ओपीडी परिसर में मरीजों की चिकित्सा को ले चहलकदमी शुरू
दरभंगा : डीएमसीएच के जूनियर चिकित्सकों की हड़ताल बुधवार की शाम तीसरे दिन समाप्त हो गयी. स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव से हुई वार्ता के बाद शाम सात बजे हड़ताल समाप्ति की घोषणा की गयी. इसके पूर्व तीसरे दिन अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह ठप रही. सैकड़ों मरीज इलाज नहीं होने से अस्पताल से निराश लौट गये.
मेन ओपीडी व आपातकालीन विभाग में पूर्व की भांति ताला लटका रहा. एक भी मरीज का निबंधन नहीं हो सका. सभी मरीज बिना इलाज के वापस हो गये. इधर, गायनी विभाग में करीब 20 से 25 मरीजों का उपचार वरीय चिकित्सकों ने किया. इस बीच उनको दो बार जूनियर चिकित्सकों के विरोध का सामना करना पड़ा. चिकित्सकों के विरोध के कारण कतार में लगे करीब 50 मरीजों को वापस लौटना पड़ा. हड़ताल के कारण तीसरे दिन पूरे परिसर में सन्नाटा छाया रहा.
सीनियर चिकित्सकों ने दिखाया साहस: प्रभारी अधीक्षक डॉ बालेश्वर सागर ने चिकित्सा व्यवस्था को शुरु करने को लेकर विभागाध्यक्षों को एसआर व जेआर की मदद लेने को कहा था. इसका असर केवल गायनी विभाग में देखा गया. गायनी विभाग के ओपीडी में सीनियर चिकित्सक नजर आये. मरीजों के उपचार के दौरान वैसे उन्हें कई बार जूनियर चिकित्सकों के विरोध का सामना करना पड़ा. बावजूद कर्तव्य का पालन करते हुये उन्होंने कुछ मरीजों का उपचार किया. अन्य विभागों के सीनियर चिकित्सकों ने छुट्टी मनाई. किसी ने भी मेन ओपीडी या आपातकालीन विभाग में जाकर इलाज शुरू करने का प्रयास नहीं किया.
तीसरे दिन ओपीडी में पहुंचे कम मरीज
हड़ताल के कारण तीसरे दिन अपेक्षाकृत कम मरीज व परिजन इलाज के लिये डीएमसीएच पहुंचे. इसकी संख्या करीब 200 रही. मरीज सुबह में आकर गेट पर खड़े रहे. हड़ताल समाप्त होने का इंतजार किया. परिजन इलाज के लिये लोगों से पूछताछ कर रहे थे. इलाज के लिये मिन्नतें की गयी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. सभी वापस चले गये.
गरीब व लाचार मरीज व परिजन को सबसे ज्यादा परेशानी: डीएमसीएच में उपचार के लिये जिला के अलावा दूसरे जगहों से काफी संख्या में मरीज पहुंचते हैं. इनकी संख्या लगभग दो हजार प्रतिदिन होती है. इसमें अधिकांश गरीब व लाचार होते हैं. वे अस्पातल आने के लिये दूसरे से पैसा उधार लेते हैं. इन गरीब मरीजों के लिये हड़ताल सबसे ज्यादा परेशानी का कारण बना.
