एकजुट होंगे किसान, तो दूर हो जायेंगी समस्याएं
आयोजन. वक्त के साथ बदल गयी हैं परेशानियां, चौपट व्यवस्था के कारण बदहाल हैं किसान
मोतिहारी : चंपारण सत्याग्रह स्मृति की शताब्दी समारोह के मौके पर गुरुवार को शहर स्थित गांधी स्मारक सभागार में चंपारण तब एवं अब विषयक व्याख्यान माला का आयोजन हुआ. हिंदी दैनिक समाचार पत्र प्रभात खबर के तत्वावधान में आयोजित इस व्याख्यान माला में खासकर कृषि एवं किसान पर चर्चाएं हुईं.
गोष्ठी में शामिल गांधी विचारक एवं बुद्धिजीवियों ने सामाजिक सरोकार से जुड़े अपने विचार रखे. अध्यक्षता राजेंद्र कृषि विश्व विद्यालय पूसा के पूर्व कुलपति डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी एवं गोष्ठी का संचालन ई. विभूति नारायण सिंह ने किया. वक्ताओं ने अपने अधिभाषण में अंग्रेजी दमन के शिकार चंपारण के मजबूर किसान एवं नीलहें आंदोलन जैसे मसले पर प्रकाश डाला.
चंपारण के किसानों की समस्या एवं हालात पर आज से सौ साल पूर्व एवं वर्तमान परिपेक्ष्य का तुलनात्मक आकलन कर वक्ताओं ने समस्याओं को गिनाया. वक्ताओं ने कहा कि आज भी चंपारण के किसानों की समस्याएं कम नहीं हुयी हैं. यह अलग बात है कि अंग्रेजी हुकूमत में चंपारण के किसानों की समस्याएं कुछ और रही जो आज बदल गयी हैं.
लेकिन समस्याओं ने आज भी चंपारण के किसानों को घेर रखा है. चौपट सिंचाई व्यवस्था एवं बदहाल सरकारी कार्य योजनाओं के कारण किसान अपने को उपेक्षित महशूस कर रहे हैं. कृषि घाटे का सौदा बन गया है. वक्त की मार ने अन्नदाता किसानों के चमकते ललाट पर चिंता की लकीरें खींच दी है. बदलते हालात के कारण किसान कर्ज में डूब अपनी मान-मर्यादाओं के लिए जान देने को मजबूर है.
इन समस्याओं पर गंभीर चिंता जताते हुए वक्ताओं ने कहा कि किसानी की व्यवधान को दूर करने की जरूरत है. भारत कृषि प्रधान देश है. किसान एवं किसानी दोनों ही देश की मेरूदंड है. देश को आर्थिक रूप से सबल एवं समृद्ध बनाने के लिए वक्ताओं ने तमाम कृषि की समस्याओं को दूर करने की बात रखी. कहा कि जब तक गांव, कृषि एवं किसान खुशहाल नहीं होंगे,देश का विकास संभव नहीं है. गोष्ठी के दौरान चंपारण के किसान एवं कृषि समस्याओं पर चर्चा के लिए वक्ताओं ने प्रभात खबर की खूब सराहना की. कहा कि सामाजिक सरोकार से जुड़े ऐसे गंभीर विषयों को प्रमुखता से उठाने जैसे मसले को लेकर काफी कम समय में प्रभात खबर ने अपनी अलग पहचान बनायी है. वक्ताओं ने इसके लिए स्थानीय ईकाई के अधिकारी एवं कर्मियों की सोंच की तारीफ की.
चंपारण के किसानों की समस्याएं आज सौ साल बाद भी कम नहीं हुयी है बल्कि बदल गयी है. कृषि एवं किसानों की बदहाली का एक प्रमुख कारण मिसमैनेजमेंट है. व्यवस्थाओं के दोष से आज किसान अपने को उपेक्षित महशूस कर रहे हैं. आजादी के बाद देश का विकास हुआ है लेकिन कृषि के क्षेत्र में उन्नति की रफ्तार धीमी रही है. अंग्रेजी काल में बनी गंडक कैनाल आज भी शुचारू तौर पर काम कर रही है. जबकि इसके बाद खेतों की सिंचाई के लिए खोंदी गयी दोन एवं तिरहुत कैनाल ठप पड़ी है. जबकि हर साल खेत की सिंचाई ठप होने के बाद भी किसानों को पटवन की लगान शुल्क भरना पड़ता है.जो दोषपूर्ण व्यवस्था का प्रत्यक्ष उदाहरण है. सच तो यह है कि किसान एवं मजदूर के हित के लिए आज सरकारी कोई योजनाएं नहीं हैं.
प्रो़ चन्द्र भूषण पांडेय,गांधी विचारक सह वरीय पत्रकार
कृषि एवं किसान की बदहाली के कारण आज गांव में बसने वाला भारत वीरान हो गया है. आलम यह है कि लोग गांव से शहर की ओर तेजी से पलायन कर रहे हैं,बढ़ रही आबादी के कारण शहर भी बदहाली के कगार पर है. ऐसा नहीं कि सरकार कृषि के लिए योजनाएं नहीं चला रही. बल्कि व्यवस्था के दोष में योजनाओं का सही से क्रियान्वयन नहीं हो रहा. आज जरूरत है कि किसानों के लिए पंचायत एवं गांव स्तर पर सूचना प्रौद्योगिकी की व्यवस्था विकसित की जाए. डिजिटल इंडिया के तहत स्टॉक एक्सचेंज के साथ-साथ भंडारण एवं मार्केटिंग व्यवस्था को अपग्रेड करने की योजनाएं बनाने की आवश्यक्ता है.
ई़ विभूति नरायण सिंह,रेडक्रॉस सचिव सह समाजसेवी
गांव, किसान एवं कृषि के विकास के बीना देश का उत्थान संभव नहीं है. आर्थिक सबलता के लिए गांव एवं कृषि को समृद्ध बनाने की जरूरत है. कृषि के उन्नति के बाद सभी चीजें डेब्लप होने लगेगी. फिर जीडीपी दर ऊपर-नीचे नहीं,बल्कि ग्रोथ करेगा. सत्याग्रह शताब्दी के बाद देश की विकसित हुयी है. लेकिन विकास की दर काफी धीमी रही है. नयी तकनीक एवं खास कार्य योजनाएं बनाकर गांव से कृषि विकास की कार्य होनी चाहिए. तभी देश तरक्की करेगा. साथ ही किसानों को भी संगठित होकर उत्पादन के साथ मार्केटिंग की जिम्मेवारी भी संभालनी होगी, ताकि उन्हें उनके उत्पादन का सही कीमत मिल सके.
डॉ़ गोपाल जी त्रिवेदी, पूर्व कूलपति राजेन्द्र कृषि विवि पूसा
