दरभंगा : नयी शिक्षा नीति की कवायद शुरू हो गयी है. प्रखंड स्तर से जिला स्तर पर कार्यशाला आयोजित कर विभिन्न मुद्दों पर सुझाव लिया जा रहा है. विभाग ने जिलास्तर पर स्टेक होल्डर की कार्यशाला 31 अगस्त तक आयोजित करने को कहा है. इन कार्यशाला में प्राप्त परामर्श की कार्यवाही पुस्तिका विभाग में जमा होगा, जहां से सरकार को भेजा जायेगा.
बताते चलें कि वर्तमान में 10+2 की शिक्षा वर्ष 1986 की शिक्षा नीति के अनुसार विषय-वस्तुओं पर आधारित है. करीब तीन दशक बीतने के बाद वर्तमान केंद्र सरकार ने महसूस किया कि इसमें परिवर्तन की आवश्यकता है. इसी को लेकर नयी शिक्षा नीति के सूत्र पर विचार विमर्श शुरू हुआ है. विद्यालीय शिक्षा में 13 प्रकरण (थीम) लिया गया है, जिनपर विशेषज्ञों की राय ली जायेगी.
इसी प्रकार उच्च शिक्षा के लिए 20 थीम निर्धारित किये गये हैं. भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रलय के निर्देश पर बिहार सरकार शिक्षा विभाग के ऊपर सचिव के सेंथिल कुमार ने आदेश जारी कर प्रखंड, शहरी निकाय एवं जिला स्तर पर सभी स्टेक होल्डरों से विचार विमर्श का रिपोर्ट तलब किया है.
इसमें प्रखंड स्तर पर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी शहरी निकाय के लिए मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी एवं जिला स्तर पर जिला शिक्षा पदाधिकारी को जिम्मेवारी सौंपी है. जबकि सम्पूर्ण प्रक्रिया के मॉडरेटर की भूमिका संबंधित जिला के डीइओ निभायेंगे.
विद्यालयीय शिक्षा के विषय
नयी शिक्षा नीति के सूत्रण में विद्यालीय शिक्षा में 13 प्रकरण (थीम) होंगे. इनके विषयों में बच्चों के खराब प्रदर्शन, स्कूलों में योग्य एवं पूर्णकालिक शिक्षक उपलब्ध कराने, शिक्षण अधिगम सामग्री, मूल्यांकन प्रणाली आदि विषयों में समस्या तथा इसके समाधान के उपायों पर चर्चा होगी. बच्चों में बुनियादी कौशल, गणित सीखने के आसान तरीके, आवश्यक प्रौद्योगिकी की आवश्यकता को ढूंढ़ा जायेगा.
20 थीम पर होगी चर्चा
इस शिक्षा में 20 थीम (मुद्दों) पर चर्चा होगी. 14-18 आयु वर्ग के बच्चों को किफायती गुणवत्ता परक शिक्षा के साथ-साथ कोई इस आयुवर्ग का बच्च विद्यालयीय शिक्षा से वंचित नहीं रह सके इसर विमर्श होगा. बच्चों में समस्या समाधान, स्कूल व्यवस्था का विस्तार, पीपी मॉडल पर विचार लिया जायेगा.
ॅहोगा व्यावसायिक शिक्षा का सुदृढ़ीकरण
बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ कौशल आधारित शिक्षा के माध्यम से कुशल कार्मिक तैयार करने के उपायों पर परामर्श लिया जायेगा. इस शिक्षा का मुख्य शिक्षा से जुड़ाव एवं व्यावसायिक शिक्षा के विषयों पर भी चर्चा होगी.
शिक्षक-शिक्षा को दिया जायेगा नया रूप
कार्यशाला में शिक्षक प्रशिक्षण में विफलता के कारणों को ढूंढ़ा जायेगा. शिक्षकों के उत्तरदायित्व संस्कृत विकसित करने के उपायों पर चर्चा होगा. इसके अलावा प्रौढ़ व राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय प्रणाली, प्रौद्योगिकी शिक्षा, समावेशी एवं व्यापक शिक्षा भी विचारणीय बिंदु होगा. सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो जरूर शिक्षा का कायाकल्प हो जायेगा.
बेरोजगारी से मुक्त करायेगी नयी शिक्षा नीति
वर्तमान के विद्यालयीय से उच्च शिखा प्राप्त बेरोजगार युवाओं की एक बड़ी फौज तैयार हो रहा है. बेरोजगारी के आलम में युवा में भटकाव सहित पारिवारिक समस्याओं में उलझ जाते हैं.
ऐसे में बढ़ती अप्रत्याशित जनसंख्या को देखते हुए समीचीन हो गया है कि वर्तमान शिक्षा नीति पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस हो तथा विकसित एवं तीव्र विकासशील देशों के फीड बैक के आधार पर रोजगारोन्मुखी शिक्षा का स्वरूप हो.
