हजारों श्रद्धालुओं ने कमला नदी में लगायी डुबकी

हजारों श्रद्धालुओं ने कमला नदी में लगायी डुबकी संतान की कामना को ले पूर्णिमा स्नान का है विशेष महत्वफोटो- 9 , 10 एवं 11परिचय- 9- नि:संतान दंपत्ति गठजोर कर नदी की ओर जाते हुए10- कमला नदी में स्नात करती महिला पुरुष की भीड़11- नदी में भगतई करते भगत व अन्यसदर, दरभंगा . कार्तिक पूर्णिमा के […]

हजारों श्रद्धालुओं ने कमला नदी में लगायी डुबकी संतान की कामना को ले पूर्णिमा स्नान का है विशेष महत्वफोटो- 9 , 10 एवं 11परिचय- 9- नि:संतान दंपत्ति गठजोर कर नदी की ओर जाते हुए10- कमला नदी में स्नात करती महिला पुरुष की भीड़11- नदी में भगतई करते भगत व अन्यसदर, दरभंगा . कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर बुधवार को गौसाघाट स्थित कमला नदी में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने डुबकी लगायी. इस मौके पर नदी में अहले सुबह से ही पवित्र स्नान के लिए आसपास एवं दूर-दराज के श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी. मेले में ओझा द्वारा खूब लाठी भांजी गयी. पीडि़त के बदन से भूत-प्रेत भगाया गया. महिलाओं को संतान होने के लिए कोखिया गुहार भी कराया गया. कमला मईया से मन्नते मांगी गयी. मन्नते पूरा होने पर मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं द्वारा बकरे व चढावा भी नदी में चढाया गया. ढोल मृदंग की थाप से माहौल गुंजायमान हो गया. इस ध्वनि पर ओझा गुणी नाचते गाते नजर आ रहे थे. जगह जगह पूजा पाठ के साथ साथ महिलाओं द्वारा कमला मईया की लोकगाथा पर आधारित गीत गायी जर रही थी. प्रशासनिक व्यवस्था दुरुस्त थीमेले में प्रशासन की ओर से चाक चौबंद व्यवस्था की गयी थी. सदर थाना के कई पुलिस पदाधिकारी अपने बल के साथ विधि व्यवस्था को सुचारु रुप से संचालित करने में लगे थे. जिला बल के कई जवान भी भीड़ को नियंत्रित करने में जुटे दिखे. सड़क जाम की स्थिति से निपटने के लिए ट्रैफिक पुलिस चुस्त नजर आ रहे थे.मेले की मान्यता गौसाघाट कमला नदी किनारे वर्ष में कार्तिक पूर्णिमा एवं माघी पूर्णिमा के अवसर पर लगनेवाले मेले खासकर नि:संतान दंपत्ति महिलाएं संतान के लिए मन्नते मांगने यहां स्नान करती है. और ओझा गुणी पूर्णिमा के अवसर पर अपना मंत्र सिद्ध करने एवं किसी के बदन से भूत प्रेत का साया हटाने पहुंचते हैं. यहां की मान्यता है कि नि: संतान महिलाएं अपने पति के साथ गौसाघाट से 7 किमी की दूरी पर जीवछ नदी में स्नान कर वहां से दोनों गठजोर कर पुन: कमला नदी पहुंचकर स्नान करती है. साथ ही दोनों नदी में डुबकी लगाकर पानी के भीतर कुछ तलाशती है. उस समय उसे नदी के जल के भीतर से जो कुछ भी मिलेगा जैसे सितुआ, घोंघा या जलकुंभी का सेवार भी मिल जाय तो उसे कमला मईया की प्रसाद समझ ग्रहण करती है. साथ ही संतान प्राप्ति के बाद उस बच्चे को यहां लाकर मुंडन कराती है. मुंडन के समय मईया का पूजा पाठ कर चढावा के रुप में बकरे, नकद आदि जल में प्रवाहित की जाती है. इस मेला की प्रसिद्धि इसी बात से है. मेले में खूब कोखिया गुहार भी लगाया गया. नि: संतान महिलाआें को ओझा के द्वारा जल में उतारकर पेट में लाठी सटाकर कोखिया गुहार कराया जाता है. इस बीच भगत कमला मैया से नाच गाकर प्रार्थना करते रहते हैं. इस कारण यहां नि: संतान दंपती अन्य जिलों से भी आते हैं और संतान होने पर उसका मुंडन कराते हैं. इस अवसर पर सीतामढी जिले के नि: संतान दंपत्ति पूनम देवी एवं उसके पति मिथिलेश साह ने कहा कि कई वर्ष शादी का बीत चुका है लेकिन संतान नहीं हुआ. किसी के मुंह से सुना कि यहां मन्नते मांगने पर मईया संतान अवश्य देती है. कोखिया गुहार के लिए यहां आये हैं.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >