किया निरीक्षण : जांच दल को देख मचा हड़कंप
दरभंगा : उत्तर बिहार के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान डीएमसीएच की कुव्यवस्था एक बार फिर सामने आयी. बुधवार को जैसे की फिजां में यह बात उछली कि अस्पताल का निरीक्षण होना है, चिकित्सकों में हड़कंप मच गया.
आमतौर पर अपनी ड्यूटी के प्रति लापरवाह रहने वाले चिकित्सक औचक निरीक्षण की जानकारी पाकर दौड़ते-भागते किसी तरह अस्पताल पहुंचे. कारण इस बार इस निरीक्षण का निर्देश जिलाधिकारी कुमार रवि की ओर से जारी किया गया था.
बावजूद अस्पताल की अव्यवस्था व चिकित्सकों की लापरवाही उजागर हो ही गयी. डीएम की ओर से इसके लिए गठित दस सदस्यीय टीम को प्राय: सभी जगह गड़बड़ी मिली. यह टीम करीब ढाई घंटे चले निरीक्षण के आधार पर तैयार अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेगी.
न सिर्फ चिकित्सक नदारद दिखे, बल्कि सफाई व प्रकाश व्यवस्था भी मानक के से काफी नीचे मिली. रोगी हलकान नजर आये. इस दल में डीडीसी विवेकानंद झा, वरीय उप समाहत्र्ता शिवकुमार राउत, सदर एसडीओ डा. गजेंद्र प्रसाद सिंह, डीसीएलआर प्रियरंजन राजू सहित अन्य अधिकारी शामिल थे.
अलग-अलग टोली बनाकर किया निरीक्षण
सुबह आठ बजे ही टीम डीएमसीएच पहुंच गयी. सबसे पहले टीम के सदस्यों ने अलग-अलग टोली बना ली. बड़े अस्पताल का हर कोने को खंगालने के नजरिये से एक साथ विभिन्न वार्डो का रूख किया.
एक टीम ओपीडी पहुंची. वहां प्रत्येक विभाग के ओपीडी कक्ष में जाकर उपस्थित चिकित्सकों के बारे में जानकारी ली. सूत्रों के अनुसार अधिकांश वरीय चिकित्सक नदारद दिखे. साथ ही कर्मियों से भी बातचीत कर विभाग के बारे में पूरी जानकारी हासिल की.
व्यवस्था में सुधार को ले डीएम की पहल
जिलाधिकारी कुमार रवि ने डीएमसीएच की कु व्यवस्था को देखकर यह पहल की. सनद रहे कि रोगी कल्याण समिति की बैठक में ही डीएम ने अस्पताल के हालात को देखते हुए अपनी नाराजगी का इजहार किया था, बावजूद डीएमसीएच के वरीय चिकित्सकों की सेहत पर इसका असर नहीं पड़ा.
इसी को ध्यान में रख बुधवार को डीएम ने गुपचुप तरीके से स्पेशल टीम गठित कर सुबह-सुबह औचक निरीक्षण के लिए भेज दिया. नतीजा सामने है. पूरे अस्पताल की कलई खुल गयी.
गंदगी देख बिफरे
एक टीम गायनी वार्ड को खंगाल रही थी. इस दल के सदस्यों ने सर्वप्रथम विभाग में चिकित्सकों की अनुपस्थिति पर आपत्ति जाहिर की. साफ-सफाई की व्यवस्था पर टीम के सदस्य नाराज दिख रहे थे.
हालांकि पूछने पर भी किसी तरह की टिप्पणी से टीम ने इंकार कर दिया. काफी कुरेदने पर कहा कि वे अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेंगे. इसपर वे ही निर्णय लेंगे.
इमरजेंसी व सजर्री में भी पायी गयी गड़बड़ी
वहीं टीम ने बच्च रोग विभाग, सजर्री व इमरजेंसी विभाग का भी जायजा लिया. प्राय: हर विभाग में वरीय चिकित्सकों की अनुपस्थिति दिखी. कर्मियों का लापरवाह रवैया भी उजागर हुआ. एक-दो को छोड़ अधिकांश इधर-उधर टहलते मिले. हालांकि निरीक्षण की सूचना मिलते ही उपस्थित सभी कर्मी भागते हुए अपनी ड्यूटी स्थल पर पहुंचे.
पहले भी हो चुकी किरकिरी
इससे पूर्व पिछले महीने की 23 तारीख को प्राक्कलन समिति के सभापति सह विधायक ललित यादव ने इस अस्पताल का मुआयना किया था. इस दौरान भी कु व्यवस्था सामने आयी थी.
इसपर उन्होंने नाराजगी का इजहार किया था. उन्होंने इस मुद्दे को विधान सभा में उठाने की बात कहते हुए यहां घोर अनियमितता होने का आरोप लगाते हुए सीबीआइ जांच की मांग उठायी थी. इतने के बाद भी अस्पताल प्रशासन की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा. अपने पुराने र्ढे पर ही काम चलता रहा, जो कि डीएम की टीम की जांच में भी सामने आ गया.
अस्पताल प्रशासन करता है खानापूरी
इधर अस्पताल प्रशासन खुद को संजीदा दिखाने के लिए गड़बड़ी सामने आने पर आनन-फानन में स्पष्टीकरण का निर्देश जारी कर दिया करता था, लेकिन जानकारों का कहना है कि यह सिर्फ दिखावे भर के लिए होता था.
दरअसल इस बहाने कार्रवाई की खानापूरी भर हो रही थी. बता दें कि कुछ दिन पूर्व ही प्रचार्य डा. आरके सिन्हा व प्रभारी अधीक्षक डा. संतोष कुमार मिश्र ने निरीक्षण कर अनुपस्थित मिले कई वरीय चिकित्सकों से जबाव-तलब किया था.
इतना ही नहीं प्राचार्य के संज्ञान में फर्जी तरीके से वरीय चिकित्सकों द्वारा हाजिरी बनवाने का भी संगीन मामला सामने आया था. इन सब के बावजूद अस्पताल प्रशासन स्पष्टीकरण पूछ अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली और क ुव्यवस्था की चक्की में पिसने के लिए गरीब मरीजों को छोड़ दिया.
