विभागाध्यक्षों को प्रभारी अधीक्षक ने लिखा पत्र

दरभंगा : सरकारी दवा उपलब्ध रहने के बाद भी चिकित्सक बाहरी दवा सेवन का निर्देश मरीजों को देते हैं. अधिकांश दवा उपलब्ध रहने के बाद भी कमीशन के लिये चिकित्सक सरकारी दवाएं नहीं लिखते. इस वजह से स्थिति यहां तक पहुंच गयी है कि डीएमसीएच में दवा एक्सपाॅयर होने के निकट पहुंच गयी हैं. इससे […]

दरभंगा : सरकारी दवा उपलब्ध रहने के बाद भी चिकित्सक बाहरी दवा सेवन का निर्देश मरीजों को देते हैं. अधिकांश दवा उपलब्ध रहने के बाद भी कमीशन के लिये चिकित्सक सरकारी दवाएं नहीं लिखते. इस वजह से स्थिति यहां तक पहुंच गयी है कि डीएमसीएच में दवा एक्सपाॅयर होने के निकट पहुंच गयी हैं.

इससे करोड़ों की दवा बरबादी के कगार पर है. अस्पताल प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है. प्रभारी अधीक्षक ने इसको लेकर सभी विभागाध्यक्षों को पत्र भेजा है. इसमें सरकारी दवा लिखने के लिये कहा है. उन्होंने एक्सपायर होने के कगार पर पहुंच चुकी दवाओं की सूची के साथ ही उसके नष्ट होने की तिथि भी अंकित की गयी है. इस पत्र ने डीएमसीएच में चिकित्सकों की ‘स्याह कार्य संस्कृति’ का पुख्ता प्रमाण दिया है.

अगले साल एक्सपायर हो जायेंगी 40 तरह की दवा
जारी पत्र के अनुसार करोड़ों की लागत से खरीदी गयी डीएमसीएच में उपलब्ध 40 प्रकार की दवायें अगले साल यानि 2017 में एक्सपायर हो जायेंगी. इन दवाओं की खरीदारी करीब ढाई साल पूर्व की गयी थी. इसमें सेवलॉन, एसएसजी क्रीम, माइकोनाजोल क्रीम, बैक्टोलीन शॉप, टेबलेट रेबीप्रॉजोल, डायलोना, आयरन फोलिक एसिड कैप्स्यूल, एमोक्सी (500 एमजी) समेत 40 तरह की दवाएं शामिल हैं.
खरीदी गयी थीं सात करोड़ की दवाएं
वर्ष 2017 में एक्सपाॅयर होने वाली दवाओं की खरीदारी करीब ढाई साल पहले हुई थी. 2018 से 2020 तक एक्सपाॅयर होने वाली दवाओं का क्रय 2015-16 में किया गया. 2015-16 में डीएमसीएच में जिन दवाओं की खरीदारी हुई, उसमें लगभग सात करोड़ की लागत आयी. यानि सात करोड़ की दवा बरबाद होने के कगार पर पहुंच चुकी है.
2020 तक एक्सपायर हो जायेंगी 91 प्रकार की दवाएं10 प्रकार की दवाओं की खपत सबसे कम
अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक की ओर से जारी पत्र में जो दवाओं की सूची उपलब्ध करायी गयी है, उसमें 82 से लेकर 91 नंबर तक अंकित दवाओं की खपत सबसे कम बतायी गयी है. इसमें लाइजोल, नारएड्रीनाथिन, टैक्सिम 1 ग्राम, बी कॉम्पलेक्स, डेरीफाइलिन, एलवेंडाजोल, क्रेप बैंडेज और सारबाइड का नाम सम्मिलित है. इन दवाओं का विशेषकर डीएमसीएच में सबसे कम खपत है. भूले-भटके ही चिकित्सक इस दवा को लिखते हैं.
2018 में बरबाद हो जायेंगी 23 प्रकार की दवाएं
23 प्रकार की दवा ऐसी है जो वर्ष 2018 में एक्सपायर होनेवाली है. इसमें पीओपी, बैंडेज, लिकोप्लास्ट, आयोडीन सल्फशन, मेट्रानिडाजोल, कैल्शियम, मेरोपेनम, पेंट्रोप्रॉजोल, एआरवी, आइवी सेट आदि नाम हैं. ये दवायें डीएमसीएच में उपलब्ध हैं, लेकिन मरीजों को नहीं लिखे जाने की वजह से स्टोर में पड़ी हैं.
सभी विभागाध्यक्षों को पत्र भेजा गया है ताकि दवाओं की खपत जल्द हो. इसलिए प्रत्येक दवाओं की एक्सपाॅयरी तिथि भी अंकित कर दी गयी है. पहले भी पत्र के माध्यम से सरकारी दवा लिखने का आग्रह चिकित्सकों से किया जा चुका है. डाॅ बालेश्वर सागर, प्रभारी अधीक्षक
कमीशन के लिए लिखी जाती हैं ब्रांडेड दवाएं
सरकारी अस्पताल में सरकार ने पर्याप्त दवाएं उपलब्ध करा रखी हैं. बावजूद बाहर से दवा खरीदने की आये दिन मरीजों की पीड़ा सामने आती है. जानकार बताते हैं कि दवा कंपनियों से मिलने वाले कमीशन के लिए चिकित्सक ब्रांडेड दवाएं अधिक लिखते हैं. उपलब्ध रहने के बावजूद सरकारी दवा नहीं लिखते. यही वजह है कि डीएमसीएच से लेकर छोटे से छोटे सरकारी अस्पताल के ईद-गिर्द निजी दवा दुकानों की भरमार नजर आती है. उनका व्यवसाय फलता-फूलता है. इससे न केवल गरीब मरीजों का आर्थिक शोषण हो रहा है, बल्कि सरकार व स्वास्थ्य महकमा की बदनामी भी हो रही है. किंतु निजी लाभ के कारण चिकित्सक न तो सरकारी निर्देश का पालन करते हैं न ही वे गरीबों पर तरस ही खाते हैं.
दवा भंडार फुल : अस्पताल के दवा भंडार में पर्याप्त मात्रा में दवाएं उपलब्ध है. इसमें 18 प्रकार की एंटीबायोटिक, 40 प्रकार की सर्जिकल सामग्री, एक तरह की कैल्सियम, आयरन, एंटी एलर्जिक, पारासीटामॉल पर्याप्त मात्रा में भंडार में है. दो प्रकार की दर्द की दवा व गैस की समस्या दूर करनेवाली दवा भी प्रचुर मात्रा में भंडार में है.

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