दरभंगा : डीएमसीएच के मनोचिकित्सा विभाग के सामने लावारिस स्थिति में फेंके गये दो नवजात में एक की मौत लगभग एक माह बाद हो गयी. 26 जुलाई को नवजात के मिलने के बाद बेंता ओपी की पुलिस ने दोनों को चाइल्ड लाइन के सुपुर्द कर दिया था. वहां से बलभद्रपुर स्थित विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान भेज दिया गया. संस्थान के टीएन मिश्रा ने बताया कि 18 अगस्त को बच्ची की स्वास्थ्य बिगड़ने लगा. तत्काल उसे डीएमसीएच भेजा गया. वहां इलाज के बाद वापस भेज दिया गया. दुबारा तबियत बिगड़ने पर उसे इलाज के लिए फिर अस्पताल भेजा गया.
वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी. परिजनों के इंकार के बाद संस्थान की ओर से इसका अंतिम क्रिया कर्म किया गया. श्री मिश्रा ने बताया कि पिता के आवेदन के बाद जीवित एक नवजात को उनलोगों को सौंप दिया गया. हालांकि सिर्फ 30 दिनों के अल्प अवधि के लिए दिया गया है. विपरीत परिस्थिति में उन्हें बुलाया जा सकता है. बच्चों को पहले ही परिजनों को क्यां नहीं सौंपा गया, यह पूछने पर उनका कहना था कि बाल कल्याण समिति का निर्देश उन्हें नहीं मिला था. समिति के निर्देश के बाद ही वे लोग बच्चे को सौंप सकते हैं. समिति के कमरे आलम से पूछने पर बार-बार डेट आगे बढ़ाया जा रहा था. ऐसा क्यों किया जा रहा है इसकी उन्हें जानकारी नहीं है. बता दें कि विगत माह के 26 तारीख को मनोचिकित्सा विभाग के पास एक कार्टून में दो नवजात को परिजनछोड़ गये थे. मामले में एसएसपी सत्यवीर सिंह ने सख्त रूख अपनाते हुए जांच का आदेश दिया था. बाद में परिजन सामने आये. बच्चे के पिता मौलागंज निवासी कुशेश्वर महतो तथा मां सरिता देवी अपनाने पहुंचे. उनका कहना था कि गरीबी के कारण बच्चे के नानी ने छोड़ दिया था.
