सत्याग्रह स्मृति दिवस समारोह का समापन
कोटवा : 17वां चंपारण सत्याग्रह स्मृति दिवस समारोह के दूसरे दिन समापन सत्र का उद्घाटन केबीसी विजेता सुशील कुमार एवं डॉ खुर्शीद ने संयुक्त रूप से किया. उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सुशील ने कहा कि गांधी जी के सत्य, अहिंसा की प्रयोगशाला दक्षिण अफ्रीका के बाद भारत भूमि पर जसौली पट्टी में स्थापित की थी. गांधी जी के लिए उस समय चंपारण में जसौलीपट्टी से अधिक उपयुक्त भूमि नहीं थी, जहां सत्य, अहिंसा की प्रयोगशाला स्थापित कर सके.
उन्होंने कहा कि गांधी जी की जसौली पट्टी की यात्रा से राष्ट्रीय आंदोलन का राजपथ तैयार हुआ. डॉ खुर्शीद ने कहा कि बाबू लोमराज सिंह के जन्मभूमि एवं महात्मा गांधी के कर्मभूमि को नमन करने आया हूं. यहां की वर्तमान पीढ़ी सुदूर देहात में अपने पूर्वजों की स्मृतियों को सहेजने का काम करती है बहुत बड़ी बात है. मौके पर पूर्व मुखिया कमलेश कुमार सिंह, सुनील सिंह, रविंद्र सिंह, ई कुमार संजय, पत्रकार गजेंद्र सिंह, अशोक कुमार चौधरी, प्रधानाध्यापक उपेंद्र कुमार सिंह, प्रकाश कुमार सिंह, कृष्णकांत राज, कुमार ओमकार, प्रशांत राज, निशांत राज के साथ सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे.
कार्यक्रम का संचालन श्री गांधी लोमराज पुस्तकालय सह जिला सर्वोदय मंडल के सचिव विनय कुमार ने किया. कार्यक्रम के दूसरे सत्र में संस्कृति कार्यक्रम में स्वरांगण सांस्कृतिक कल्याण सेवा समिति, पटना के कलाकारों ने लोक नृत्य एवं लोक संगीत की प्रस्तुति दी. मेनका कुमारी, पंडित अर्जुन कुमार चौधरी, डॉ शिवजी सिंह, शिवनाथ प्रसाद, रत्नेश कुमार ने लोक संगीत की प्रस्तुति से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया. वही निहारिका अखौरी, अनंत कुमार मिश्र ने लोकनृत्य की प्रस्तुति के द्वारा लोगों को झूमने के लिए मजबूर कर दिया.
काश! हर रोज आते मंत्री जी
पीपराकोठी ़ काश! चन्द्रहियां में प्रतिदिन मुख्यमंत्री से लेकर केन्द्रीय मंत्री तक गांधी दर्शन हेतु पहुंचते तो चन्द्रहिया ही नहीं पीपराकोठी से लेकर मोतिहारी तक का विकास ऐसा हो जाता कि राजधानी भी फीका पड़ जाता. चन्द्रहियां गांधी स्मारक एक माह पहले तक विरान पड़ा हुआ था और जैसे ही राज नेताओं को चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी की याद आई चन्द्रहिया का दौड़ लगाना शुरू कर दिया. ऐसा विचार स्थानीय सुरेन्द्र यादव, योगेन्द्र बैठा सहित कई लोगों ने दिया. आगे इन लोगों ने कहा कि केन्द्र सरकार व बिहार सरकार के मंत्रीगण गांधीजी के नाम पर अपनी उपलब्धि लेने के होड़ में लगे हुए हैं. रातो-रात गांधी स्मारक से लेकर राजमार्ग तक सड़क निर्माण, गांधी स्मारक का रंग रोगन, होडिंग, बैनर, तोरण द्वार का निर्माण हो गया. प्रशासन दिन-रात सुरक्षा से लेकर स्वच्छता तक युद्ध स्तर तक लगे हुए हैं. यहां तक कि सड़कों के धुलकण को उड़ाने की इजाजत नहीं है. नेता व अधिकारियों के आने का तांता लगा है. मंत्रीगण विकास योजनाओं के घोषणा कर रहे हैं. अगर घोषणा पर पहल होती रहे तो वह दिन दूर नहीं कि चन्द्रहियां को बापूधाम बनने में देर नहीं लगेगा.
