरीय डाॅक्टर बैठे थे. मरीज की जांच पीजी डाॅक्टर के भरोसे था.
ड्रेसिंग यूनिट : इस यूनिट में कर्मी दिन के 12.20 मिनट पर नहीं पाये गये. कर्मी की जगह झोला छाप ड्रेसर मरीजों के ड्रेसिंग में लगे थे.
उपचार से वंचित हुए मरीज : दिन के एक बजे थे. सभी वरीय डाॅक्टर चैंबर से गायब थे. मरीज पीजी डाॅक्टरों के हवाले हो गये. वरीय डाॅक्टरों के अभाव में उपचार से वंचित मरीज फर्श पर लेटे थे.
पीजी डॉक्टरों के भरोसे मरीजों का इलाज
जमीन पर अपनी बारी की प्रतीक्षा में बैठे मरीज.
