बेतिया : नगर परिषद के इतिहास में पहली बार उपसभापति जाहिदा खातून की कुरसी अविश्वास के दौरान गिरी है. इससे पहले तो अविश्वास की राजनीति दो बार हो चुकी है. सबसे पहले वर्ष 2009 में पूर्व उपसभापति चंदन पांडेय पर अविश्वास प्रस्ताव लाने की सुगबुगाहट हुई थी. लेकिन चंदन पांडेय ने अपने व्यवहार कुशलता के बल पर इसे टाल दिया.
उसके बाद वर्ष 2014 में उपसभापति जाहिदा खातून पर अविश्वास प्रस्ताव आये. बहस के बाद सभापति के वोटिंग झटका खाने के बाद पार्षदों उपसभापति जाहिदा पर वोटिंग के लिए तैयार नहीं हुए. इस बार उपसभापति की कुरसी गिरने से नप के सारे समीकरण बिगड़ गये हैं. नप पार्षदों का दावा है कि अब सभापति पद की बारी है.
उपसभापति के अविश्वास के पक्ष में थे सभापति
उप सभापति जाहिदा खातून पर अविश्वास लाने के पक्ष में सभापति जनक साह समेत 25 पार्षद शामिल थे. इन लोगों ने ही उपसभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किया था.
इसमें सभापति जनक साह, नेहाल अहमद, रईस लाल गुप्ता, म. कलाम, सीता राम राम, अरमान अहमद, अंजना खातून, पुष्पाजंलि देवी, लक्ष्मी ठाकुर, इरशाद अख्तर दुलारे, कृपा देवी, सरोज देवी, उर्मिला देवी, राजेंद्र यादव आदि शामिल थे. जबकि अविश्वास पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकांश पार्षद बहस में आये ही नहीं. इस पर भी पार्षदों ने काफी चुटकी ली.
किंग मेकर एनाम के दावे हुए फेल
नप की राजनीति में हमेशा से किंग मेकर का दावा करने वाले पूर्व पार्षद मो. एनाम का सपना शुक्रवार को टूट गया. मो. एनाम वर्ष 2002 में सबसे पहले महावत टोली व शांति नगर मुहल्ला से जीत कर पार्षद बने. फिर 2007 में अपनी पत्नी आशिया प्रवीण को चुनाव लड़ा कर पार्षद बनाये.
चुनाव आयोग के नये नियम में फिट नहीं बैठने पर अपनी मां जाहिदा खातून को वर्ष 2012 के चुनाव में उतारा. ये चुनाव जीती भी और उपसभापति भी बनी. वर्ष 2014 में पहली बार अविश्वास आया तो अपनी मां की कुरसी गिरने से बचा लिये. जानकारी के अनुसार, वर्ष 2002 के चुनाव में स्व सुबोध सिंह को भी उपसभापति बनाने में अहम भूमिका मो एनाम ने निभायी थी. इस बार इनके सारे प्रयास विफल हो गये.
उपसभापति जाहिदा खातून के अविश्वास प्रस्ताव के बहस में 16 पार्षद सदन में नहीं आये. इसमें पार्षद सह योजना समिति सदस्य लक्ष्मी ठाकुर, अरमान अहमद, विनोद चौहान, सशक्त स्थायी समिति सदस्य नेहाल अहमद आदि शामिल थी.
