पीपराकोठी : बांस के उत्पादन से कम लागत में बेहतर और मजबूत फर्निचर का निर्माण किया जा सकता है,जो स्टील से भी मजबूत होगा और आमदनी सोच से अधिक हो सकती है़ मात्र पांच बांस में सोफा सेट का निर्माण किया जा सकता है जो बाजार मूल्य में कम से कम बीस हजार रुपये की […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
पीपराकोठी : बांस के उत्पादन से कम लागत में बेहतर और मजबूत फर्निचर का निर्माण किया जा सकता है,जो स्टील से भी मजबूत होगा और आमदनी सोच से अधिक हो सकती है़ मात्र पांच बांस में सोफा सेट का निर्माण किया जा सकता है जो बाजार मूल्य में कम से कम बीस हजार रुपये की होगी़ साथ ही उसकी देख भाल सही तरीके से हुई तो लकड़ी से बने फर्निचर से अधिक टिकाउ होगा़ आसाम गोवाहाटी से आये बम्बू टेक्नोलॉजी सेंटर के निदेशक अंजली गोस्वामी ने स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र में चल रहे बांस से संबंधित शस्त शिल्क पर आयोजित दस दिवसीय किसान प्रशिक्षण के दौरान मौजूद किसानों को कही़
उन्होंने कहा कि बांस को गांव में घर के पीछे, खेत खलिहान के मेड़, पथरीली भूमि पर भी उगाया जा सकता है़ बिहार की मिट्टी ऐसी है कि उसे कहीं भी लगाया जा सकता है़ यहां बांस के ग्रोथ की संभावनाएं अधिक है़ं
चीन से प्रशिक्षण करने के बाद आसाम में इसका प्रयोग शुरू किया गया और आज पूरे उतर भारत के नागालैंड, मिजोरम, आसाम आदि कई राज्यों में बांस से बने फर्निचर का उपयोग किया जा रहा है़ निदेशक श्री गोस्वामी ने बांस के और विशेष गुण को दर्शाते हुए कहा कि बांस एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है. बिहार के पीपराकोठी के कृषि विज्ञान केंद्र में इसका शुभारंभ किया गया है और यहां के किसान प्रशिक्षण लेकर अधिक से अधिक लाभ लेंगे़