हाल मोतिहारी सुगर मिल का
14 मार्च 2012 को सुगर मिल की जमीन बेच कर मजदूरों का भुगतान कराने का दिया था आदेश
जमीन बिक्री के लिए 20 अगस्त 2014 को डीएम की अध्यक्षता में बनायी गयी थी कमेटी
मोतिहारी : पटना उच्च न्यायालय के आदेश पर अगर अमल हुआ होता तो शायद यह दिन मजदूरों को देखना नही पड़ता और आत्मा दाह करने की नौबत नही आती.14 मार्च 2012 को पटना उच्च न्यायालय ने वाद संख्या-8734/2009 की सुनवाई करते हुए नोपानी परिवार की जमीन बेचकर हनुमान सुगर एण्ड ई.लि. का विधिवत संचालन कराने, मजदूरों का बकाया वेतन व भविष्य निधि का भुगतान करने का आदेश दिया था.न्यायालय ने गन्ना उत्पादकों का भी भुगतान कराने का आदेश जारी किया था.
न्यायालय का आदेश पूरी तरह से कागजों में सिमट कर रह गया और मजदूर आदेश की प्रति लेकर अधिकारियों के यहां चक्कर लगाते रहे.आखिर में दो साल बाद यानि 20 अगस्त 2014 को आदेश का अनुपालन के लिए डीएम की अध्यक्षता में एक टीम बनायी गयी.टीम में अपर समाहर्ता, सदर के भूमि सुधार उप समाहर्ता सदर,वरीय उप समाहर्ता जिला विधि शाखा व अंचलाधिकारी मोतिहारी को शामिल किया गया. जानकार बताते हैं कि कमेटी तो बनी लेकिन वह कमेटी फाइलों में ही सीमट कर रह गयी.इस बीच जिलाधिकारी सहित कई अधिकारियों का तबादला हो गया और नये जिलाधिकारी ने योगदान किया. नये जिलाधिकारी ने भी मजदूरों की दर्द सुनी और समस्या समाधान करने व न्यायालय के आदेश का अनुपालन के लिए पहल तो शुरू की लेकिन अब मजदूरों का भरोसा नहीं रहा. इसका खामियाजा सोमवार को भुगतना पड़ा.
मुख्यमंत्री के जनता दरबार में भी हुई थी शिकायत: नरेश कुमार श्रीवास्तव मोतिहारी सुगर मिल लेबर यूनियन के महामंत्री की जिम्मेवारी निभा रहे थे.जब अधिकारियों ने उनकी समस्याओं पर ध्यान नही दिया तो मुख्यमंत्री के दरबार में भी इसकी शिकायत की थी.विशेष कार्य पदाधिकारी मृत्युंजय कुमार ने मुख्यमंत्री के उप सचिव को दिये पत्र में इस का खुलासा किया है.ज्ञापांक-1834 दिनांक-21.8.14 को भेजे पत्र में बताया कि जमीन की विवरणी उपलब्ध नही होने के कारण बिक्री प्रक्रिया नही हो पा रही है.
