अब और'' कितने परिवार तबाह करेगी सुगर मिल

उम्मीद के ट्रैक से उतरी मजदूर सूरज के परिवार की गाड़ी जिंदगी से जंग हार गया सूरज, परिवार पर टूटा आफत मोतिहारी : बेबसी व लाचारी को बयां करती यह तसवीर हनुमान सुगर मिल मजदूर सूरज बैठा के घर की है. सूरज के इस छोटे से सपनों के घरौंदे में एक बड़ा परिवार दशकों से […]

उम्मीद के ट्रैक से उतरी मजदूर सूरज के परिवार की गाड़ी

जिंदगी से जंग हार गया सूरज, परिवार पर टूटा आफत
मोतिहारी : बेबसी व लाचारी को बयां करती यह तसवीर हनुमान सुगर मिल मजदूर सूरज बैठा के घर की है. सूरज के इस छोटे से सपनों के घरौंदे में एक बड़ा परिवार दशकों से गुजर बसर करते आ रहा है. उसकी जिंदगी उम्मीद की ट्रैक पर दौड़ रही थी. सोचा था आंदोलन आज न कल रंग लायेगा. चीनी मिल खुलेगा और आर्थिक हालात में सुधार होगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. जो हुआ वह दिल दहला गया. हक के लिए संघर्ष व आंदोलन करते-करते सुरज व नरेश थक चुके थे.
दोनों ने दस अप्रैल को मिल गेट के पास आत्मदाह कर लिया. नरेश तो घटना के छह-सात घंटे बाद ही दम तोड़ दिया, जबकि दसवें दिन सुरज भी जिंदगी से जंग हार गया. गुरुवार की दोपहर बड़ाबरियारपुर स्थित सुरज की झोपड़ी में सन्नाटा पसरा था. बाहर में कुछ लोग खड़े थे, उनमें महिलाएं भी थी. कोने में एक कुर्सी पर उसकी बूढ़ी मां शांति देवी लोगों को एकटक निहार रही थी, जबकि छोटा बेटा बृज कुमार व नीतेश सड़क की तरफ टकटकी लगाये हुए थे. दोनों पिता के शव आने की राह देख रहे थे.
पूछने पर दरवाजे के पास खड़ी महिलाओं ने कहा, इ चीनी मिल केतना परिवार के बेघर कर देहलख. आगे बताया, देखत नइखी, घर कब गिर जाई कवनो ठीक बा. परसो आंधी आइल त बउआ सब घर से बाहर निकल गइल रहे. बरसात में प्लास्टिक तान से सुरज व उनकर परिवार रहत रहलख है. माथ मालिक के रहला पर सब दुख आसानी से कट जाला, लेकिन अब त घर के माथ मालिक ही चल गइल. इ परिवार के जिंदगी अब कइसे कटी, भगवान ही मालिक बारन.
रूखा-सूखा खाकर पेट भर रहे हैं बच्चे : सूरज का पटना में दस दिनों से इलाज चल रहा था. पत्नी व एक बेटा उसके साथ था, जबकि बुढ़ी मां व तीन बच्चे घर पर थे. नीतेश ने पूछने पर बताया कि जब से पापा के साथ घटना हुई है, हमलोग रूखा-सूखा खाकर अपना पेट भर रहे थे. घर में अन्न का एक दाना भी नहीं है. गांववालों ने मदद की. जो दिया उसे अपने से बना कर खा रहा था.
मौत पर ग्रामीण उठा रहे सवाल : सूरज की मौत पर ग्रामीण सवाल उठाने लगे हैं. उनका कहना है कि उसकी हालत में बेहतर सुधार था, लेकिन अचानक मंगलवार की शाम से उसकी हालत खराब हो गयी. मोतिहारी से प्रशासन के कुछ लोग पटना गये थे, उसके बाद से ऐसा क्या हुआ जो उसके स्वास्थ्य में अचानक गिरावट आने लगी. इस तरह के सवाल लोगों के जुबान पर थे.

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