घटना की सूचना मिलते ही डीएम कुमार रवि लाव लश्कर के साथ र्डीएमसीएच पहुंच गये. डीएम ने सबसे पहले इमर्जेसी व सीसीडब्ल्यू में जाकर मरीजों का जायता लिया. डाक्टरों से मरीजों के हालात के बारे में गहन पूछताछ की. इसके बाद डीएम श्री रवि शिशु रोग वार्ड में पहुंचे. जहां जो व्यवस्था की कमी थी […]
घटना की सूचना मिलते ही डीएम कुमार रवि लाव लश्कर के साथ र्डीएमसीएच पहुंच गये. डीएम ने सबसे पहले इमर्जेसी व सीसीडब्ल्यू में जाकर मरीजों का जायता लिया. डाक्टरों से मरीजों के हालात के बारे में गहन पूछताछ की. इसके बाद डीएम श्री रवि शिशु रोग वार्ड में पहुंचे.
जहां जो व्यवस्था की कमी थी उसे दूर करने का निर्देश दिया और मरीजों के हाल चाल पूछने में जुट गये. र्डीएम उपचार व्यवस्था में एक भी चूक न हो इसके लिए वे अस्पताल अधीक्षक, एचओडी व अन्य डाक्टरों से कई बार एचओडी के चेम्बर में समीक्षा की. इसके बाद डीएम ने खुद एक एक मरीजों के बेड के पास जाकर उनके हालात की जानकारी ली. डीएम स्वतंत्रता दिवस की रात करीब ग्यारह बजे वार्ड से विदा लिये. इसके पूर्व अधिकांश मरीजों का इलाज करा के छुट्टी दे दी गयी थी.
यहां-यहां भरती थे मरीज
शिशु रोग वार्ड में 110 बेड हैं, लेकिन रानीपुर गांव में मिठाई (बुंदियां) खाने से बीमार पड़े 187 बच्चे को शिशु वार्ड एवं मेडिसीन वार्ड में 45 लोगों को भरती कराया गया था. इसमें 181 बच्चों और 44 लोगों को उसी रात इलाज कर वार्ड से छुट्टी दे दी गयी. आधा दर्जन रविवार के दो बजे तक भरती रहे. शिशु रोग वार्ड के बरामदा और खुले में लेटाकर भी मरीजों का इलाज किया जा रहा था.