बेतिया : जिले में लगातार तीसरे दिन शनिवार को बीएसएनएल की ब्राडबैंड सेवाएं पूरी तरह से ठप रहीं.इससे सरकारी, गैर सरकारी कार्यालयों, संस्थानों, स्कूल-कॉलेजों में काम-काज प्रभावित रहा़ बीएसएनएल के इस रवैये को लेकर लोगों में भारी हताशा देखने को मिल रही है. अन्य नेटवर्क की तरफ लोगों का रूझान भी बढ़ रहा है़ हो भी क्यों न, तीन दिन बाद भी विभाग अपनी सेवाएं दुरुस्त करने में नाकाम जो है. बीते गुरुवार को बीएसएनएन की ब्राडबैंड व मोबाइल नेटवर्क ध्वस्त हो गई़ फोन करने पर पता चला कि ऊपर से ही दिक्कत है. उस दिन में शाम मोबाइल सेवाएं तो चालू कर दी गई, लेकिन ब्रांडबैंड सेवा रात भर गुल रही़
तीसरे दिन भी बीएसएनएल ब्राडबैंड सेवा ठप
बेतिया : जिले में लगातार तीसरे दिन शनिवार को बीएसएनएल की ब्राडबैंड सेवाएं पूरी तरह से ठप रहीं.इससे सरकारी, गैर सरकारी कार्यालयों, संस्थानों, स्कूल-कॉलेजों में काम-काज प्रभावित रहा़ बीएसएनएल के इस रवैये को लेकर लोगों में भारी हताशा देखने को मिल रही है. अन्य नेटवर्क की तरफ लोगों का रूझान भी बढ़ रहा है़ हो […]

दूसरे दिन शुक्रवार को भी विभागीय कर्मी इसे दुरुस्त नहीं कर सके. पूरे दिन ब्रांडबैंड सेवा पूरी तरह से ठप रही. इससे सबसे ज्यादा परेशानी ब्रांडबैंड पर निर्भर रहने वाले संस्थानों व दफ्तरों को उठाना पड़ा़ पूरे दिन फोन करने पर विभाग की ओर से महज आश्वासन ही लोगों को मिलता रहा़ देर रात तक यह दुरुस्त नहीं हो सका.
तीने दिन शनिवार को सुबह के समय करीब दो घंटे के लिए ब्रांडबैंड सेवा शुरू हो गई, लेकिन 11 बजते ही फिर सेवाएं ठप हो गईं. इसमें बाद दोपहर में तीन बजे के बाद ब्राडबैंड सेवा बहाल हो सकी़ जेई अजय कुमार ने बताया कि एनएच पर कार्य होने के चलते दिक्कत आ रही है. इसे दुरुस्त किया जा रहा है.
कस्टमर केयर के दावे भी फेल, नहीं उठ रहा फोन : ग्राहकों की शिकायत, समस्या व सुझाव के लिए विभाग की ओर से बनाया गया कस्टमर केयर भी इन दिनों फेल हो चुका है़ 06254-245000 पर फोन करने पर घंटिया तो पूरी बजती हैं, लेकिन फोन रिसीव नहीं होता है़ जबकि विभाग की ओर से दावा किया गया था कि यह कस्टमर केयर सभी कार्यदिवस में सुबह 10 से शाम पांच बजे तक कार्य करेगा.
सरकारी, गैर सरकारी कार्यालयों में काम- काज प्रभावित
ग्राहकों में हताशा, बीएसएनएल के रवैये के चलते उपभोक्ताओं का अन्य नेटवर्क की ओर बढ़ रहा रुझान
सेवाएं दुरुस्त नहीं होने से सरकार को रही राजस्व की हानि