घाटों पर पूजन सामग्री के साथ कचरे का अंबार
घाटों को संवारने में 35 लाख का बना था बजट
घरों का कचरा फिर से पड़ने लगा तालाबों में
दरभंगा :लोक आस्था के महापर्व के एक सप्ताह भी नहीं गुजरे हैं और शहर की तमाम तालाबों की सूरत बदहाल नजर आने लगी है. छठ पर्व के दौरान पूजन सामाग्री तालाब में डाल दिये जाने तथा लोगों द्वारा कचरा फेंकने से गंदगी का अंबार लग गया है. पूजन सामग्री पानी में तैरते तथा घाटों पर बेतरतीब फैले दिख रहे हैं. चंद दिन पहले चकाचक नजर आ रहे इन घाटों को लोगों ने शौच कर बदसूरत कर दिया है. जिस घाट की सफाई की उसी पर लोगों ने अपने घर का कचरा डालना भी शुरु कर दिया है.
उल्लेखनीय है कि आमजन के साथ प्राय: प्रशासन को साल में एक बार ही तालाबों के घाटों की सफाई की याद आती है. वैसे निगम ने पिछले दिनों कुछ तालाबों के किनारे सफाई करायी थी. युद्धस्तर पर अभियान चला प्रशासन इसे साफ कराता है. इसके बाद छठ पर्व के लिए श्रद्धालुगण खुद उस स्थल को पवित्र करते हैं. हैरत की बात यह है कि सुचिता व पवित्रता के प्रतीक पर्व के बाद प्राय: श्रद्धालु इन जगहों पर गंदगी फैलाने से तनिक भी नहीं हिचकते.
गौरतलब है कि छठ पर्व पर निगम प्रशासन द्वारा प्रत्येक वर्ष घाटों को संवारने के लिये साफ-सफाई पर लाखों खर्च किये जाते हैं, लेकिन छठ समाप्त होते ही विभाग से लेकर आमजन तालाबों की स्वच्छता का कतई ख्याल रखते नजर नहीं आते. अमूमन विभाग छठ के मौके पर ही जागता है. इसमें अधिकांश तालाब मत्स्य विभाग के अधीन है. तालाब की सफाई तो दूर, इसकी सफाई के लिए इधर झांकता भी नजर नहीं आता.
इस वर्ष छठ के दौरान गंगासागर तालाब का पानी साफ करने के लिये मिट्टी में दवा मिलाकर छिड़काव जरुर करते मत्स्य विभाग नजर आया. सनद रहे कि इस बार छठ घाटों की सफाई के लिए 35 लाख खर्च का अनुमान किया गया. इधर दूसरी ओर पेयजल संकट को दूर करने के लिये सरकार की जल-जीवन-हरियालीयोजना के तहत प्रशासन दिसंबर माह तक सफाई पूर्ण करने का दावा कर रहा है, इसमें कितनी और कब तक सफलता मिलती है, यह आनेवाला वक्त ही बतायेगा.
