नोटबंदी . बैंक शाखाओं की एटीएम पर लग रही लाेगों की लंबी कतार
पूरे दिन पैसा जमा करने व निकालने में हो रही परेशानी
पुलिस की मौजूदगी में बैंकोंं पर हो रहा काम, हर पल हंगामे की आ रहती है आशंका
बेतिया : नोटबंदी के दूसरे सप्ताह में भी बैंकोंं में लोगो की भारी भीड़ उमड़ रही है. हालांकि शहरी बैंकोंं में कुछ हद तक भीड़ नियंत्रित है. लोगों की संख्या ज्यादा होते हुए भी लेन-देन का काम कतारबद्ध किया जा रहा है. इसके विपरित ग्रामीण इलाकों के बैंकों में अब भी अपरातफरी का आलम कायम है. खेती किसानी के साथ दिन होने की वजह से किसान पैसे के लिए बैंकों में ज्यादा पहुंच रहे है. वहीं एक एक पाई जोड़कर घर में पैसो को रखी महिलांए भी अब बैंक पहुंचने लगी है. इसकी वजह से ग्रामीण इलाकों में भीड़ बढ़ी है. हालाकि ज्यादातर एटीएम खुल जाने से अब लोगो की कतार एटीएम पर भी लगने लगी है.
कई बैंकों ने लिया जमा
एसबीआई समेत कई बैंकों में मंगलवार को अन्य दिनों की अपेक्षा कम भीड़ दिखायी दे रही थी. बैंकों द्वारा अब सिर्फ जमा लिया जा रहा था. कुछेक बैंकों में निकासी भी चल रही है. कुछ बैंकों में हीं नोट एक्सचेंज का काम किया जा रहा है. इसकी वजह से लोगो को थोड़ी परेशानी है. लेकिन बैंक कर्मियो की कमी व छोटे नोटो का पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता नही होने से नोट एक्सचेंज पर भी प्रभाव पड़ा है.
दो हजार के नोट के लिए करना होगा इंतजार
एसबीआइ से दो हजार के नये नोट लेने के लिए ग्राहकों को अभी इंतजार करना होगा. एसबीआई के क्षेत्रीय प्रबंधक अरुण कुमार ने बताया कि आरबीआइ के नियम के अनुसार सीमावती चेस्ट में बड़े नोट नहीं भेजे जाते है. एसबीआइ का चेस्ट बेतिया में है. जो बोर्डर इलाके से जुड़ा हुआ है. ऐसी स्थिति में आरबीआई द्वारा सीधे तौर परयहां दो हजार के नोट नही भेजेगा.
इसके लिए बैंक के मुजफ्फरपुर चेस्ट से कुछ दिन बाद नये दो हजार के नोट सीमित मात्रा में उपलब्ध होने की उम्मीद है. हालाकि 500 के नये नोट एक सप्ताह के अंदर आ जाने की संभावना है. फिलहाल, सौ पचास के करेंसी जिले को उपलब्ध हुआ है. जिसको लोगों के बीच उपलब्ध कराया जा रहा है. हालाकि सेंट्रल बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा , आदि बैंक जिनका चेस्ट मोतिहारी या मुजफ्फरपुर है उन बैंकों में दो हजार के नये नोट उपलब्ध हो गये है. और ग्राहको को उपलब्ध भी कराये जा रहे है.
माफियाओं की नजर अब ग्रामीण क्षेत्र के बैंकों पर
नोटबंदी के बाद बड़े नोटों को डंप कर अपने पास कालाधन के रुप में रखे माफियाओ की नजर अब ग्रामीण क्षेत्र के बैंकों पर जा टिकी है. नोटबंदी के बाद जानकार बताते है कि कालाधन रखनेवाले दैनिक मजदूरो के आइडी पर शहर के विभिन्न बैंकों में रुपया एक्सचेंज कराते रहे हैं.
अब जब यहां एक्सचेंज का काम कतिपय बैंकों द्वारा बंद कर दिया गया है तो उनकी नजर अब ग्रामीण क्षेत्रो के बैंकों पर जा टिकी है. बताते है ंकि दैनिक मजदूरी पर ये माफिया तत्व मजदूरो को उनकी आइडी पर लाइन में खड़ा कर अपने पुराने बड़े नोटों को छोटे नोटो में बदलवा रहे है. ग्रामीण क्षेत्रो में उमड़ी अप्रत्याशित भीड़ भी इसी का परिणाम माना जा रहा है.
जनधन खाता में डाले जा रहे बड़े नोट
कालाधान रखनेवालों ने अपना निशाना गरीबो के जन धन खाता को भी बनाया है. जानकार बताते है कि नोटबंदी के बाद माफिया तत्वो ने अपने सम्पर्क में लेकर एक निर्धारित राशि का प्रलोभन देकर कई जन धन खाता में भी अपनी राशि को जमा कराना आंरभ कर दिया है. बैंकों में महिलाओ एवं गरीबों के हाथो में पांच सौ व एक हजार के नोटों के बंडल देखकर और उनके खातो ंकी जांच कर इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है.
सेवा देने में प्राइवेट व छोटे सरकारी बैंक फिसड्डी
नोटबंदी के बाद एटीएम सेवा देने में प्राइवेट बैंकफिसड्डी साबित हो रहे है. कुछेक बैंकों के एटीएम को
छोड़कर अधिकांश प्राइवेट बैंकों के एटीएम के शटर या तो गिरे रहते है या फिर उसमें नोट नही है का बोर्ड लगा दिया गया है.
यहीं हाल बहुत सारे सरकारी बैंक एटीएम के भी है. हालाकि पिछले दो दिनों में एटीएम की सेवा बढ़ी भी है. एसबीआई के आरएम अरुण कुमार की मानें तो बेतिया रिजन के उनके कुल 62 एटीएम में 56 एटीएम कार्य कर रहे है. चुकि एटीएम में फिलहाल 100 के नोट हीं डाले जा रहे है. इसकी वजह से नोट जल्द खत्म हो जाते है. और लोगो ंकी लम्बी कतारे भी लग रही है.
