अजीत कुमार सिंह / जितेंद्र कुमार
रक्सौल : हजारों नम आंखों के बीच कश्मीर के आरएसएपुरा सेक्टर में शहीद जितेंद्र सिंह को उनके 10 साल के पुत्र रोहित ने मुखाग्नि दी. इसके साथ ही शहीद जितेंद्र पंचतत्व में विलीन हो गये. इससे पहले शहीद का पार्थिव शरीर 9 बजे शहर में पहुंचा, तो पूरा शहर सड़क पर उमड़गया अपने इस लाल का अंतिम दर्शन करने के लिये. शव यात्रा जिस रास्ते से गुजरी लोगों ने श्रद्धांजलि दी. कुछ देर के लिए शहर रूक सा गया था. हजारों की भीड़ सड़क पर थी. भीड़ के सामने पुलिस की सारी सुरक्षा व्यवस्था बौनी प्रतीत हो रही थी. शहीद का शव उनके घर ले जाया गया, जहां उनके अंतिम दर्शन के लिए भगदड़ मच गयी. कई लोग घायल हो गये.
शहीद के घर जुटे भारी संख्या में लोग
जानकारी के मुताबिक शहीद के घर स्थिति इतनी गंभीर हो गयी कि भगदड़ में डीएम व एसपी भी फंसे रहे. जितेंद्र सिंह के परिसर में जब उनका शव रखा गया, तो चारों तरफ चीत्कार मच गयी. परिजनों के साथ-साथ अन्य लोग शहीद के शव से लिपट कर रोने लगे. काफी प्रयास के बाद शहीद का शव उनके घर से निकाला जा सका. शव यात्रा उनके पैतृक गांव सिसवा के लिए रवाना हुई. रक्सौल से लेकर सिसवा तक लोगों की भीड़ लगी रही. कहीं भी एक इंच जगह खाली नहीं थी. सिसवा स्थित तिलावे नदी के तट पर शव यात्रा रूकी और सामाजिक परंपरा पूरा करने की कोशिश शुरू की गयी, लेकिन अनियत्रित भीड़ के कारण रस्म पूरा करने में पुलिस व सुरक्षा बल के जवानों को काफी मशक्कत करनी पड़ी.
अधिकारी और नेताओं ने पुष्प अर्पित किया
अंत्येष्टि के लिए पुलिस ने पहले से जगह तय कर रखी थी. बांस-बल्ले से बैरकेटिंग की गयी थी. लोग चंद मिनटों में बैरकेटिंग तोड़ कर सुरक्षा व्यवस्था को तोड़ कर शहीद के पार्थिव शरीर के पास पहुंच गये. लोगों को हटाने के लिए पुलिस बल के साथ-साथ एसपी को काफी मशक्कत करनी पड़ी. इस दौरान एसएसबी व एनडीआरएफ की टीम की तरफ से शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. भीड़ के कारण जवान खुद को असहज महसूस किये. इससे पहले जिलाधिकारी, पुलिस कप्तान समेत स्थानीय नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर अपनी संवेदना व्यक्त की. इस दौरान लोग हाथों में तिरंगा लेकर भारत के समर्थन में नारे लगा रहे थे, तो पाक मुर्दाबाद के नारे से शहर गूंज रहा था.
राज्य सरकार ने दिया 11 लाख मुआवजा
शहीद जितेंद्र सिंह के पार्थिव शरीर को रक्सौल लेकर पहुंचने वाले उनके मित्र व बीएसएफ के हवलदार माधव ओझा इस दौरान काफी भावुक दिखे. जितेंद्र सिंह के परिजनों को ढाढ़सबधाते हुए शहरवासियों से कहा कि सेना में जवान मारने व मरने का जज्बा लेकर जाता हैं. सेना का सबसे बड़ा सौभाग्य होता है कि उसका शव तिरंगा में लपेट कर उसके गांव पहुंचे. एक मित्र को खोने का गम उन्हें साल रहा है. वहीं डीएम अनुपम कुमार ने अंतिम संस्कार के उपरांत शहीद के घर पहुंच कर राज्य सरकार की तरफ से उनकी पत्नी विमला देवी को 11 लाख चेक प्रदान किया. इस दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि शहीद जितेंद्र सिंह के परिजन के साथ पूरा देश खड़ा है. उन्होंने यह भी कहा कि जितेंद्र सिंह का घर बनवाने व बच्चों की बेहतर शिक्षा देने की व्यवस्था की जायेगी.
