बुकिंग कराने पर नौ हजार प्रति सीएफटी का लगा दर

सस्ता के बदले महंगी पड़ रही ऑनलाइन बुकिंग निबंधित दुकानदारों का चालू नहीं हो सका कारोबार पुराने व्यवसायी ही लोगों को उपलब्ध करा रहे माल ट्रेन यात्रियों के लिए दिल्ली और होगी दूर परेशानी. अगले ढाई महीने तक ट्रेनों का परिचालन रहेगा अस्त-व्यस्त, आरक्षण के लिए भी मारामारी दरभंगा : कठिन लक्ष्य के लिए प्रचलित […]

सस्ता के बदले महंगी पड़ रही ऑनलाइन बुकिंग

निबंधित दुकानदारों का चालू नहीं हो सका कारोबार
पुराने व्यवसायी ही लोगों को उपलब्ध करा रहे माल
ट्रेन यात्रियों के लिए दिल्ली और होगी दूर
परेशानी. अगले ढाई महीने तक ट्रेनों का परिचालन रहेगा अस्त-व्यस्त, आरक्षण के लिए भी मारामारी
दरभंगा : कठिन लक्ष्य के लिए प्रचलित मुहावरा दिल्ली दूर है इन दिनों मिथिला क्षेत्र के रेल यात्रियों के लिए वास्तविक रूप में चरितार्थ हो रहा है. दिल्ली तथा इस ओर जाने वाली कई महत्वपूर्ण ट्रेनों के पूर्ण तथा आंशिक रूप से कैंसिल हो जाने से सही मायने में यहां के लोगों के लिए दिल्ली जाना दुरूह हो गया है. पहले से ही ट्रेनों में आरक्षण के लिए मारामारी चल रही है.
अचानक एक साथ चार गाड़ियों का परिचालन अनियमित हो जाने से परेशानी चरम पर पहुंच गई है. बता दें कि इस क्षेत्र से दिल्ली जाने के लिए प्रतिदिन चलने वाली स्वतंत्रता सेनानी सुपरफास्ट एक्सप्रेस के साथ ही अमृतसर जाने वाली जननायक एक्सप्रेस तथा जयनगर से अमृतसर के बीच चलने वाली सरयू यमुना एक्सप्रेस को आंशिक रूप से रद्द कर दिया गया है. एक दिसंबर से 13 फरवरी यानी करीब ढाई महीने तक ये ट्रेनें सप्ताह में एक-एक दिन दोनों तरफ से रद्द रहेंगी. दूसरी ओर जयनगर से अमृतसर के लिए चलने वाली शहीद एक्सप्रेस को इस अवधि में पूरी तरह से रद्द घोषित कर दिया गया है. अर्थात आगामी 13 फरवरी तक यह ट्रेन नहीं चलेगी.
इसकी वजह कोहरे के कारण ट्रेनों की लगातार बढ़ती लेट लतीफी तथा सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना बताया जा रहा है. बाहर हाल जो भी हो यात्रियों की परेशानी काफी बढ़ गई है. इस कारण एक दिन में करीब तेरह यात्री बेटिकट हो गए हैं. उनके सामने यात्रा की समस्या खड़ी हो गयी है.
अब सालोंभर पीक सीजन : यात्रियों की संख्या के अनुरूप इस क्षेत्र से ट्रेनों का परिचालन नहीं हो रहा है इसका प्रमाण लंबी दूरी की तमाम ट्रेनों में लंबे-लंबे वेटिंग लिस्ट देते है इस में लगातार वृद्धि होती जा रही है. आज से महज छह-सात साल पूर्व रेलवे के लिए दो मौसम हुआ करता था. एक पिक सीजन व दूसरा डल सीजन. जिस अवधि में ट्रेनों में आरक्षण सहज रूप से उपलब्ध हो जाता था या यह कहें कि ट्रेन खाली जाती थी तो उसे डल सीजन माना जाता. यात्रियों के दबाव बढ़ते ही रेलवे की नजर में पिक सीजन आरंभ हो जाता था. अब सालों भर एक सी स्थिति रहती है. कोलकाता जाने वाली ट्रेनों को छोड़कर किसी भी गाड़ी में ऑन डिमांड रिजर्वेशन सालों भर नहीं मिलता.
शुक्रवार को सर्वाधिक परेशानी : रेलवे की घोषणा के अनुसार एक दिसंबर से 13 फरवरी तक प्रत्येक शुक्रवार को स्वतंत्रता सेनानी तथा सरयू यमुना एक्सप्रेस नहीं जायेगी. वहीं पूरी अवधि में कैंसिल होने के कारण शहीद एक्सप्रेस का भी परिचालन नहीं होगा. यानी इस दिन तीन महत्वपूर्ण गाड़ी एक साथ नहीं जा पायेगी. जाहिरतौर पर यात्रियों के लिए सबसे परेशानी वाला दिन यही होगा.
आरक्षण वापसी के लिए लगा रहा तांता : ट्रेन रद्द होने की सूचना पर पहले से आरक्षण पर आ चुके यात्री फिर से रिजर्वेशन कराने की चिंता में डूब गए हैं. इसे लेकर टिकट वापसी के लिए दरभंगा जंकशन के आरक्षण कार्यालय यात्रियों की कतार लगी रही.
तत्काल टिकट पर और बढ़ेगा दबाव
इस वजह से तत्काल टिकट पर और दबाव बढ़ेगा. कारण नियमित ट्रेनों में पहले से ही आरक्षण फुल है, लिहाजा रिजर्वेशन के लिए यात्रियों को तत्काल टिकट का सहारा लेना होगा. अभी दिल्ली के लिए बमुश्किल एक से दो मांगपत्र पर रिजर्वेशन बन पाता है.वह भी तब जब एक मांग पत्र पर अधिकतम यात्री संख्या यानी चार यात्रियों के नाम नहीं हों. इससे कम हों. आने वाले समय में यह और भी कठिन हो जाएगा. नई दिल्ली जाने वाली बिहार संपर्क क्रांति में अगले तीन महीने तक आरक्षण खाली नहीं है.

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