बेतिया : एमजेके सदर हॉस्पिटल में मरीजों के साथ कैसा व्यवहार होता है, यह किसी से छिपी नहीं है. लेकिन, जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट में जिन बातों का खुलासा हुआ है वह चौंकाने वाले हैं़ साथ ही मानवता को शर्मसार करने वाले भी हैं.
जांच रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि हास्पिटल के प्रसव कक्ष में प्रसव के लिए आईं प्रसूताओं को बेड खाली होने का इंतजार करना पड़ता है. मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने दो डॉक्टरों का वेतन रोक अन्य कमियों को दूर करने का सख्त निर्देश दिया है.
बीते 29 नवंबर को सहायक समाहर्ता मनेश मीणा की ओर से हॉस्पिटल की औचक जांच के बाद जारी रिपोर्ट ने पूरे हॉस्पिटल के व्यवस्थाओं की पोल खोल कर रख दी है. निरीक्षण के दौरान सहायक समाहर्ता ने पाया कि एमजेके अस्पताल में गंभीर बीमारी से ग्रस्त मरीजो को चिकित्सकों द्वारा रेफर कर दिया जाता है. लेकिन जबतक मरीज अस्पताल से नहीं जाते उसके पूर्व उनकी देखभाल नहीं की जाती है.
सहायक समाहर्ता ने प्रतिवेदित किया है कि महिला वार्ड में एक मरीज छाती के दर्द से पीड़ित थी. उनको चिकित्सकों द्वारा पटना रेफर कर दिया गया था. परंतु मरीज के परिजन यात्रा करने के लिए मना कर रहे थे.
ऐसे हालत में एम जे के अस्पताल में जिम्मेवारी बनती थी कि जबतक मरीज उनके अस्पताल में है तबतक उनका उचित इलाज जारी रखे. अथवा मरीज को एम्बुलेंस मेंसभी प्रकार की सुविधायें देकर रेफर करने की कार्रवाई करे अन्यथा कानून व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ सकती है.
आइसीयू में नहीं मिले चिकित्सक
निरीक्षण के दौरान आईसीयू में रोस्टर के अनुसार शनिवार को डा़ अनिल कुमार की ड्यूटी निर्धारित थी. परंतु डा़ अनिलकुमार अनुपस्थित पाये गये. अस्पताल के अभिलेखो पता लगा कि डा़ अनिल कुमार पिछले शनिवार भी अनुपस्थित थे.
इसतरह चिकित्सकों की अनुपस्थिति के कारण आइसीयू का लाभ मरीजो को नहीं मिल पा रहा है. डीएम ने चिकित्सक डाॅ पंकज कुमार एवं डाॅ अनिल कुमार के वेतन भुगतान पर रोक लगा दिया है.
दवाओं का रिकार्ड नहीं
निरीक्षण में पाया गया कि अस्पताल में दवाओ के उपयोग का कोई रिकार्ड नही रखा जाता है. प्रतिवेदित है कि ऐसी स्थिति में यह पता लगाना मुश्किल है कि मरीजों को दवा अस्पताल से मिलती है या बाहर से खरीदनी पड़ती है. साथ हीं यह भीकहना मुश्किल है कि आपातकालीन व्यवस्थाओ के लिए सभी दवायें उपलब्ध है या नहीं .
एक ही बेड है उपलब्ध
निरीक्षण के बाद सहायक समाहर्ता ने प्रतिवेदित किया है कि प्रसव कक्ष में चिकित्सक तो उपस्थित थी मरीजों का ध्यान रखा जा रहा था. प्रतिदिन करीब 20 गर्भवती महिलाओं का प्रसव कराया जाता है. अस्पताल के प्रसव रुम में केवल एक बेड उपयोग में लाया जा रहा था़ वहीं पांच महिलाएं प्रतीक्षा कर रही थीं. कुछ उपकरण भी ठीक से काम नहीं कर रहे थे. ऐसी स्थिति में गर्भवती महिलाओं को काफी असुविधा एवं कष्ट का सामना करना पड़ता है.
अस्पताल में नहीं है कचरा प्रबंधन की व्यवस्था
श्री मीणा ने प्रतिवेदित किया है कि अस्पताल में मचरा प्रबंधन के लिए उचित व्यवस्था नही है. सभी तरहका कचरा एक ही कचरा पात्र में डाला जाता है. इसतरह कचरा प्रबंधन ठीक से न होने के कारण मेडिकल कचरा एवं सामान्य कचरा एक ही कचरापात्र में डाला जाता है. ऐसा करने से रोगजनक कीटाणु अस्पताल परिसर में पनपेंगे .
जांच रिपोर्ट
एमजेके सदर हॉस्पटिल की जांच रिपोर्ट से हुआ खुलासा, सहायक समाहर्ता ने 29 नवंबर को की थी औचक जांच
जांच रिपोर्ट पर डीएम ने दो डॉक्टरों का रोका वेतन, अन्य कमियों को दूर करने के निर्देश
