नगर में संपत्ति कर की चोरी अब आसान नहीं, सर्वे शुरू

शिकंजा. नगर विकास एवं आवास विभाग ने मांगी जानकारी दरभंगा : शहरी क्षेत्र में अब संपत्ति कर की चोरी आसान नहीं होगी. विभाग इस पर नकेल कसने के लिए भौगोलिक सूचना तकनीक आधारित प्रोपर्टी सर्वे (जीआइएस) कार्य शुरू कर रहा है. इसके शीघ्र गति पकड़ने के आसार हैं. हालांकि यह योजना तीन साल पहले ही […]

शिकंजा. नगर विकास एवं आवास विभाग ने मांगी जानकारी

दरभंगा : शहरी क्षेत्र में अब संपत्ति कर की चोरी आसान नहीं होगी. विभाग इस पर नकेल कसने के लिए भौगोलिक सूचना तकनीक आधारित प्रोपर्टी सर्वे (जीआइएस) कार्य शुरू कर रहा है. इसके शीघ्र गति पकड़ने के आसार हैं. हालांकि यह योजना तीन साल पहले ही अस्तित्व में आयी, लेकिन सही मॉनिटरिंग नहीं होने की वजह से यह इन तीन साल में ठंडे बस्ते में पड़ी रही. अब एक बार फिर विभाग इसके लिए संजीदा हुआ है. जीआइएस तकनीक के लिये सर्वे कार्य को लेकर नियुक्त एजेंसी के बावत नगर विकास एवं आवास विभाग ने पत्र भेज निगम से जानकारी मांगी है. इस आलोक में निगम ने विभाग को जानकारी भेज दी है.
बता दें कि इसे लेकर बीते 28 नवम्बर को विभाग में सभी नगर निकायों व छह एजेंसियों के प्रतिनिधियों के साथ प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद ने जीएसआइ से संबंधित कार्यों की अद्यतन स्थिति की समीक्षात्मक बैठक भी की थी. सनद रहे कि निगम को एक मंजिला इमारत दिखाकर बहुमंजिला मकान बाद में बना सैकड़ों की संख्या में टैक्स की चोरी कर रहे हैं. वहीं कई लोग खाली जमीन भी निगम से छिपा रखी है. इस सिस्टम के चालू हो जाने से पूरे क्षेत्र पर निगम की सीधी नजर रहेगी. लिहाजा टैक्स चोरी का रास्ता बंद हो जायेगा.
जानकारी के अनुसार तीन साल पूर्व एक फेज में सर्वे होने के बाद दूसरे फेज के लिये सर्वे का काम जिस कंपनी को सौंपा गया था, उस कंपनी ने आठ से 10 वार्डों का सर्वे कार्य करने के बाद काम छोड़ दिया. अब विभाग ने तीन वर्ष बाद फिर से सजगता दिखायी है, लिहाजा इसके जल्द पूरा होने के आसार बढ़ गये हैं.
तीन फेज में होना है काम
जोगरैफिकल इनफॉर्मेशन सिस्टम (जीपीएस) के लिए तीन फेज में काम होना है. प्रथम फेज का काम सीई मैप माई इंडिया कंपनी को दिया गया था. इसके तहत एजेंसी ने रोड, नाला व अन्य नेटवर्क का डाटा संग्रह कर प्रथम फेज का काम पूरा कर दिया था. वहीं दूसरे फेज में बेस प्रोपर्टी सर्वे का काम साल 2014 में डीएमजी कन्सलटिंग प्राइवेट लिमिटेड नोएडा को विभाग ने सौंपा था. बताया जाता है कि एजेंसी के द्वारा अगस्त 2015 में मात्र आठ से 10 वार्डों का सर्वे डाटा इकठ्ठा कर काम छोड़ दिया गया. काम संतोषजनक नहीं देख विभाग ने बीते 23 जून 2016 को कान्ट्रैक्ट समाप्त कर दिया. उस समय से काम अटका पड़ा है. दोनों डाटा संग्रहण के बाद तीसरे फेज में वेब डिजाइनिंग का काम होना है.
यह होगा फायदा
तीनों फेज में काम पूरा होने के बाद प्रोपर्टी सर्वे व सड़क, नाला व अन्य रूट नेटवर्क के साथ-साथ सरकारी व निजी आवासीय भवन के अलावा निर्माण किये जा रहे मकान, खाली प्लाॅट आदि को आसानी से सर्च किया जा सकता है. इससे टैक्स चोरी रोकने के साथ ही बिना नक्शा पास भवन निर्माण पर भी रोक लगाने में निगम को सुविधा होगी. सबसे प्रमुख दूसरे फेज के प्राेपर्टी सर्वे में प्रत्येक घर या खाली जमीन पर जारी यूनिक आइडी सहित अन्य जानकारी लिखे बोर्ड लगाया जाना है. दिशा के मुताबिक चार जोन में बांट 42 लेयर में कैडस्ट्रल मैपिंग के माध्यम से कार्यालय में बैठे अधिकारी संबंधित स्थल का पूरा ब्योरा आसानी से हासिल कर सकेंगे.
पूरा किया जायेगा जीआइएस आधारित प्रॉपर्टी सर्वे का कार्य
सभी तरह के डाटा का किया जायेगा संग्रह
कंप्यूटर पर सीधे देखी
जा सकेगी प्लाटों व मकानों की स्थिति
वेब डिजाइनिंग से निगम को होंगे कई फायदे

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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