मोतिहारी सदर अस्पताल में साढ़े चार करोड़ की दवा घोटाले में हुई कार्रवाई

मोतिहारी : सदर अस्पताल में दवा घोटले व खरीद में हुई गड़बड़ी को लेकर तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ मीरा वर्मा सहित पांच लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है. प्राथमिकी सिविल सर्जन डॉ प्रशांत कुमार के पत्रांक-845 दिनांक-5 अप्रैल 2017 के तहत बुधवार की शाम नगर थाना में दर्ज की गयी. दवा घोटाला करीब चार […]

मोतिहारी : सदर अस्पताल में दवा घोटले व खरीद में हुई गड़बड़ी को लेकर तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ मीरा वर्मा सहित पांच लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है. प्राथमिकी सिविल सर्जन डॉ प्रशांत कुमार के पत्रांक-845 दिनांक-5 अप्रैल 2017 के तहत बुधवार की शाम नगर थाना में दर्ज की गयी. दवा घोटाला करीब चार करोड़ 50 लाख 77 हजार रुपये का है.
प्राथमिकी के अनुसार, बगैर किसी आदेश के आपूर्तिकर्ता कंपनी की ओर से करीब छह करोड़ की दवा आपूर्ति की गयी. जांच के दौरान भंडार में करीब 85 लाख सात हजार की दवा मिली. अनुलग्नक के अनुसार, जब भुगतान किया गया है वह ड्यू वाउचर के आधार पर किया गया है. हस्ताक्षर वाउचर पर है, लेकिन पंजी में उसका उल्लेख नहीं है.
मामले को लेकर तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ मीरा वर्मा शाही कॉलोनी हाजीपुर, डॉ यूएस पाठक तत्कालीन भण्डार चिकित्सक, भुनेश्वर श्रीवास्तव तत्कालीन प्रधान लिपिक डामोदरपुर गोविन्दगंज, ब्रह्मपुरा मुजफ्फरपुर निवासी मनोज कुमार व तुरकौलिया, वर्तमान में बेलबनवा निवासी अमित कुमार पर प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है. सिविल सर्जन ने इन अधिकारियों व कर्मियों की मिलीभगत से बगैर दवा खरीद उक्त राशि के भुगतान का आरोप लगाया है. निदेशक प्रमुख स्वास्थ्य विभाग डॉ आरडी रंजन ने पूर्व में प्राथमिकी का निर्देश दिया था. प्राथमिकी के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है.
नगर इंस्पेक्टर अजय कुमार ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गयी है. दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तय है.
भंडार प्रभारी व प्रधान सहायक को भी बनाया गया आरोपित
मामला वर्ष 2014-15
के मार्च का
बिना दवा आपूर्ति के 12 विपत्रों में ट्रेजरी से हुआ भुगतान
स्टोर सत्यापन में मिली मात्र 85 लाख की दवा
चार करोड़ 50 लाख 77 हजार का है घोटाला
मामले में एक डॉक्टर सहित तीन
को किया जा चुका है निलंबित
दवा खरीद मामले में डॉ यूएस पाठक 2014-2015 में भंडार के प्रभारी थे, जिन्हें विभाग ने पूर्व में निलंबित कर दिया है. इसके अलावा लिपिक मनोज कुमार व अमित कुमार भी निलंबित हो चुके हैं. निलंबन का कारण भुगतान वाउचर पर डॉ यूएस पाठक का हस्ताक्षर बताया गया है. इधर डॉ पाठक ने अपने हस्ताक्षर को फर्जी बताते हुए विभागीय अधिकारियों को पत्र लिखा है. सूत्रों की मानें तो सदर अस्पताल में एक गिरोह सक्रिय है, जो प्रतिवर्ष मार्च में ट्रेजरी से मिलीभगत कर राशि की निकासी करता है. यह संयोग है कि मामला पकड़ में आया, जो सूक्ष्म जांच का विषय है.
मोतिहारी व मुजफ्फरपुर की है दवा आपूर्ति कंपनी
बिना दवा आपूर्ति के राशि उठाव करनेवाले अधिकाशं आपूर्तिकर्ता मुजफ्फरपुर, पटना व मोतिहारी के हैं.इसमें तानिया हैंडलूम,बरमसवा,वेनस मेडिसाइंस प्रा.लि. मुजफ्फरपुर, एस्ट्रीप हाउस मुजफ्फरपुर, ओमेगा बायोटेक पटना, एमएस साईं इंटरप्राइजेज बेलीसराय, मोतिहारी आदि के नाम शामिल हैं. पुलिस ने इन कंपनियों की जांच शुरू कर दी है.

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