डॉक्टरों के सामने हेड की इंज्यूरी सबसे बड़ी चुनौती

कार्यक्रम. देश के नामी डॉक्टर पहुंचे, सम्मेलन में उभरे िवचार वार्षिक सम्मेलन में मौजूद डॉक्टर . सम्मेलन में अपने अनुभव साझा करते मेदांता के डा एएन झा . बेतिया : मेदांता गुड़गांव के न्यूरो विभागाध्यक्ष डाॅ एएन झा ने कहा कि हेड इंज्यूरी वर्तमान समय में हमारे देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती है. यह […]

कार्यक्रम. देश के नामी डॉक्टर पहुंचे, सम्मेलन में उभरे िवचार

वार्षिक सम्मेलन में मौजूद डॉक्टर . सम्मेलन में अपने अनुभव साझा करते मेदांता के डा एएन झा .
बेतिया : मेदांता गुड़गांव के न्यूरो विभागाध्यक्ष डाॅ एएन झा ने कहा कि हेड इंज्यूरी वर्तमान समय में हमारे देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती है. यह इसलिए क्योंकि देश की युवा पीढ़ी ही इससे सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं. चूंकि नौजवानों के मौत से हमारे देश व परिवार को सबसे बड़ी क्षति होती है. इसलिए कहीं न कहीं यह कह सकते है कि हेड इंज्यूरी से होनेवाली युवाओं की मौत देश के लिए क्षति है.
डा झा रविवार को शहर के नोट्रेडम स्कूल परिसर में इंडियन मेडिकल एसोसियशन की जिला इकाई के पंचम वार्षिकोत्सव को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने आगे कहा कि सड़क दुर्घटना के समय यातायात नियमो का सहीं से पालन नही करना हेड इंज्यूरी को निमंत्रण देता है. और उसके बाद ससमय व सहीं इलाज न मिलना जीवन भर की विकलांगता या मौत को सामने ला देता है. इससे बचाव के तरिके के रुप में हमारे अपने देश में यातायात प्रणाली को और सख्त बनाना मुख्य है.
वाहन चलाते समय हेलमेट, सीट बेल्ट, लगाना आवश्यक है. साथ ही लेन ड्राईिवंग करने व ओवरलोडिंग से बचते हुए वाहन चलाना असमय दुर्घटना से बचाता है. इस दौरान आईएमए जिलाध्यक्ष डॉ महाश्रय सिंह , जिला सचिव डॉ प्रमोद तिवारी, डॉ अंजनी कुमार , डॉ श्रीकांत दूबे, डॉ सुभाष कुमार, डॉ मीरा चौधरी, डॉ प्रदीप कुमार, डॉ सुधा चंद्रा, डॉ चित्रा सिंहा, डॉ रश्मि नंद कुलियार, डॉ उषा दास, डॉ इंतेशारुल हक,डॉ संदीप कुमार, डॉ राशीद अजीम, डा़क कुमार सौरभ, डॉ राजीव रंजन,
डॉ शीतल नरुल्ला, डॉ शिल्पी रंजन, डॉ मोहनीस सिंहा आदि शामिल है. आईएमए के वार्षिकोत्सव में जिला मीडिया प्रभारी डा उमेश कुमार ने बताया कि वर्ष में एक बार आईएमए की जिला इकाई द्वारा वार्षिक सम्मेलन का आयोजन किया जाता है. यह पांचवा मौका है जब जिला इकाई ने सम्मेलन आयोजित किया है.
जिसमें जिले के साथ साथ बिहार व देश के अन्य राज्यों के नामी गिरामी डॉक्टर भाग ले रहे हैं. इसका उदेश्य यह है कि वैसे डॉक्टर अपने अनुभव व चिकित्सा प्रणाली को स्थानीय डॉक्टरों केसाथ बांटते है. ताकि जो डॉक्टर सुदूरवर्ती क्षेत्रो में कार्य कर रहे है उन्हें चिकित्सा जगत के नये शोध व विभिन्न बीमारियों के इलाज तथा आवश्यक जीवन रक्षक दवाओ का प्रयोग एवं उनके मात्रा की जानकारी मिल सके. सम्मेलन में जिन बाहर के डॉक्टरों ने अपने अनुभव बांटे उनमें हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ मधुकर शाही, डॉ निखिलेश्वर प्रसाद वर्मा, डॉ अरविन्द कुमार, डॉ नीतीश कुमार, डॉ एस केसिंह, डॉ ए के सिंह, शामिल रहे.
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के वार्षिक सम्मेलन में देश के नामी डॉक्टरों ने की शिरकत, सांसद डा संजय ने किया उद्घाटन
मेदांता गुंडगांव के डॉक्टरडा एएन झा ने हेड इंज्यूरी को बताया बड़ी चुनौती, युवाओं को बचने की दी सलाह
चिकित्सा जगत एक ऐसा विज्ञान है जहां नित नये नये शोध सामने आते रहते हैं: विधायक
फ्लैग: शहर में रविवार को देश के नामी डॉक्टरो का जमावड़ा लगा़ सभी ने अपने अनुभव बांटे. चिकित्सा जगत को बेहतर बताया, पर साथ ही लोगों को स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने का भी संदेश दिया.
आइएमए के वार्षिक सम्मेलन में मंचासीन सांसद डा संजय जायसवाल, विधायक राधव शरण पांडेय, आइएमए जिलाध्यक्ष महाश्रय सिंह .
अपडेशन के लिए सेमिनार आवश्यक: सांसद : आईएमए के वार्षिक सम्मेलन का उदघाटन करने पहुंचे सांसद डॉ संजय जायसवाल ने कहा कि इस प्रकार का सम्मेलन चिकित्सा जगत के लिए आवश्यक होता है.
इससे नयी बातों की जानकारी नये डॉक्टरों को भी मिल पाती है. वहीं वरिष्ठ डॉक्टर अपने अनुभवों से नये डॉक्टरों को लाभान्वित करते हैं.वहीं विधायक व सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राघव शरण पाण्डेय ने कहा कि चिकित्सा जगत एक ऐसा विज्ञान है जहां नित नये-नये शोध सामने आते रहते हैं. इसके लिए डॉक्टरों को अपडेट रहना पड़ता है.
सेमिनार तथा अनुभव का आदान प्रदान ही ऐसा प्लेटफार्म है जो इस कमी को दूर कर सकता है.

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