53 साल बाद पीजी कोर्स को मान्यता
दरभंगा : डीएमसीएच के पीजी के दो कोर्सों की मान्यता मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआइ) ने 53 साल बाद बहाल कर दी है. एमसीआइ द्वारा भेजा पत्र प्राचार्य कार्यालय में चार दिन पूर्व मिला है. इसमें माइक्रोबायोलॉजी के एमडी और डिप्लोमा इन ट्रॉपिकल मेेडिसीन हेल्थ डीटीएमएच शामिल है. डीटीएमएच कोर्स पैथोलॉजी, पीएसएम और मेडिसीन विभाग […]
दरभंगा : डीएमसीएच के पीजी के दो कोर्सों की मान्यता मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआइ) ने 53 साल बाद बहाल कर दी है. एमसीआइ द्वारा भेजा पत्र प्राचार्य कार्यालय में चार दिन पूर्व मिला है. इसमें माइक्रोबायोलॉजी के एमडी और डिप्लोमा इन ट्रॉपिकल मेेडिसीन हेल्थ डीटीएमएच शामिल है.
डीटीएमएच कोर्स पैथोलॉजी, पीएसएम और मेडिसीन विभाग से जुड़े हैं. एमसीआइ ने डीटीएमएच कोर्स की मान्यता 2014 से और बॉयोकेमेस्ट्री विभाग के एमडी कोर्स की मान्यता 2015 से बहाल की है. लेकिन प्राचार्य डा. आरके सिंहा ने 1 जून को एमसीआइ को पत्र भेजा है. जिसमें दोनोें कोर्स की मान्यता को 1962 और 1963 से स्वीकृति की मांग की है.
हजारों पूर्ववर्ती छात्र हुए वंचित
दोनों विभाग में यह कोर्स 1962 व 63 से शुुरु हुआ था. डीटीएमएच कोर्स में हरेक साल 12 और एमडी बॉयोकैमेस्ट्री में तीन छात्रों का नामांकन होता है. इस हिसाब से हजारों पूर्ववर्ती छात्रों को इस कोर्स के लाभ से वंचित होना पड़ा है. हालांकि ऐसे कोर्सों की मान्यता बिहार में है, लेकिन अन्य राज्यों में नहीं है.
53 सालों से नहीं थी मान्यता
इन दोनों कोर्स की मान्यता मिलने में 53 साल लग गये. इसबीच एमसीआइ की टीम के निरीक्षण मेंं इन दोनों कोर्स एमसीआई की मान्यता पर खड़ा नहीं उतरा था और इस डिप्लोमा कोर्स को अवैध घोषित कर दिया था.
दो साल पूर्व हुआ था निरीक्षण
सरकार की मांग पर डीटीएमएच का निरीक्षण एमसीआइ टीम ने 31 मई 14 को तथा 31 दिसंबर 15 किया था. वहीं बॉयोकैमेस्ट्री के एमडी का निरीक्षण 31 मई 14 और 29 फरवरी 16 को किया था जिसमें इन दोनों कोर्सों का पठन पठन एमसीआइ के मानक पर पाया गया.
कहते हैं प्राचार्य : डाॅ आरके सिन्हा ने मान्यता बहाल की पुष्टि करते हुए बताया कि एमसीआइ को दोनों कोर्सों की मान्यता 1962 व 63 से बहाल करने का आग्रह किया गया है.