रक्सौल : नेपाल के महानगर वीरगंज के सबसे बड़े औद्योगिक घराना के उद्योग पति सुरेश केडिया का अपहरण 26 मई 2016 को बबलू दूबे के सार्गिदों ने तब अपहरण कर लिया था जब वे अपने फैक्ट्री से वापस वीरगंज आ रहे थे. नाटकीय ढंग से किये गए अपहरण के बाद नेपाल समेत पूरे सीमाई इलाके में बबलू दूबे के अपराध का सिक्का चलने लगा था. उक्त अपहरणकांड के बाद नेपाल की सत्ता के गलियारों से लेकर बिहार के सत्ता शीर्ष तक सुरेश केडिया के रिहाई के लिए प्रयास तेज हो गया था.
हालांकि 29 मई 16 को अपराधियों ने पुलिस दबाव के कारण सुरेश केडिया को कोटवा में चाय के दुकान के पास छोड़ दिया गया था. सुरेश केडिया की पहुंच का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पूर्वी चम्पारण के अपराधियों के द्वारा अपहरण करने व पूर्वी चम्पारण में रखने के बावजूद बेतिया एसपी विनय कुमार को सुरेश केडिया की रिहाई के जिम्मेवारी सौंपी गई थी. हालांकि चर्चा यह भी थी कि केडिया के रिहाई में बड़े पैमाने पर रुपये का खेल भी हुआ था.
उक्त अपहरण कांड के बाद बबलू दूबे के नाम का आतंक नेपाल के बड़े व्यापारियों में कायम हो गया. तब से अब तक ऐसा माना जाता है कि बबलू दूबे को नेपाल एवं सीमाई इलाके से बड़े पैमाने पर रंगदारी का रकम पहुंचता था. सुरेश केडिया का भाई विमल केडिया नेपाल का सांसद है और पूरे नेपाल में इस औद्योगिक घराने की एक छाप है. जिसके बाद नेपाली सरकार हरकत में आयी और पुलिस के दर्जनों छोटे बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई की गई कि आखिर नेपाल में अपहरण कर दिनदहाड़े सुरेश केडिया को अपराधी भारत कैसे ले गए. हालांकि बबलू दूबे अपनी गिरफ्तारी से पूर्व नेपाल में ही शरण लिए हुआ था. बबलू दूबे के हत्या के बाद नेपाल समेत सीमांचल के व्यापारी राहत महसूस कर रहे हैं कि शायद बबलू दूबे के मारे जाने के बाद इन्हें रंगदारी नहीं देना पड़े.
