यह सुन कर आश्चर्य होगा लेकिन हकीकत है कि किसी जेल अधीक्षक को ही जेल भेज दिया गया हो. पूर्व डीएम राहुल कुमार सिंह ने बंदियों को प्रताड़ित कर उनसे अवैध वसूली करने की शिकायत की जांच के बाद जेल अधीक्षक रहे केपी पिंगुआ को जेल भेजवा दिया था. पूर्व डीएम रमेश प्रसाद ने भी एक जमादार तथा एक जेल हवलदार सह कक्षपाल के खिलाफ कार्रवाई की थी.
जब डीएम ने ही भेज दिया जेल अधीक्षक को जेल :
यह सुन कर आश्चर्य होगा लेकिन हकीकत है कि किसी जेल अधीक्षक को ही जेल भेज दिया गया हो. पूर्व डीएम राहुल कुमार सिंह ने बंदियों को प्रताड़ित कर उनसे अवैध वसूली करने की शिकायत की जांच के बाद जेल अधीक्षक रहे केपी पिंगुआ को जेल भेजवा दिया था. पूर्व डीएम रमेश प्रसाद ने भी […]

बेतिया : मर्ज बढ़ता ही गया, ज्यों-ज्यों दवाएं की. इसी तर्ज पर जिला मुख्यालय के मंडलकारा के हालात हैं. जिला प्रशासन की ओर से लगातार नियम और कायदे जैसे-जैसे सख्त होते गये. वैसे-वैसे मंडलकारा मेें अवैध सामान का जाना भी बढ़ते गया. यह हम नहीं कह रहे हैं कि बल्कि जेल के भीतर हुई हर बार की जांच व छापेमारी में मिले सेलफोन और प्रतिबंधित सामान खुद ब खुद इसकी चुगली करती दिख रहे हैं. शुक्रवार को हुई जांच में भी जेल से सेलफोन बरामद किये गये हैं.
सरकारी दावा तो यह है कि मंडलकारा अभेद्य दुर्ग है और इसमें परिंदे भी पर नहीं मार सकते. लेकिन कहनेभर मात्र के लिए यह जेल है, परंतु यहां बंद कैदियों की सुविधाएं किसी वीआईपी से कम नहीं हैं. मंडल कारा में रूटीन छापेमारी तो होती ही है.
आश्चर्य है कि हर छापेमारी में मोबाइल, सिम, चार्जर, चाकू, नशीले पदार्थ, खैनी-तंबाकू तथा अन्य कई प्रतिबंधित सामान जब्त किये जाते हैं. यदि पिछले एक वर्ष के छापेमारी पर गौर करें तो शायद ही कोई ऐसा मौका रहा होगा, जब जेल में हुई छापेमारी के दौरान कोई प्रतिबंधित वस्तुएं बरामद नहीं किये गये हों.
जबकि जेल में मुलाकात के लिए भी नियम और कानून पूर्व की अपेक्षा काफी सख्त हो गये हैं. नये मुलाकाती भवन में खिड़कियों के जरिए परिजनों से मिलने दिया जा रहा है. खाने-पीने की चीजें पहुंचाने पर भी रोक लगा दी गई है. बावजूद इसके जेल में प्रतिबंधित सामान के मिलने का सिलसिला नहीं थम रहा है. हालांकि सूत्रों की माने तो जेल में लंबे समय से जमे बंदी रक्षक और अफसर ही कूरियर का काम कर प्रतिबंधित सामानों को कैदियों तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं.
जब डीएम ने ही भेज दिया जेल अधीक्षक को जेल :
यह सुन कर आश्चर्य होगा लेकिन हकीकत है कि किसी जेल अधीक्षक को ही जेल भेज दिया गया हो. पूर्व डीएम राहुल कुमार सिंह ने बंदियों को प्रताड़ित कर उनसे अवैध वसूली करने की शिकायत की जांच के बाद जेल अधीक्षक रहे केपी पिंगुआ को जेल भेजवा दिया था. पूर्व डीएम रमेश प्रसाद ने भी एक जमादार तथा एक जेल हवलदार सह कक्षपाल के खिलाफ कार्रवाई की थी.
जेल से रैकेट चलने का हो चुका है खुलासा
जिले में अस्सी के दशक में जैसे-जैसे अपहरण फिरौती जोर पकड़ा और यहां के दियारावर्ती, तिरूआह तथा वन मध्यवर्ती क्षेत्रों में डाकूओं की गिरोहों कतारें थीं. उस समय तो अपहृत के घर वालों से उसे छोड़ने के बदले लेवी अथवा फिरौती की रकम एक लाख से पांच करोड़ तक तय होती थी. लेकिन कई बार पुलिस ने अपहरणकर्ताओं से पूछताछ के दौरान खुलासे किये कि अपहरण और फिरौती के तार मंडलकारा से ही जुड़ा है. वैसे आज वह जमाना नहीं है. लेकिन आज भी रंगदारी का नयाब तरीके अपना रहे हैं. ये अपराधी बडे व्यवसायियों समेत ठेकेदार,
चिकित्सक, नेता, किसान और पंचायत प्रतिनिधियों से रंगदारी मांग रहे हैं. वह भी पांच लाख से एक करोड़ तक की रकम. अनेक अवसरों पर पुलिस ने रहस्योद्घाटन भी किया है कि रंगदारी के लिए प्रयुक्त मोबाइल अथवा सिम मंडलकारा के पाये गये हैं.