.. तो फर्जी प्रमाण पत्र पर बहाल हैं विवि के प्रभारी अभियंता

.. तो फर्जी प्रमाण पत्र पर बहाल हैं विवि के प्रभारी अभियंता कुलपति ने प्रमाण-पत्रों की जांच के लिए गठित की तीन सदस्यीय कमेटीछात्र राजद के पूर्व विवि अध्यक्ष के आवेदन पर करायी जा रही जांचविनोद कुमार गिरि, दरभंगा.ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में कई लोग फर्जी तरीके से बहाल हो गये हैं. ऐसे लोगों में […]

.. तो फर्जी प्रमाण पत्र पर बहाल हैं विवि के प्रभारी अभियंता कुलपति ने प्रमाण-पत्रों की जांच के लिए गठित की तीन सदस्यीय कमेटीछात्र राजद के पूर्व विवि अध्यक्ष के आवेदन पर करायी जा रही जांचविनोद कुमार गिरि, दरभंगा.ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में कई लोग फर्जी तरीके से बहाल हो गये हैं. ऐसे लोगों में किसी का प्रमाण-पत्र फर्जी है तो किसी की नियुक्ति की प्रक्रिया ही गलत है. कई ऐसे लोगों पर पहले से तलवार लटक रही है. ऐसे लोग जांच के घेरे में है. ऐसे में एक और पदाधिकारी की नियुक्ति एवं उनके प्रमाण-पत्रों पर सवाल उठाये गये हैं. यह आरोप छात्र राजद के पूर्व विवि अध्यक्ष ने लगाये हैं. इस पर विवि के द्वारा आरोपित पदाधिकारी से स्पष्टीकरण भी पूछे गये. जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर विवि ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी, जो सात दिनों के अंदर अपनी जांच रिपोर्ट विवि को सौंपेगी.यह है मामला : छात्र राजद के पूर्व विवि अध्यक्ष राजेश कुमार ने शपथ पत्र के साथ कुलपति से 7 जुलाई 15 को शिकायत करते हुए कहा था कि लनामिवि के प्रभारी अभियंता सोहन चौधरी की नियुक्ति एवं शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों की जांच करायी जाये. उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि प्रभारी अभियंता का प्रमाण पत्र संदिग्ध प्रतीत होता है. वे विवि में पद भर ग्रहण करने के बाद रेलवे में दूसरी नौकरी की. फिर वे विवि लौट आये. शिकायत पत्र के आधार पर कुल सचिव डा. अजीत कुमार सिंह ने 23 जुलाई को पत्र जारी करते हुए श्री चौधरी से स्पष्टीकरण की मांग की. साथ ही उन्होंने वांछित कागजात भी उपलब्ध कराने को कहा. उन्होंने अपने कारणपृच्छा में 14 बिंदुओं पर जानकारी मांगी. इसके आलोक में आरोपित प्रभारी अभियंता श्री चौधरी के द्वारा 2 सितंबर को स्पष्टीकरण का जवाब दिया. जबाव के क्रम में उन्होंने कहा कि उनके पास जो भी जानकारी एवं कागजात थे उसे ससमय उपलब्ध करा दिया गया. इसके बावजूद मानसिक रूप से कष्ट प्रदान के लिए इस तरह की पृच्छा की गयी है. उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि मालवीय इंजीनियरिंग कॉलेज जयपुर जो वर्तमान में मालवीय नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से सूचना प्राप्त कर आवेदक को तत्सबंधी जानकारी उपलब्ध करायी जा सकती है. उनसे जो चौदह बिंदुओं पर सूचना मांगी गयी है उसके औचित्य पर भी उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा है जब विवि में सभी अभिलेख पहले से ही है तो फिर उनसे मांगने का क्या औचित्य. उन्होंने अपनी योग्यता एवं बहाली की निगरानी या सीबीआइ से जांच कराने की भी चुनौती दी. इधर, विवि उनके जवाब से संतुष्ट नहीं है. 27 नवंबर 15 को कुलसचिव डा. अजीत कुमार सिंह ने उनकी योग्यता एवं बहाली से संबंधित जांच करने को लेकर तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है. पेंशन पदाधिकारी डा.एसएम जफर के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय टीम में संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष एवं आरके कॉलेज मधुबनी के प्राचार्य को शामिल किया गया है. जांच कमेटी से एक सप्ताह के अंदर जांच प्रतिवेदन सौंपने का निर्देश भी दिया गया है.

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