दरभंगा : डीएमसीएच की लीला भी निराली है. जिन ठेकेदारों के रहते मरीजों को दिये जाने वाले खाना की गुणवत्ता को लेकर नाराजगी दिखायी जा रही थी, आखिरकार उन्हीं ठेकेदारों को फिर से कैंटिन का जिम्मा सौंपा गया. तर्क दिया गया कि इन ठेकेदारों का रेट औरों से कम है.
दरअसल, डीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. एसके मिश्र की अध्यक्षता में गुरुवार को बैठक हुई. जिसमें मरीजों को भोजन आपूर्ति करने के लिए चार ठेकेदारों का चयन किया गया. सभी ठेकेदारों को अलग-अलग कार्यों का बंटवारा कर दिया गया है.
कई वर्षो से मिल रहा ठेका
इसमें तीन ऐसे ठेकेदार हैं जो कई सालों से जमे हैं. इनके स्थान पर कोई भी ठेकेदार यहां आने की हिम्मत नहीं जुटा पाये. इस बार मात्र यहां के एक आपूर्तिकर्ता ने यह हिम्मत जुटायी. सभी चारों ठेकेदारों को सितंबर से भोजन सामग्री देने की जिम्मेवारी तय की गयी है. इसमें चावल, दाल, सब्जी,फल, दूध, पावरोटी, बिस्कुट आदि शामिल है. मरीजों के भोजन में गुणवत्ता लाने के लिए यह इंतजाम किया गया है. ऐसे ठेकेदारों को यह जिम्मेवारी 6 माह के लिए दी गई है.
इधर चर्चा है कि आखिर यह तीनों ठेकेदार की जगह अन्य को यहां जगह क्यों नहीं मिलती है. मालूम हो कि अधिकारियों, प्राक्कलन समिति, प्राचार्य, जिला प्रशासन भोजन की गुणवत्ता पर आक्रोश व्यक्त कर चुका है, लेकिन ये तीनों ठेकेदार सालों से जमे हैं. उधर, अस्पताल अधीक्षक डॉ. एसके मिश्र ने बताया कि इन सभी का रेट सबसे कम है. साथ ही तकनीकी कागजात भी ठीक है. आपूर्तिकर्ताओं के चयन में पारदर्शिता रखी गयी है.
