दरभंगा : सीएम नीतीश कुमार का चार मई को डीएमसीएच के ऑडिटोरियम में कार्यक्रम चल रहा था तो दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग के कार्यपालक निदेशक जितेंद्र कुमार नशामुक्ति केंद्र वार्ड का जायजा लेने में व्यस्त थे. कार्यपालक निदेशक इस दौरान वार्ड के एक-एक पहलूओं के बारे में हरेक डाक्टरों से जानकारी ली. लेकिन वे डाक्टरों की बातों से संतुष्ट नहीं थे. कई बातों पर नोडेल ऑफिसर सह मनोचिकित्सा विभाग के अध्यक्ष डॉ उपेंद्र पासवान एवं अस्पताल अधीक्षक डॉ एसके मिश्रा को हड़काया.
इसपर अस्पताल अधीक्षक ने कार्यपालक निदेशक से गुहार लगाते हुए कहा कि सर, मुझे अस्पताल अधीक्षक के पद से मुक्त कर दीजिए. यह सुन कार्यपालक निदेशक श्री कुमार चौंक गये. इस मौके पर कार्यपालक निदेशक, मेडिसीन एचओडी डॉ बीके सिंह समेत अन्य डाक्टर एवं कर्मी वार्ड में उपस्थित थे. जानकारी के अनुसार कार्यपालक निदेशक ने नोडेल अधिकारी से सवाल किया कि यहां पानी है या नहीं. इसपर मेडिसीन एचओडी ने बताया कि पीएचइडी यहां पानी की आपूर्ति नहीं करता है. उनके चैंबर में हाथ धोने के लिए पानी कभी आया ही नहीं.
कार्यपालक निदेशक ने मरीजों के दिनचर्या के बारे में एक-एक पल की जानकारी लेना शुरू किया. इसपर उपस्थित डाॅक्टर मौन थे. कार्यपालक निदेशक का सवाल था कि मरीजों के दिनचर्या के लिए जो किताबें दी गयी थी, वह किताब कहां है. एक डाक्टर ने तपाक से कहा कि सर घर पर हैं. कार्यपालक निदेशक बिफर पड़े. डाॅक्टरों से पूछा गया कि उपद्रवी मरीजों को कहां रखते हैं. इसपर डाॅक्टर ने बताया कि इसके लिए यहां कोई व्यवस्था नहीं है. लेकिन राशि आवंटित हो चुका है.
