हर सीट पर फंसेगी पार्टियों की प्रतिष्ठा

जिले में दस विधानसभा क्षेत्र हैं. इसमें कुशेश्वरस्थान सुरक्षित है. चुनाव को लेकर राजनीतिक विसात बिछने लगी है. टिकट पाने की होड़ में दलबदल का खेल भी शुरू हो गया है. भाजपा के तीन विधायकों ने पाला बदल लिया, तो राजद के भी एक नेता ने भाजपा का दामन थाम लिया है. वैसे चुनाव निकट […]

जिले में दस विधानसभा क्षेत्र हैं. इसमें कुशेश्वरस्थान सुरक्षित है. चुनाव को लेकर राजनीतिक विसात बिछने लगी है. टिकट पाने की होड़ में दलबदल का खेल भी शुरू हो गया है. भाजपा के तीन विधायकों ने पाला बदल लिया, तो राजद के भी एक नेता ने भाजपा का दामन थाम लिया है. वैसे चुनाव निकट आते ही और भी कई नेता दलबदल कर सकते हैं.
भाजपा जहां रथ यात्रा के माध्यम से केंद्र सरकार की उपलब्धियों को जनजन तक पहुंचाने में जुटी है, वहीं, जदयू हर घर दस्तक के माध्यम से आम जन तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. राजद, कांग्रेस व वामपंथी दल भी कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर चुनाव के लिए तैयारी में जुटे हैं.
दलों में उलट-फेर के आसार
गौड़ाबौराम सीट पर जदयू कर कब्जा है. डा. इजहार अहमद विधायक हैं. वर्ष 2010 के चुनाव में दूसरे स्थान पर राजद के डा. महावीर प्रसाद रहे थे. वे लालू जी के मंत्रिमंडल में स्वास्थ्य मंत्री भी थे. उनका निधन हो चुका है.
उनके पुत्र रतन यादव उनकी विरासत संभालने के लिए एड़ी चोटी किये हुए हैं. वह फिलहाल राजद छोड़कर भाजपा में चले गये हैं. जदयू सीटिंग के आधार पर इस सीट पर अपना दावा करेगी. राजद इसे अपनी परंपरागत सीट मानता है, इसलिए अपनी दावेदारी पेश करेगा. भाजपा ने भी इस सीट के लिए उम्मीदवार अभी से ढूंढना शुरू कर दिया है.
संभव है कि इसी को देखते हुए रतन भाजपा में आ गये हैं. हालांकि उन्हें टिकट मिलता है या नहीं, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी. जिस प्रकार का चुनावी समीकरण पूरे प्रदेश में बना है उससे यह जरूर लगता है कि यहां भी निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव होगा.
इन दिनों
जदयू का हर घर दस्तक कार्यक्रम शुरू. राजद कार्यकर्ता भी कर रहे तैयारी. भाजपा ने भी कार्यकर्ताओं को गांवों की ओर भेजा.
मुद्दे :
बाढ़ की समस्या जस की तस
बिरौल हाटी से पीपरा समस्तीपुर तक सड़क निर्माण नहीं होने से आक्रोश
दरभंगा (ग्रा.)
टिकट को ले गोलबंदी शुरू
इस क्षेत्र पर राजद का कब्जा है. महागंठबंधन बनने के बाद राजद व जदयू के साथ कांग्रेस भी आ गयी है. महागंठबंधन ने चुनाव को रोचक बना दिया है. क्षेत्र में काम भी हुए हैं.
गांवों में पक्की सड़क का निर्माण हो गया है. बिजली की स्थिति में भी सुधार हुआ है. लेकिन, पूरे क्षेत्र अभी बहुत कुछ करना बाकी है. भाजपा इसी को मुद्दा बनाकर मैदान में उतरने की तैयारी में है.
भाजपा कार्यकर्ता सम्मेलन व परिवर्तन रथ के माध्यम से मतदताओं को रिझाने में लगी है. वहीं राजद-जदयू अपने वोटरों को गोलबंद करते हुए अबतक दूर रहे वोटरों को भी अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं. इस क्षेत्र में ऊट किस करवट बैठेगा, यह समय ही बताएगा. लेकिन,सभी पार्टियां लोगों के बीच अपनी नीतियों को पहुंचाने में लगी हैं.
इन दिनों
चुनाव निकट आने के साथ ही राजनीतिक सरगरमी तेज हो गयी है. भाजपा नेताओं ने परिवर्तन रथ और कार्यकर्ता सम्मेलन से वोटरों को साधने में जुटे. महागंठबंधन ने भी वोटरों को गोलबंद करना शुरू किया.
मुद्दे:
कई गांव सड़क व बिजली से वंचित है
क्षेत्र में अब भी पेयजल का संकट बरकरार है, जलजमाव भी समस्या है
दल बदल को ले चर्चित
मुजफ्फरपुर व सीतामढ़ी जिला से सटा है जाले विधानसभा क्षेत्र. हाल के वर्षो में दल बदल के लिए यह विधानसभा क्षेत्र जिला में सर्वाधिक चर्चित रहा. विधायक विजय कुमार मिश्र भाजपा से इस्तीफा देकर जदयू में चले गये और फिर विधार परिषद के सदस्य बन गये.
उनके पुत्र ऋषि मिश्र जदयू की टिकट यहां के विधायक बन गये. दूसरी ओर इस क्षेत्र से राजद दो बार विधायक रहे राम निवास प्रसाद ने भी भाजपा का दामन थाम लिया. पार्टी के सिम्बल पर वह उपचुनाव भी लड़े पर हार गये. इस तरह यह क्षेत्र दो दिग्गजों के दलबदल को लेकर काफी चर्चित रहा. अब चुनाव का समय फिर सामने आते ही सियासी तापमान चरम पर है. जनता और पार्टी के कार्यकर्ताओं की नजर टिकट की घोषणा पर टिकी है.
इन दिनों
जदयू जहां अपनी सीट को बरकार रखने के लिए पर्चा पे चर्चा ओर हर घर दस्तक कार्यक्रम को लेकर वोटरों से संपर्क करने में जुटे हैं. भाजपा भी अपने कार्यकर्ताओं के जरिये वोटरों के मन को टटोलने में जुटा है.
मुद्दे :
जाले विधानसभा क्षेत्र का अधिकांश भाग बाढ़ प्रभावित है.
यातायात की समस्या यहां काफी अधिक रही है.
बहादुरपुर
सभी अपने को कर रहे प्रोजेक्ट
जिला मुख्यालय से सटे बहादुरपुर विधान सभा क्षेत्र में चुनावी बिसात बिछ चुकी है. फिलहाल उम्मीदवारी को लेकर शह-मात का खेल चल रहा है. भाजपा से लेकर जदयू व राजद से अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए नेताओं के बीच अंदरूनी तौर पर घमासान मचा है. हालांकि महागंठबंधन बनने के बाद जदयू में टिकट को लेकर शोर कुछ कम जरूर हुआ है.
वहीं राजद के हरिनंदन यादव भी अपनी दावेदारी में लगे हैं. इस बीच पिछले चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहे डा. मुरारी मोहन झा भी खुद को उम्मीदवार के रूप में प्रस्तुत करने में दिन-रात लगे हैं. भाजपा जहां कार्यकत्र्ता सम्मेलन व परिवर्त्तन रथ के माध्यम से मतदाताओं को रिझाने में लगी है, वहीं जदयू विस सम्मेलन, हर घर दस्तक व पर्चा पर चर्चा के जरिये अपनी पकड़ बनाने में लगा है. बीजेपी की दावेदारी के लिए कई नेता खुद को प्रोजेक्ट करने में लगे हैं.
फिलहाल तीन नेता इस दौड़ में आगे नजर आ रहे हैं. इधर विधायक श्री सहनी के एमपी चुनाव के समय बगावती तेवर तथा विपक्षी दल से उनकी नजदीकी की खबर ने इस क्षेत्र से चुनाव लड़ने की मंशा रखनेवाले जदयू नेता ने अपनी दौड़ तेज कर दी, लेकिन महागठबंधन बनने के बाद विधायक की पार्टी में बढ़ी गतिविधि को देख अंदरूनी खींचतान बढ़ गयी है.
दूसरी ओर राजनीतिक परिदृश्य से करीब चार साल तक गायब दिखनेवाले राजद के पूर्व विधायक हरिनंदन यादव फिर से सक्रिय नजर आने लगे हैं. लिहाजा राजनीतिक सरगरमी काफी बढ़ गयी है.
इन दिनों
दल अपने हिसाब से चुनाव की तैयारी में लगे हैं. जिन लोगों को टिकट की उम्मीद है, वो अपने आकाओं के यहां दौड़ लगा रहे हैं.
समीकरण :
पिड़री में पुल का निर्माण नहीं होना
कई गांवों में आजतक सड़कों का निर्माण नहीं
नलकूपों का काम नहीं करना
कुशेश्वरस्थान (अजा)
सीट बंटवारे की बड़ी चुनौती
विधानसभा चुनाव को लेकर नेताओं सक्रियता बढ़ गयी है. 2010 में भाजपा के टिकट पर पहली बार विधानसभा पहुंचे शशिभूषण हजारी के जदयू से चुनाव लड़ने की चर्चा है.
दूसरे स्थान पर रहे लोजपा के रामचंद्र पासवान 2014 के लोकसभा चुनाव में समस्तीपुर से सांसद चुन लिये गये, जबकि तीसरे स्थान पर कांग्रेस प्रत्याशी डा.अशोक कुमार रहे. इस सीट को बरकरार रखने के लिए भाजपा ने परिवर्तन रथ के माध्यम से हर टोले में पहुंचने की कवायद शुरू कर दी है.
जदयू कार्यकर्ता भी ‘पर्चा पे चर्चा’ कार्यक्रम के तहत लोगों के बीच जा रहे हैं. इसके साथ ही हर घर दस्तक कार्यक्रम चलाकर वह हर वोटर तक पहुंचने की कोशिश में हैं. कांग्रेस नेता डा. अशोक कुमार ने भी क्षेत्र में दौरा करना शुरू कर दिया है. सब एक-दूसरे पर निशाना साधकर जनता के बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिश में जुटे हैं.
इन दिनों
टिकट पाने की मारामारी सभी दलों में है, विधायक के पार्टी छोड़ने के बाद भाजपा में कई दावेदार सामने. सभी पार्टियां वोटरों को साधने में जुटीं.
मुद्दे : कुशेश्वरस्थान पूर्वी एवं पश्चिमी प्रखंड के कई गांव बिजली से वंचित हैं.
बाढ़ प्रभावित इस क्षेत्र में यातायात की समस्या बरकार है.
बेनीपुर
वोटरों में पैठ को जुटे नेता
इस सीट पर भाजपा का कब्जा है. गोपालजी ठाकुर यहां से विधायक हैं. पिछले चुनाव में राजद के हरेकृष्ण यादव को इन्होंने पराजित किया था. जदयू, राजद और कांग्रेस के महागंठबंधन की ओर से अभी तक कोई चेहरा सामने नहीं आया है. भाजपा के लिए यह बोनस जैसा है. वैसे पिछले बार के चुनाव में द्वितीय स्थान पर रहने के कारण राजद इस सीट पर दावा कर सकता है.
विधानसभा के आंकड़ों को देखें तो जदयू के अलग होने के बाद लोकसभा चुनाव में भाजपा के वोट में सात फीसदी की गिरावट आयी. इस बार के चुनाव में महादलित वोट जिस पाले में जायेगा, उसकी स्थिति मजबूत होगी. जीतन राम मांझी अगर महादलित वोट को एनडीए के पाले में लाने में सफल होते है तब महागंठबंधन से कांटे की टक्कर होगी. बहरहाल दोनों गंठबंधन चुनाव को लेकर स्थानीय राजनीति पर पूरा जोर लगा रहे हैं.
इन दिनों
दोनों गंठबंधनों के बड़े नेताओं के चेहरे को स्थानीय कार्यकर्ता क्षेत्र में चमका रहे हैं. वोटरों को एकजुट करने के लिए एड़ी चोटी एक किये हुए हैं.
मुद्दे : सड़क, बिजली, स्वास्थ्य के क्षेत्र में बदहाली से आक्रोश
कन्हौली घाट पर पुल, पर एप्रोच नहीं
दरभंगा (शहर)
दलों में टिकट को ले मारामारी
विधानसभा चुनाव की धमक ने राजनीतिक सरगरमी बढ़ा दी है. दोनों गंठबंधनों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है. इस समय यह सीट भाजपा के पास है. पार्टी ने अपनी तैयारी भी शुरू कर दी है. वहीं राजद-जदयू के बीच महागंठबंधन हो जाने के बाद दोनों पार्टियों की सक्रियता बढ़ गयी है.
लगातार तीन बार से बीजेपी के वर्तमान विधायक संजय सरावगी विजयी होते रहे हैं. लगातार उनकी जीत का अंतर बढ़ता ही चला गया. इस बार क्या होगा यह तो आनेवाला वक्त ही बतायेगा.
कारण पिछले चुनाव से ही टिकट की कोशिश में लगे अपने ही दल के विधायक इस बार पाला बदलकर भी उनके खिलाफ खम ठोकने की तैयारी में हैं. महागंठबंधन की तरफ से किसी उम्मीदवार का नाम सामने नहीं आया है. हालांकि संभावित प्रत्याशियों ने क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ानी शुरू कर दी है.
इन दिनों
चुनावी सरगरमी तेज हो गयी है. भाजपा मजबूत स्थिति में है. राजद-जदयू में अंदरूनी तौर पर टिकट के लिए
रस्साकशी चल रही है.
मुद्दे :
जलजमाव व पेयजल संकट
विकास की कई योजनाएं लंबित हैं
सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार
अलीनगर
प्रत्याशियों की सूची लंबी
अलीनगर विधानसभा क्षेत्र पर राजद का कब्जा है. पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रहे अब्दुलबारी सिद्दीकी यहां से विधायक हैं. पिछले चुनाव में राजग की लहर में भी इस सीट राजद के कब्जे में रही. सिद्दीकी लगातार पांचवीं बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.
राजद का गढ़ माने जानेवाले इस सीट पर एनडीए भी अपने को कम नहीं आंक रहा है.
भाजपा समेत पूरा एनडीए इस को जिले का सबसे महत्वपूर्ण सीट मान रहा. इसी को ध्यान में रखकर वह सियासी समीकरण बनाने में जुटा हुआ है. सीट किसके खाते में जायेगी, कहना कठिन है, पर दावा किसी का कमजोर नहीं है. अभी सभी दलों की सरगरमी बढ़ी हुई है. दोनों गंठबंधन एक -एक मतदाता तक पहुंचना रहे हैं. संभव है कि एमएलसी चुनाव का असर यहां भी कुछ दिख जाये.
इन दिनों
चुनावी शंखनाद होने के बाद से सियासी हलचल तेज हो गयी है. राजद-जदयू कार्यकत्र्ता वोटरों से सीधे संपर्क में लग गये हैं. एनडीए भी जीत के लिए वोटरों से कर रहा संपर्क
मुद्दे:
क्षेत्र में सड़क का निर्माण नहीं होना
लौरिया चीनी मिल में गन्ना किसानों व मजदूरों का पुराना भुगतान कराना
हायाघाट
समीकरण सुधारने की कबायद
जिला के सीमा पर अवस्थित इस विधानसभा क्षेत्र में चुनावी तपिश काफी बढ़ गयी है. यहां से भाजपा विधायक अमरनाथ गामी की अपने दल से नाराजगी, बगावती तेवर व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से निकटता ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है. वैसे तो अभी पूरी तरह स्थिति साफ नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्र में भाजपा और राजद-जदयू के नेतओं की सक्रियता बढ़ गयी है.
वैसे भाजपा से पूर्व यह क्षेत्र राजद के कब्जे में था. इस लिहाज से राजद नेता घूम-घूमकर वोटरों से संपर्क करने में जुटे हैं. वैसे, जब भाजपा और जदयू साथ थे उस समय, सिर्फ पिछले चुनाव को छोडकर यह सीट जदयू के कोटे में रही. इस नजरिये से जदयू के नेता भी क्षेत्र में जुट गये हैं.महागंठबंधन के दोनों दलों के अपने-अपने दावे हैं. सीट किसके पाले में जाएगा, यह समय बताएगा.
दोनों के अपने-अपने दावे हैं. हलांकि श्री गामी ने अपने कार्यकाल के मध्य में अपने क्षेत्र में काफी पसीना बहाया, लेकिन अंतिम समय में आकर उनकी सक्रियता अपेक्षाकृत कम दिखाई पड़ रही है. भाजपा के तीन नेता इस क्षेत्र में दौड़ लगा रहे हैं.
इन दिनों
विधायक श्री गामी के बगावती तेवर को देखते हुए भाजपा नेताओं की सरगरमी काफी तेज हो गयी है. तीन नेता इसमें दिन-रात लगे हैं. महागंठबंधन के दोनों दोनों दलों के नेता भी सक्रिय
मुद्दे :खराब सड़कें, नयी सड़कें भी टूट रही हैं
यह इलाका बाढ़ प्रभावित है.
केवटी
पार्टियां झोंक रहीं ताकत
जिले के सीमावर्त्ती इलाके में अवस्थित इस क्षेत्र में सियासी तापमान अभी से चरम पर पहुंच गया है. पिछले चुनाव में महज 27 मतों के अंतर से हुई हार-जीत को देखते हुए इसबार राजग व महागंठबंधन ने अपनी-अपनी तैयारी तेज कर दी है.
भाजपा जहां अपने वोट बैंक को विस्तार देने में जुटी है, वहीं राजद पिछली खाई को पाटने के लिये एड़ी-चोटी एक किये हुए है. लगातार दो बार से सीट पर अपना कब्जा रखनेवाले भाजपा के अशोक कुमार यादव तीसरी बार जीतने के लिए
हर संभव कोशिश कर रहे हैं. अपने वोटरों को एकजुट रखने के लिए कार्यकताओं को गांव-गांव में भेज रहे हैं. राजद नेता भी अपने वोट बैंक को सहेजते हुए लोगों से कह रहे हैं कि पिछली बार थोड़ी से चूक हो गयी थी. इसबार हम ऐसा नहीं होने देंगे. राजदं महागठबंधन बनने से खुद को मजबूत बता भी रहा है.
इन दिनों
भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने क्षेत्र में वोटरों से संपर्क शुरू कर दिया है. राष्ट्रीय जनता दल अपने वोटरों को एकजुट रहने का संदेश दे रहा है. महागंठबंधन से उत्साहित भी है.
मुद्दा: रैयाम चीनी मिल का चालू नहीं होना
एनएच 105 का निर्माण नहीं होना
दरभंगा-जयनगर मुख्य पथ का जजर्र होना

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